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उत्तराखंड में 1 अक्टूबर से शुरू होगा मिलेट्स खरीद अभियान, मंडुवा का नया दाम तय

उत्तराखंड में 1 अक्टूबर से शुरू होगा मिलेट्स खरीद अभियान, मंडुवा का नया दाम तय

उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में पारंपरिक खेती को पुनर्जीवित करने और अन्नदाताओं की आय को दोगुना करने के लिए राज्य सरकार ने कमर कस ली है। प्रदेशभर में आगामी 1 अक्टूबर से एक व्यापक मिलेट्स खरीद अभियान का आगाज होने जा रहा है। इस योजना के तहत सरकार ने मंडुवा के समर्थन मूल्य में बड़ा इजाफा करते हुए इसे 52.05 रुपये प्रति किलो तय किया है, जिससे किसानों में भारी उत्साह देखने को मिल रहा है।

250 क्रय केंद्रों के माध्यम से होगी सीधी खरीद

किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए अब लंबी दूरियों तय करने या बिचौलियों के चक्कर काटने की आवश्यकता नहीं होगी। सहकारिता विभाग की शीर्ष संस्था उत्तराखंड राज्य सहकारी संघ (यूसीएफ) के जरिए गढ़वाल और कुमाऊं दोनों मंडलों में युद्ध स्तर पर खरीद की तैयारी पूरी कर ली गई है। पिछले साल जहां 214 क्रय केंद्र बनाए गए थे, वहीं इस बार इनकी संख्या बढ़ाकर 250 कर दी गई है। यानी 36 नए केंद्र खुलने से अधिक से अधिक किसानों को इसका सीधा लाभ मिल सकेगा।

इन केंद्रों पर केवल मंडुवा ही नहीं, बल्कि झंगोरा, चौलाई, दालें, तिलहन और अन्य पहाड़ी अनाजों की भी बड़े पैमाने पर खरीद की जाएगी। मंडुवा का मूल्य जहां 52.05 रुपये प्रति किलो निर्धारित किया गया है, वहीं अन्य पहाड़ी उत्पादों की खरीद बाजार भाव के आधार पर की जाएगी।

महज 18 रुपये से शुरू हुआ था सफर, अब मिला सही हक

पारंपरिक खेती को बढ़ावा देने के लिए सरकारों की नीतियां किस तरह रंग ला रही हैं, इसकी मिसाल मंडुवा खरीद के आंकड़ों से मिलती है। एक वक्त था जब मंडुवा महज 18 रुपये प्रति किलो की दर पर बिकता था, जिससे किसान इस पारंपरिक फसल से मुंह मोड़ने लगे थे। पिछले साल यह दर बढ़कर 48.86 रुपये प्रति किलो हुई और अब धामी सरकार ने इसे बढ़ाकर 52.05 रुपये प्रति किलो कर दिया है।

सरकार की मंशा साफ है कि उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों से होने वाले पलायन को रोका जाए और किसानों को उनकी मेहनत का पूरा और पारदर्शी मूल्य उनके बैंक खातों में सीधे डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के जरिए पहुंचाया जाए।

सहकारी समितियों को भी मिलेगी आर्थिक मजबूती

इस अभियान का एक और सकारात्मक पहलू यह है कि इससे जमीनी स्तर पर काम करने वाली सहकारी समितियों की वित्तीय स्थिति भी मजबूत होगी। नियमों के अनुसार, प्रत्येक क्विंटल की खरीद पर संबंधित सहकारी समिति को 200 रुपये की आय प्राप्त होगी। इससे समितियां अधिक सक्रिय होकर गांवों में किसानों के बीच कार्य कर सकेंगी।

यूसीएफ हाट के जरिए ब्रांडिंग और पैकेजिंग पर जोर

उत्तराखंड के जैविक उत्पादों को केवल स्थानीय स्तर पर ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में एक मजबूत पहचान दिलाने के लिए 'यूसीएफ हाट' की बड़ी भूमिका होगी। प्रबंध निदेशक आनंद शुक्ल ने जानकारी दी है कि खरीदे गए उत्पादों की बेहतरीन पैकेजिंग, आकर्षक ब्रांडिंग और आधुनिक विपणन (मार्केटिंग) की व्यवस्था की जाएगी ताकि पहाड़ी अनाजों को प्रीमियम कीमत मिल सके।

पिछले साल के आंकड़े बयां कर रहे हैं सफलता की कहानी

वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान चलाए गए अभियान के दौरान 214 क्रय केंद्रों के जरिए कुल 53,860.652 कुंतल मंडुवा खरीदा गया था, जिसका सीधा फायदा राज्य के 11,153 किसानों को मिला था। गढ़वाल मंडल के चमोली जिले और कुमाऊं मंडल के पिथौरागढ़ जिले में सबसे ज्यादा मंडुवा उत्पादन और बिक्री दर्ज की गई थी। इस बार केंद्रों की संख्या बढ़ने से इन आंकड़ों के और अधिक पार जाने की उम्मीद है।

100 प्रतिशत ऑर्गेनिक स्टेट बनने की ओर कदम

सहकारिता मंत्री डॉ. धन सिंह रावत का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के विजन के अनुरूप राज्य को 100 प्रतिशत ऑर्गेनिक स्टेट बनाने का लक्ष्य तय किया गया है। आने वाले समय में प्राकृतिक और जैविक उत्पादों की मांग देश-विदेश में तेजी से बढ़ने वाली है। ऐसे में हमारे किसानों द्वारा उपजाया गया मिलेट्स उनकी आर्थिक तकदीर बदलने में मील का पत्थर साबित होगा।

शासन स्तर से सभी जिलों के जिलाधिकारियों को स्पष्ट निर्देश जारी कर दिए गए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में इस अभियान का व्यापक प्रचार-प्रसार करें ताकि कोई भी पात्र किसान इस लाभकारी योजना से वंचित न रह जाए।

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रोशनी गुप्ता

रोशनी गुप्ता

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रोशनी गुप्ता जमीनी पत्रकारिता के मजबूत स्तंभ हैं। वे स्थानीय स्तर की उन खबरों को सामने लाते हैं, जो अक्सर बड़े प्लेटफॉर्म पर नजर अंदाज हो जाती हैं।...

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