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राम मंदिर को मिलने जा रहा है पहला CEO, इन तीन बड़े नामों पर टिकीं देश की निगाहें

राम मंदिर को मिलने जा रहा है पहला CEO, इन तीन बड़े नामों पर टिकीं देश की निगाहें

अयोध्या में भव्य राम मंदिर के संचालन और प्रबंधन को लेकर एक बेहद अहम और बड़ा कदम उठाया जाने वाला है। मंदिर निर्माण और प्राण प्रतिष्ठा के ऐतिहासिक चरणों के बाद अब इसके प्रशासनिक ढांचे को पूरी तरह से मजबूत करने की तैयारी अंतिम दौर में पहुंच चुकी है। राम मंदिर के पहले मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के पद के लिए प्रशासनिक गलियारों से लेकर धार्मिक हलकों तक सुगबुगाहट तेज हो गई है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सामने तीन बेहद अनुभवी और योग्य नामों की सिफारिश पहुंचाई गई है, जिन पर आज यानी बुधवार को होने वाली अहम बैठक में अंतिम मुहर लग सकती है।

प्रशासनिक कसावट और मंदिर का सुचारू संचालन

श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के कपाट आम श्रद्धालुओं के लिए खुलने और प्रतिदिन उमड़ने वाली लाखों की भीड़ को नियंत्रित करने के बाद ट्रस्ट यह महसूस कर रहा था कि मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था को संभालने के लिए एक समर्पित और पूर्णकालिक CEO का होना बेहद जरूरी है। मंदिर परिसर का विस्तार, सुरक्षा व्यवस्था, वित्तीय प्रबंधन, और वीवीआईपी दौरों के समन्वय जैसे तमाम बड़े काम अब तक ट्रस्ट के सदस्यों और चुनिंदा अधिकारियों के कंधों पर थे। एक स्वतंत्र CEO के आने से इन सभी कार्यों में अभूतपूर्व तेजी और पारदर्शिता आएगी।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, ट्रस्ट ने पिछले कुछ हफ्तों में कई प्रशासनिक अधिकारियों के बायोडाटा और उनके कार्य अनुभव का बारीकी से अध्ययन किया है। इसके बाद तीन सबसे मजबूत दावेदारों के नामों को शॉर्टलिस्ट किया गया है। इन नामों की सिफारिश पर आज ट्रस्ट के सभी प्रमुख सदस्य मंथन करेंगे और सर्वसम्मति से किसी एक नाम पर अंतिम फैसला सुनाया जाएगा।

किन तीन नामों पर हो रही है चर्चा?

अयोध्या और लखनऊ के प्रशासनिक हलकों में जिन तीन नामों की सबसे ज्यादा चर्चा है, वे सभी अपनी कार्यकुशलता और प्रशासनिक पकड़ के लिए जाने जाते हैं। हालांकि, ट्रस्ट की तरफ से अभी तक आधिकारिक रूप से नामों का खुलासा नहीं किया गया है, लेकिन जानकारों का मानना है कि इन तीनों में से ही किसी एक को यह ऐतिहासिक जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।

  • पहला नाम: एक ऐसे वरिष्ठ आईएएस अधिकारी का है जिन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार में धार्मिक कार्यों और पर्यटन विभाग में बड़े प्रोजेक्ट्स को सफलतापूर्वक संभाला है।
  • दूसरा नाम: एक सेवानिवृत्त प्रशासनिक अधिकारी का है, जिन्हें मंदिर प्रबंधन, वित्तीय लेखा-जोखा और बड़े आयोजनों के कुशल संचालन का लंबा अनुभव प्राप्त है।
  • तीसरा नाम: केंद्र सरकार के उपक्रम या अखिल भारतीय सेवाओं से जुड़े एक ऐसे प्रतिष्ठित अधिकारी का है, जिनकी छवि बेहद सख्त, ईमानदार और परिणाम-मुखी (results-oriented) मानी जाती है।

बुधवार को होने वाली बैठक क्यों है इतनी अहम?

आज यानी बुधवार को अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक बुलाई गई है। इस बैठक में मंदिर निर्माण की प्रगति की समीक्षा के साथ-साथ पहले CEO की नियुक्ति सबसे अहम एजेंडा है। मंदिर के गर्भगृह और परिसरों के शेष बचे निर्माण कार्यों को तय समय सीमा के भीतर पूरा करने की जिम्मेदारी भी नए CEO के पास होगी। इसके अलावा, देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधाओं को और अधिक उन्नत बनाने के लिए मास्टर प्लान तैयार करने का जिम्मा भी मुख्य कार्यकारी अधिकारी को ही सौंपा जाएगा।

श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या और नई चुनौतियां

साल 2026 के इन शुरुआती महीनों में अयोध्या आने वाले राम भक्तों की संख्या में रिकॉर्ड तोड़ इजाफा देखने को मिल रहा है। हर दिन औसतन लाखों लोग भगवान रामलला के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। ऐसे में इतनी भारी भीड़ का प्रबंधन करना, पेयजल, शौचालय, विश्राम स्थल और सुरक्षा जैसे बुनियादी इंतजामों को चाक-चौबंद रखना किसी चुनौती से कम नहीं है। ट्रस्ट का मानना है कि एक फुल-टाइम CEO के होने से इन व्यवस्थाओं में किसी भी प्रकार की कोताही की गुंजाइश नहीं बचेगी और निर्णय तुरंत लिए जा सकेंगे।

क्या होंगी नए CEO की मुख्य जिम्मेदारियां?

ट्रस्ट के संविधान और प्रशासनिक रूपरेखा के अनुसार, चुने जाने वाले पहले CEO के पास कई महत्वपूर्ण अधिकार और उत्तरदायित्व होंगे:

  • मंदिर न्यास के सभी दैनिक प्रशासनिक कार्यों की देखरेख करना।
  • दान, चढ़ावे और मंदिर की संपत्तियों का पारदर्शी वित्तीय प्रबंधन सुनिश्चित करना।
  • सुरक्षा एजेंसियों और स्थानीय जिला प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित करना।
  • भविष्य की परियोजनाओं, जैसे यात्री सुविधा केंद्र और संग्रहालय के निर्माण कार्यों की निगरानी करना।

आज दोपहर तक होने वाली इस उच्च स्तरीय बैठक के बाद साफ हो जाएगा कि राम मंदिर के प्रशासनिक सिंहासन की कमान किस अनुभवी हाथ में सौंपी जाती है। इस नियुक्ति पर न सिर्फ अयोध्या बल्कि पूरे देश के राम भक्तों की नजरें टिकी हुई हैं।

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रोशनी गुप्ता

रोशनी गुप्ता

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रोशनी गुप्ता जमीनी पत्रकारिता के मजबूत स्तंभ हैं। वे स्थानीय स्तर की उन खबरों को सामने लाते हैं, जो अक्सर बड़े प्लेटफॉर्म पर नजर अंदाज हो जाती हैं।...

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