Breaking
► आगरा दौरे पर सीएम योगी: शिवाजी म्यूजियम का निरीक्षण और एमएलसी प्रत्याशियों के लिए जनसभा ► ड्रीम गर्ल हेमा मालिनी का फिल्मी सफर: पिता की नाराजगी से लेकर रिजेक्शन तक की कहानी ► पूर्व IAS दिव्या मित्तल ने बनाई 'जननीति भारत' पार्टी, 2027 के यूपी चुनाव पर नजर ► फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र के सहारे यूपी में चल रहे 3000 करोड़ के काम, जीएस एक्सप्रेस का ठेका रद्द करने की नोटिस ► सपा महानगर अध्यक्ष शब्बीर अब्बास का भाजपा पर हमला, महंगाई और बेरोजगारी को लेकर उठाए सवाल ► पटना में डेयरी फैक्ट्री पर खाद्य विभाग का छापा, खतरनाक केमिकल और मिलावटी मिठाइयां जब्त ► सुपौल: श्री राधा-कृष्ण ठाकुरबाड़ी मंदिर में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पंचमी पूजा संपन्न, षष्ठी पर होगा डांडिया ► बुरहानपुर में 151 मीटर लंबी चुनरी यात्रा: हेलीकॉप्टर से पुष्पवर्षा और उड़ते हनुमानजी की झांकी ने मोहा मन ► दिल्ली-NCR से यूपी-बिहार तक मौसम का हाल, 16 अक्टूबर को बारिश का अलर्ट ► नक्सलवाद की हर निशानी मिटाकर बस्तर को खुशहाल बनाएंगे: अमित शाह ► आगरा दौरे पर सीएम योगी: शिवाजी म्यूजियम का निरीक्षण और एमएलसी प्रत्याशियों के लिए जनसभा ► ड्रीम गर्ल हेमा मालिनी का फिल्मी सफर: पिता की नाराजगी से लेकर रिजेक्शन तक की कहानी ► पूर्व IAS दिव्या मित्तल ने बनाई 'जननीति भारत' पार्टी, 2027 के यूपी चुनाव पर नजर ► फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र के सहारे यूपी में चल रहे 3000 करोड़ के काम, जीएस एक्सप्रेस का ठेका रद्द करने की नोटिस ► सपा महानगर अध्यक्ष शब्बीर अब्बास का भाजपा पर हमला, महंगाई और बेरोजगारी को लेकर उठाए सवाल ► पटना में डेयरी फैक्ट्री पर खाद्य विभाग का छापा, खतरनाक केमिकल और मिलावटी मिठाइयां जब्त ► सुपौल: श्री राधा-कृष्ण ठाकुरबाड़ी मंदिर में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पंचमी पूजा संपन्न, षष्ठी पर होगा डांडिया ► बुरहानपुर में 151 मीटर लंबी चुनरी यात्रा: हेलीकॉप्टर से पुष्पवर्षा और उड़ते हनुमानजी की झांकी ने मोहा मन ► दिल्ली-NCR से यूपी-बिहार तक मौसम का हाल, 16 अक्टूबर को बारिश का अलर्ट ► नक्सलवाद की हर निशानी मिटाकर बस्तर को खुशहाल बनाएंगे: अमित शाह

कृष्ण जन्माष्टमी 2026: श्रद्धा और भक्ति में डूबा देश, सीएम योगी का विशेष संदेश

कृष्ण जन्माष्टमी 2026: श्रद्धा और भक्ति में डूबा देश, सीएम योगी का विशेष संदेश

कृष्ण जन्माष्टमी 2026: भक्ति के सागर में गोता लगाता भारत

आज 4 सितंबर 2026, शुक्रवार की शाम है और पूरा भारतवर्ष भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य उत्सव यानी जन्माष्टमी के रंग में रंगा हुआ है। द्वापर युग की वह पावन तिथि, जब मथुरा के कारागार में आधी रात को साक्षात नारायण ने देवकी और वासुदेव के पुत्र के रूप में अवतार लिया था, आज एक बार फिर वही दिव्यता महसूस की जा रही है। मंदिरों की घंटियों की गूंज और 'नंद के आनंद भयो जय कन्हैया लाल की' के जयघोष से वातावरण पूरी तरह से कृष्णमय हो गया है।

