मथुरा के शेरगढ़ में खाद्य सुरक्षा विभाग ने नकली पनीर बनाने वाली इकाई पर छापा मारा। व्हाइटनिंग एजेंट और सोडियम हाइड्रो सल्फेट से बन रहा था पनीर।
मथुरा के शेरगढ़ क्षेत्र में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) विभाग ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए मानव स्वास्थ्य के लिए घातक रसायनों की मदद से बनाए जा रहे नकली पनीर का भंडाफोड़ किया है। आगामी त्योहारों के सीजन के मद्देनजर मिलावटखोरों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत यह छापामार कार्रवाई की गई है।
नारायणगढ़ गांव में चल रही थी अवैध इकाई
खाद्य विभाग की टीम को स्थानीय स्तर पर एक सूचना मिली थी, जिसके आधार पर मंगलवार को शेरगढ़ थाना क्षेत्र के ग्राम नारायणगढ़ में दबिश दी गई। गांव के ही तस्लीम द्वारा संचालित इस पनीर निर्माण इकाई में बड़े पैमाने पर मिलावट का खेल चल रहा था। मौके पर जांच के दौरान अधिकारियों ने पाया कि इकाई में असली दूध के बजाय खतरनाक रसायनों और घटिया सामग्री का इस्तेमाल कर नकली पनीर तैयार किया जा रहा था, जिसे बाजार में खपाने की पूरी तैयारी थी।
पनीर बनाने में होता था इन खतरनाक रसायनों और सामग्रियों का इस्तेमाल
खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच में सामने आया कि इस इकाई में स्किम्ड मिल्क पाउडर, रानीपाल (कपड़ा और कागज उद्योग में ब्लीचिंग के लिए इस्तेमाल होने वाला सफेद रंग का व्हाइटनिंग एजेंट), पापड़ी यानी सोडियम हाइड्रोजन सल्फेट, रिफाइंड पॉमोलिन तेल और सोयाबीन दाल का प्रयोग किया जा रहा था। इन सभी चीजों को मिलाकर ऐसा मिश्रण तैयार किया जाता था जो देखने में बिल्कुल असली पनीर जैसा प्रतीत हो, लेकिन वास्तव में वह इंसानी शरीर के लिए जहर के समान था।
बड़ी मात्रा में खाद्य सामग्री और नमूने जब्त
छापेमारी के दौरान खाद्य विभाग की टीम ने मौके से कई खाद्य पदार्थों और रसायनों के नमूने एकत्र किए हैं। इनमें पनीर, दूध, 75 किलोग्राम स्किम्ड मिल्क पाउडर, 60 किलोग्राम सोयाबीन दाल, 225 किलोग्राम पॉमोलिन तेल, 1200 ग्राम पापड़ी (सोडियम हाइड्रोजन सल्फेट) और 500 ग्राम रानीपाल केमिकल शामिल हैं। इन सभी नमूनों को मुहरबंद कर परीक्षण के लिए प्रयोगशाला भेज दिया गया है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि इसमें और कौन-कौन से हानिकारक तत्व मौजूद थे।
350 किलो दूषित पनीर और 3000 लीटर दूध किया गया नष्ट
कार्रवाई के दौरान टीम ने मौके पर भारी मात्रा में रखे दूषित खाद्य पदार्थों को तुरंत नष्ट कराया। बाजार में बेचने के लिए तैयार रखा गया 87,500 रुपये मूल्य का 350 किलोग्राम दूषित पनीर मौके पर ही नष्ट कर दिया गया। इसके साथ ही करीब तीन हजार लीटर दूध को भी टीम ने नष्ट कराया। इकाई में मौजूद अन्य संदिग्ध निर्माण सामग्री और रसायनों को विभाग ने सीज कर दिया है।
स्वास्थ्य पर कितना गंभीर असर डालते हैं ये रसायन
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, रानीपाल जैसे व्हाइटनिंग एजेंट और सोडियम हाइड्रो सल्फाइड (सोडियम हाइड्रोजन सल्फेट) जैसे औद्योगिक रसायन मानव शरीर के लिए बेहद नुकसानदेह हैं। इन रसायनों का सामान्य रूप से कॉस्मेटिक्स जैसे त्वचा को गोरा करने वाली क्रीम, टूथ व्हाइटनिंग उत्पादों और कपड़ा तथा कागज उद्योगों में ब्लीचिंग के लिए उपयोग किया जाता है। खाद्य पदार्थों में इनका सेवन करने से सांस लेने में तकलीफ, त्वचा संबंधी गंभीर रोग और पाचन तंत्र बुरी तरह प्रभावित हो सकता है।
संचालक के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई
सहायक आयुक्त खाद्य जतिन कुमार सिंह ने बताया कि त्योहारी सीजन को देखते हुए मिलावटखोर सक्रिय हो जाते हैं, लेकिन आम जनता की सेहत से खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। खाद्य सुरक्षा अधिकारी की शिकायत पर मुख्य आरोपी और खाद्य कारोबारकर्ता तस्लीम के खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम (FSSAI) के सुसंगत प्रावधानों के तहत रिपोर्ट दर्ज करा दी गई है। विभाग द्वारा आगे भी इस तरह के अभियानों को कड़ाई से जारी रखने की बात कही गई है।