वाराणसी के लालपुर-पाण्डेयपुर थाने में अधिवक्ता को सोशल मीडिया पर ब्लैकमेल करने और 10 लाख रुपये की रंगदारी मांगने के आरोप में FIR दर्ज की गई है।
वाराणसी के जिला एवं सत्र न्यायालय के एक अधिवक्ता को सोशल मीडिया के जरिए ब्लैकमेल करने और दस लाख रुपये की अवैध रंगदारी मांगने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। पीड़ित अधिवक्ता की तहरीर के आधार पर थाना लालपुर-पाण्डेयपुर में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस मामले की गंभीरता से जांच कर रही है।
वाराणसी कमिश्नरेट के अंतर्गत आने वाले लालपुर-पाण्डेयपुर थाने में यह मामला 3 नवंबर 2026 को दर्ज किया गया। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, इस अभियोग के लिए एफआईआर संख्या 0355/2026 आवंटित की गई है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जांच की कमान थाने के निरीक्षक कमलेश कुमार यादव को सौंपी गई है, जो सभी उपलब्ध साक्ष्यों और डिजिटल फुटप्रिंट्स की पड़ताल कर रहे हैं।
किन धाराओं में दर्ज हुआ है मुकदमा?
कानूनी विशेषज्ञों और पुलिस के अनुसार, इस गंभीर प्रकरण में भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की कई सख्त धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है। इनमें धारा 352, 351(3), 356(2) और 308(2) शामिल हैं। इसके अलावा साइबर अपराधों से निपटने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी (संशोधन) अधिनियम, 2008 की धारा 67 भी इस मुकदमे में जोड़ी गई है, जो इलेक्ट्रॉनिक रूप में अशिष्ट या आपत्तिजनक सामग्री प्रसारित करने से संबंधित है।
आकांक्षा ओझा और अनाहिता गोस्वामी समेत कई नामजद
दी गई शिकायत में कई व्यक्तियों को आरोपी बनाया गया है। नामजद आरोपियों में आकांक्षा ओझा, अनाहिता गोस्वामी, आदित्य ओझा, अवनीश त्रिपाठी और मंजू ओझा के नाम शामिल हैं। इनके अलावा कुछ अन्य अज्ञात सहयोगियों को भी प्राथमिकी में अभियुक्त बनाया गया है, जिनकी भूमिका की जांच की जा रही है।
फर्जी आईडी और हनीट्रैप का आरोप
शिकायतकर्ता अधिवक्ता के अनुसार, आरोपियों ने एक सुनियोजित साजिश के तहत काम किया। आरोप है कि फेसबुक, एक्स (पूर्व में ट्विटर) और इंस्टैंट मैसेजिंग ऐप व्हाट्सएप पर फर्जी सोशल मीडिया आईडी तैयार की गईं। इन फर्जी खातों के माध्यम से निजी चैट के स्क्रीनशॉट और छेड़छाड़ की गई सामग्री को वायरल करने की धमकी दी गई। आरोपियों का मकसद अधिवक्ता की सामाजिक प्रतिष्ठा को धूमिल करना था। इसी डर का फायदा उठाकर जान से मारने की धमकी दी गई और दस लाख रुपये की रंगदारी की मांग की गई, जो कि पूरी तरह से हनीट्रैप और ब्लैकमेलिंग के पैटर्न पर आधारित प्रतीत होती है।
मुंबई के ओशिवरा थाने में भी दर्ज है पूर्व मामला
अधिवक्ता ने अपनी दी गई तहरीर में यह भी महत्वपूर्ण तथ्य सामने रखा है कि इस गैंग द्वारा इसी कार्यप्रणाली यानी 'मोडस ऑपरेटिव' का इस्तेमाल करके पहले भी कई अन्य लोगों को निशाना बनाया जा चुका है। शिकायत के अनुसार, इसी प्रकार के एक अन्य मामले को लेकर पहले से ही मुंबई के ओशिवरा पुलिस स्टेशन में भी मामला दर्ज होने की बात कही गई है, जिसकी पुष्टि वाराणसी पुलिस अपनी तफ्तीश के दौरान कर रही है।
फिलहाल, लालपुर-पाण्डेयपुर पुलिस ने डिजिटल साक्ष्यों को खंगालना शुरू कर दिया है और नामजद आरोपियों की संलिप्तता के आधार पर वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।