जन्माष्टमी का आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व

सनातन धर्म में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का स्थान अद्वितीय है। भगवान विष्णु के दशावतारों में आठवें अवतार के रूप में श्री कृष्ण ने पृथ्वी पर धर्म की स्थापना के लिए जन्म लिया था। गीता का उपदेश देने वाले योगेश्वर कृष्ण न केवल एक मार्गदर्शक हैं, बल्कि वे प्रेम, न्याय और नीति के प्रतीक भी हैं। आज के दिन भक्त उपवास रखते हैं, घरों और मंदिरों को फूलों और लाइटों से सजाते हैं और रात के 12 बजे तक भजन-कीर्तन करते हैं।

भक्तों का उत्साह: कार्तिकी और कुंज चौबे की विशेष प्रतिक्रिया

इस पावन अवसर पर उत्तर प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से भक्ति की अद्भुत तस्वीरें सामने आ रही हैं। इसी क्रम में कार्तिकी चौबे और कुंज चौबे जैसे श्रद्धालुओं ने अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हुए प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का हृदय से आभार जताया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के कुशल मार्गदर्शन और राज्य में कानून-व्यवस्था की सुदृढ़ स्थिति के कारण इस बार जन्माष्टमी का उत्सव पहले से कहीं अधिक सुरक्षित और भव्य तरीके से मनाया जा रहा है। मुख्यमंत्री द्वारा धार्मिक आयोजनों को दिए गए संरक्षण और प्रोत्साहन ने लाखों श्रद्धालुओं के मन में सुरक्षा और उत्साह का संचार किया है।

सुरक्षा और व्यवस्था के कड़े इंतजाम

वर्ष 2026 में जन्माष्टमी का पर्व शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हो, इसके लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने चाक-चौबंद व्यवस्था की है। खासकर मथुरा, वृंदावन और द्वारका जैसे प्रमुख तीर्थ स्थलों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए विशेष सुरक्षा घेरे बनाए गए हैं। राज्य प्रशासन ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि किसी भी भक्त को असुविधा न हो और दर्शन की प्रक्रिया सुगम बनी रहे।

क्यों मनाया जाता है जन्माष्टमी का पर्व?

  • धर्म की स्थापना: अधर्म के विनाश और धर्म के उत्थान के लिए कृष्ण का जन्म हुआ था।
  • आध्यात्मिक जागृति: यह दिन आत्मा के परमात्मा से मिलन का प्रतीक माना जाता है।
  • प्रेम का संदेश: राधा-कृष्ण का प्रेम निस्वार्थ भक्ति का सर्वोच्च उदाहरण है।

जन्माष्टमी की पूजा विधि और परंपराएं

जन्माष्टमी के दिन भक्त सुबह से ही पवित्र स्नान कर व्रत का संकल्प लेते हैं। मंदिरों में भगवान के बाल स्वरूप 'लड्डू गोपाल' का अभिषेक किया जाता है। उन्हें नए वस्त्र, आभूषण और मुकुट पहनाकर झूला झुलाया जाता है। रात के 12 बजते ही शंखनाद और घंटे-घडिय़ालों के साथ भगवान का जन्म मनाया जाता है। इसके पश्चात पंजीरी, माखन और मिश्री का भोग लगाया जाता है।

निष्कर्ष: भक्ति और विश्वास का संगम

आज के दौर में जब दुनिया भौतिकता की दौड़ में लगी है, जन्माष्टमी जैसे पर्व हमें अपनी जड़ों से जोड़ते हैं। कार्तिकी और कुंज चौबे जैसे भक्तों की भावनाएं यह दर्शाती हैं कि जब शासन और प्रशासन का सहयोग मिलता है, तो आस्था का उत्सव और भी अधिक गरिमापूर्ण हो जाता है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रति आम जनता का यह आभार यह स्पष्ट करता है कि सांस्कृतिक धरोहरों का संरक्षण आज के समय में कितनी बड़ी प्राथमिकता है।

हम सभी को इस जन्माष्टमी पर अपने भीतर के अंधकार को मिटाकर ज्ञान का दीपक जलाना चाहिए। भगवान कृष्ण का संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना द्वापर युग में था। निष्काम कर्म और सत्य की राह पर चलने का संकल्प ही इस पर्व की असली सार्थकता है। समस्त देशवासियों को जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं।

About the Author

रोशनी गुप्ता

रोशनी गुप्ता

Writer

रोशनी गुप्ता जमीनी पत्रकारिता के मजबूत स्तंभ हैं। वे स्थानीय स्तर की उन खबरों को सामने लाते हैं, जो अक्सर बड़े प्लेटफॉर्म पर नजर अंदाज हो जाती हैं।...

Read More

अगली खबर पढ़ें:

आगे पढ़ें →