गोरखपुर में भाजपा की 'लोकतंत्र बचाओ-अराजकता हटाओ' पदयात्रा निकाली गई। नितिन नवीन और सीएम योगी की अगुवाई में हुए इस आयोजन में एनडीए के सहयोगी दलों के नेता शामिल हुए।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृह जनपद गोरखपुर में बुधवार को एनडीए की ओर से एक बड़ा राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन देखने को मिला। भाजपा की 'लोकतंत्र बचाओ-अराजकता हटाओ' पदयात्रा भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में निकाली गई। इस आयोजन के माध्यम से वर्ष 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले सत्तारूढ़ गठबंधन ने अपनी एकजुटता और रणनीतिक तैयारी का कड़ा संदेश दिया है।
महाराणा प्रताप इंटर कॉलेज से शुरू हुई यह पदयात्रा शहर के मुख्य मार्गों से होते हुए आगे बढ़ी। गोलघर की सड़कों और काली मंदिर मार्ग से गुजरते हुए यह यात्रा सरदार वल्लभभाई पटेल की प्रतिमा स्थल पर पहुंचकर संपन्न हुई। पूरे यात्रा मार्ग पर एनडीए के घटक दलों के विभिन्न रंगों और पारंपरिक झंडों ने एक साझा राजनीतिक तस्वीर पेश की। भाजपा के भगवा झंडों के साथ राष्ट्रीय लोकदल (रालोद), निषाद पार्टी और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के झंडे भी प्रमुखता से लहराते नजर आए। जगह-जगह कार्यकर्ताओं की भीड़ और 'लोकतंत्र बचाओ-अराजकता हटाओ' के नारों से पूरा मार्ग गूंजता रहा।
दिग्गज नेताओं की मौजूदगी से बढ़ा राजनीतिक कद
इस पदयात्रा में राष्ट्रीय और प्रांतीय स्तर के कई प्रमुख चेहरे एक मंच पर नजर आए। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ उत्तर प्रदेश भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी, राष्ट्रीय लोकदल के अध्यक्ष एवं केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी, निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं राज्य सरकार के मंत्री डॉ. संजय निषाद तथा सुभासपा के राष्ट्रीय महासचिव अरविंद राजभर इस आयोजन का हिस्सा बने। इन तमाम नेताओं की सहभागिता ने इसे केवल एक सामान्य पार्टी मार्च के बजाय एनडीए के साझा शक्ति प्रदर्शन में बदल दिया।
पूर्वांचल के राजनीतिक समीकरण और 2027 की तैयारी
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य आगामी 2027 के विधानसभा चुनावों के मद्देनजर पूर्वांचल के सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों को साधना है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गढ़ गोरखपुर में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष का आना और सहयोगी दलों के प्रमुखों को एक साथ मंच देना यह स्पष्ट करता है कि पार्टी आगामी चुनावों में किसी भी तरह के ढीलेपन से बचना चाहती है। जयंत चौधरी और संजय निषाद जैसे नेताओं की उपस्थिति से गठबंधन के भीतर सभी वर्गों और क्षेत्रों को साधने का संदेश दिया गया है।
आयोजन के दौरान मार्ग में स्थानीय नागरिकों और समर्थकों की भी अच्छी खासी मौजूदगी रही। इस दौरान राज्य सरकार के अब तक के कार्यकाल, विकास योजनाओं और कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर सकारात्मक चर्चाएं भी सामने आईं। हालांकि, राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस तरह के आयोजनों का वास्तविक प्रभाव चुनावी वैतरणी पार करने में कितना मददगार साबित होगा, यह आने वाले समय की रणनीतियों और जमीनी क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा। फिलहाल, इस पदयात्रा के जरिए गोरखपुर से एनडीए ने यह जता दिया है कि वह आगामी चुनावी चुनौतियों के लिए पूरी तरह संगठित और तैयार है।