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UP Election 2027: 11% आबादी और 100 सीटों का गणित, सपा-बसपा क्यों साध रहे ब्राह्मण?

UP Election 2027: 11% आबादी और 100 सीटों का गणित, सपा-बसपा क्यों साध रहे ब्राह्मण?

उत्तर प्रदेश की राजनीति एक बार फिर अपनी करवट बदल रही है। साल 2027 के शुरुआती महीनों में होने वाले विधानसभा चुनावों का कार्यकाल अभी भले ही दूर नजर आ रहा हो, लेकिन राजनीतिक दलों की जमीन पर हलचल तेज हो चुकी है। राज्य की सियासत में 'बुआ' (मायावती) और 'बबुआ' (अखिलेश यादव) के नाम से चर्चित दोनों ही क्षत्रप इस बार एक बेहद खास और निर्णायक वोट बैंक पर अपनी पैनी नजर गड़ाए हुए हैं—और वह है राज्य का ब्राह्मण मतदाता। सवाल यह है कि आखिर 11 प्रतिशत की आबादी वाला यह वर्ग अचानक चुनावी चर्चा के केंद्र में क्यों आ गया है?

सपा का प्रबुद्ध सम्मेलन और पीडीए का नया दायरा

समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव अपनी पारंपरिक पिछड़ों, दलितों और अल्पसंख्यकों (PDA) की रणनीति के दायरे को अब और बड़ा करने में जुट गए हैं। इसी कड़ी में लखनऊ स्थित सपा मुख्यालय में 'छोटे लोहिया' जनेश्वर मिश्र की जयंती के अवसर पर एक भव्य ब्राह्मण (प्रबुद्ध जन) सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस आयोजन का सीधा संदेश साफ था—पार्टी अब केवल एम-वाई (Muslim-Yadav) समीकरण तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि सवर्ण जातियों, खासतौर पर ब्राह्मण समाज के मध्यम वर्ग और बुद्धिजीवियों को यह भरोसा दिलाना चाहती है कि उनकी आवाज सपा में सुरक्षित है।

बसपा का सतीश चंद्र मिश्र कार्ड और पुराना इतिहास

दूसरी ओर, बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती भी पीछे नहीं हैं। बसपा ने साल 2007 के अपने उस सफल फार्मूले को फिर से जमीन पर उतारने की तैयारी शुरू कर दी है, जिसके दम पर पार्टी ने पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई थी। पार्टी ने वरिष्ठ नेता और कानूनी मामलों के जानकार सतीश चंद्र मिश्र को एक बार फिर से लीगल, मीडिया और चुनाव आयोग से जुड़े अहम कामकाज की कमान सौंपी है। मायावती ने सोशल मीडिया के जरिए भी यह स्पष्ट कर दिया है कि विरोधी पार्टियां कितनी भी चालें चल लें, लेकिन सर्वसमाज को साथ लेकर चलना ही बसपा की मूल ताकत है और ब्राह्मण समाज इस रणनीति का एक अहम हिस्सा रहा है।

यूपी की राजनीति में ब्राह्मण वोट बैंक का वजन

आंकड़ों की बात करें तो उत्तर प्रदेश में ब्राह्मण मतदाताओं की आबादी कुल जनसंख्या का लगभग 11 से 14 प्रतिशत के बीच आंकी जाती है। लेकिन असली ताकत उनकी संख्या में नहीं, बल्कि उनके प्रभाव में है। राज्य की करीब 100 से अधिक विधानसभा सीटें ऐसी हैं जहां ब्राह्मण वोटर सीधे तौर पर हार-जीत तय करने की क्षमता रखते हैं। इसके अलावा करीब 12 जिले ऐसे हैं जहां इस समाज की आबादी 15 प्रतिशत से अधिक है।

प्रमुख जिलों की बात करें तो इनमें:

  • गोरखपुर
  • वाराणसी
  • प्रयागराज (इलाहाबाद)
  • कानपुर
  • जौनपुर
  • देवरिया
  • बस्ती
  • संत कबीर नगर
  • महाराजगंज
  • अमेठी
  • बलरामपुर
  • चंदौली

इन क्षेत्रों में ब्राह्मण मतदाता बेहद मुखर माने जाते हैं और इनका राजनीतिक रुख आसपास की कई सीटों के चुनावी नतीजों को प्रभावित करता है।

इतिहास गवाह है: रसूख और मुख्यमंत्री पद

भले ही मुस्लिम और दलितों की आबादी कुल जनसंख्या के लिहाज से ब्राह्मणों से अधिक हो, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सत्ता के गलियारों में ब्राह्मण समाज का ऐतिहासिक दखल हमेशा से मजबूत रहा है। उत्तर प्रदेश के अब तक के राजनीतिक इतिहास में कुल 21 मुख्यमंत्री रहे हैं, जिनमें से अकेले 6 मुख्यमंत्री ब्राह्मण समुदाय से ताल्लुक रखते थे। इनमें कांग्रेस के दिग्गज नेता नारायण दत्त तिवारी ने तो तीन बार प्रदेश की कमान संभाली। इसके अलावा, मंडल आयोग के गठन और 90 के दशक की उथल-पुथल के बाद जब पिछड़ों और दलितों की राजनीति का उभार हुआ, तब शुरुआती झटकों के बावजूद इस समाज ने अपनी राजनीतिक प्रासंगिकता को कम नहीं होने दिया।

2027 का दंगल: क्या बदलेगी तस्वीर?

मुख्य चुनाव आयोग के मुताबिक, यूपी विधानसभा का मौजूदा कार्यकाल 22 मई 2027 को समाप्त हो रहा है। ऐसे में फरवरी-मार्च 2027 तक राज्य में नए चुनावी नतीजों की तस्वीर साफ हो जाएगी। यही वजह है कि जो दल कभी 'मनवावाद' के विरोध की राजनीति के सहारे सत्ता में आए थे, वे आज पूरी शिद्दत के साथ ब्राह्मणों को अपने पाले में लाने की हरसंभव कोशिश कर रहे हैं। आने वाले दिनों में यह सियासी खींचतान और ज्यादा तेज होने के पूरे आसार हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q1: उत्तर प्रदेश में ब्राह्मण मतदाताओं की कुल आबादी कितनी मानी जाती है?

उत्तर: यूपी में ब्राह्मणों की आबादी लगभग 11% से 14% के बीच मानी जाती है, जो राज्य के कई जिलों में निर्णायक भूमिका निभाती है।

Q2: यूपी विधानसभा का अगला चुनाव कब होना संभावित है?

उत्तर: मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल 22 मई 2027 को समाप्त हो रहा है, इसलिए चुनाव फरवरी-मार्च 2027 में होने की पूरी संभावना है।

Q3: सपा और बसपा दोनों ही इस वर्ग को क्यों साधना चाहती हैं?

उत्तर: प्रदेश की लगभग 100 से अधिक सीटों पर ब्राह्मण मतदाताओं का सीधा प्रभाव है, जो किसी भी दल की जीत या हार का समीकरण पलटने की ताकत रखते हैं।

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अनुराधा दुबे

अनुराधा दुबे

Content Writer

अनुराधा दुबे एक समर्पित और अनुभवी कंटेंट राइटर हैं, जो भारत से जुड़ी राजनीतिक, सामाजिक और नीतिगत खबरों को गहराई से समझकर पाठकों तक पहुंचाती हैं। उन...

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