वाराणसी में भगवान श्रीकृष्ण पर कथित टिप्पणी को लेकर बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री के खिलाफ अधिवक्ताओं ने प्रदर्शन किया और मुकदमा दर्ज करने की मांग की।
वाराणसी में अधिवक्ताओं और युवाओं ने बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र शास्त्री के खिलाफ कड़ा विरोध प्रदर्शन किया है। यह प्रदर्शन भगवान श्रीकृष्ण पर की गई कथित टिप्पणी को लेकर किया गया है, जिसमें वकीलों ने पुलिस कमिश्नर से मुकदमा दर्ज करने की मांग की है।
वाराणसी में कचहरी स्थित जिलाधिकारी कार्यालय के बाहर बड़ी संख्या में अधिवक्ता और युवा एकत्र हुए। प्रदर्शनकारियों ने बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र शास्त्री के खिलाफ नारेबाजी की और उनका पोस्टर भी जलाया। वकीलों का आरोप है कि शास्त्री के बयानों से सनातन धर्म के अनुयायियों की भावनाओं को गहरी ठेस पहुंची है।
व्यासपीठ से जुड़े बयानों पर आपत्ति
इस विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे अधिवक्ता आलोक सौरभ ने मीडिया और प्रशासनिक अधिकारियों के सामने अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि धीरेंद्र शास्त्री ने व्यासपीठ पर बैठकर भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं को कथित तौर पर 'खेल' बताया है और आराध्यों के बीच तुलना कर उन्हें बांटने का प्रयास किया है।
प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि इस तरह के बयानों से देश और दुनिया के करोड़ों सनातनियों की आस्था आहत हुई है। प्रदर्शन के दौरान वकीलों ने वाराणसी के पुलिस आयुक्त को इस संबंध में औपचारिक तहरीर दी है, जिसमें शास्त्री के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करते हुए मुकदमा दर्ज करने की मांग की गई है।
माफी के तरीके को लेकर असंतोष
इस पूरे घटनाक्रम के पीछे हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल हुआ एक वीडियो है। इस वायरल वीडियो में धीरेंद्र शास्त्री द्वारा भगवान श्रीकृष्ण और भगवान श्रीराम को लेकर कुछ तुलनात्मक टिप्पणियां की गई थीं, जिस पर विवाद बढ़ा।
विवाद बढ़ने के बाद धीरेंद्र शास्त्री की ओर से सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर माफी भी मांगी जा चुकी है। हालांकि, वाराणसी के अधिवक्ताओं का कहना है कि सोशल मीडिया के माध्यम से मांगी गई यह माफी पर्याप्त नहीं है। प्रदर्शनकारियों का स्पष्ट कहना है कि यदि माफी मांगनी ही है, तो वह व्यासपीठ से ही सार्वजनिक रूप से मांगी जानी चाहिए, तभी उसे स्वीकार किया जाएगा।
जिलाधिकारी कार्यालय के बाहर हुए इस प्रदर्शन और विरोध के दौरान अधिवक्ता आलोक सौरभ के साथ सुनील यादव, आनंद यादव, संदीप यादव समेत कई अन्य स्थानीय अधिवक्ता और युवा कार्यकर्ता भी प्रमुख रूप से मौजूद रहे।