पहाड़ों की रानी उत्तराखंड में एक बार फिर मौसम का मिजाज तेजी से बदलने जा रहा है। अक्टूबर महीने के इस दौर में जहां गुलाबी ठंड की शुरुआत होनी चाहिए थी, वहीं मौसम विभाग के नए पूर्वानुमान ने एक बार फिर बारिश, आंधी और बर्फबारी की चेतावनी जारी कर दी है। प्रदेश के कई जिलों में प्रकृति का यह बदला हुआ रूप अगले कुछ दिनों तक लोगों को प्रभावित कर सकता है, जिसे लेकर शासन-प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग भी पूरी तरह से मुस्तैद हो गया है।
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने राज्य के विभिन्न हिस्सों के लिए 6 अक्टूबर से लेकर 11 अक्टूबर तक का 'येलो अलर्ट' जारी किया है। इस दौरान खासकर पर्वतीय इलाकों में मौसम काफी तीखा रहने की आशंका जताई गई है, जो आम जनजीवन के साथ-साथ चारधाम यात्रा और पर्यटन गतिविधियों को भी प्रभावित कर सकता है।
कुमाऊं और गढ़वाल मंडल में बदलेगा मौसम का मिजाज
मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, आने वाले दिनों में कुमाऊं और गढ़वाल दोनों ही मंडलों के पर्वतीय क्षेत्रों में मौसम का यू-टर्न देखने को मिलेगा। इन इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश के साथ-साथ बादलों की गरज और तेज झक्कड़ हवाएं चलने की पूरी संभावना है। हालांकि, राहत की बात यह है कि अधिकांश मैदानी जिलों में मौसम के मुख्य रूप से शुष्क बने रहने का अनुमान है, जिससे मैदानी इलाकों के लोगों को उमस भरी गर्मी का सामना करना पड़ सकता है, जैसा कि राजधानी देहरादून में इन दिनों देखने को मिल रहा है।
राजधानी देहरादून में सोमवार को भी मौसम का मिजाज काफी बदला-बदला नजर आया। सुबह से ही आसमान में बादलों ने डेरा डाल रखा था और दिनभर धूप व बादलों के बीच आंख-मिचौली का खेल चलता रहा। हालांकि शहर के अधिकांश हिस्सों में बारिश खुलकर नहीं बरसी, लेकिन बादलों और धूप के इस मेल ने हवा में उमस को काफी बढ़ा दिया, जिससे स्थानीय नागरिकों को भारी चिपचिपाहट और परेशानी का सामना करना पड़ा।
ऊंचे हिमालयी क्षेत्रों में सीजन की पहली या अच्छी बर्फबारी के आसार
इस बार के मौसमी बदलाव की सबसे बड़ी विशेषता पर्वतीय क्षेत्रों में होने वाली बर्फबारी है। मौसम निदेशक डॉ. सीएस तोमर द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, मौसम की यह प्रणाली ऊंचाई वाले इलाकों में जोरदार असर दिखाएगी:
- 6 से 8 अक्टूबर: इस दौरान लगभग 4200 मीटर और उससे अधिक ऊंचाई वाले पर्वतीय और हिमालयी क्षेत्रों में अच्छी बर्फबारी होने के प्रबल आसार हैं। इससे तापमान में भारी गिरावट दर्ज की जाएगी।
- 9 से 11 अक्टूबर: इस अवधि में बर्फबारी का दायरा थोड़ा नीचे आएगा और करीब 3800 मीटर की ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भी बर्फ की सफेद चादर बिछ सकती है।
यह बर्फबारी पर्यटकों के लिए तो मनमोहक हो सकती है, लेकिन स्थानीय बागवानों और पशुपालकों के लिए यह ठंड के आगमन और सतर्कता का संकेत है।
इन जिलों में 30 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलेंगी हवाएं
मौसम विभाग ने विशेष तौर पर कुछ जिलों के लिए कड़े निर्देश जारी किए हैं। चमोली, नैनीताल, पिथौरागढ़, बागेश्वर, अल्मोड़ा, रुद्रप्रयाग और उत्तरकाशी जैसे संवेदनशील जनपदों में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है। इन तूफानी हवाओं के साथ-साथ बादलों की भयंकर गर्जना और आकाशीय बिजली (वज्रपात) गिरने का भी येलो अलर्ट घोषित किया गया है।
प्रशासन ने इन जिलों के निवासियों और पर्यटकों से अपील की है कि वे आकाशीय बिजली कड़कने के दौरान पेड़ों के नीचे बिल्कुल न खड़े हों और सुरक्षित स्थानों पर शरण लें।
6 और 7 अक्टूबर को इन इलाकों में मध्यम बारिश का अनुमान
मौसम के इस ताजा दौर में 6 और 7 अक्टूबर का दिन विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस दौरान नैनीताल, चंपावत, अल्मोड़ा, देहरादून, टिहरी और पौड़ी गढ़वाल जिलों में मध्यम दर्जे की बारिश होने की पूरी संभावना है। बारिश के साथ ही तेज गर्जन और वज्रपात की घटनाओं से इंकार नहीं किया जा सकता है।
लगातार हो रहे इस मौसमी बदलाव के मद्देनजर मौसम विज्ञान विभाग ने विशेष रूप से संवेदनशील पर्वतीय क्षेत्रों में यात्रा करने वाले लोगों और स्थानीय निवासियों को अत्यंत सतर्कता बरतने की सलाह दी है। भूस्खलन (Landslide) की आशंका वाले संवेदनशील जोन से गुजरते समय यात्रियों को पूरी सावधानी बरतने को कहा गया है।
प्रशासन और यात्रियों के लिए गाइडलाइंस
अक्टूबर के महीने में इस तरह का खराब मौसम पर्वतीय क्षेत्रों में अचानक ठंड बढ़ा देता है। चारधाम यात्रा पर आने वाले तीर्थयात्रियों को भी सलाह दी गई है कि वे अपने साथ गर्म कपड़े और मौसम की जानकारी के अनुसार ही अपनी यात्रा की योजना बनाएं। जिला प्रशासन को भी किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने के निर्देश दे दिए गए हैं ताकि मार्ग अवरुद्ध होने की स्थिति में तुरंत राहत कार्य शुरू किया जा सके।
कुल मिलाकर, उत्तराखंड के लोगों को अगले कुछ दिनों तक प्रकृति के इस बदले हुए तेवर का सामना करना होगा, जहां एक तरफ पर्वतों पर बर्फ की फुहारें गिरेंगी, वहीं दूसरी ओर मैदानी व तराई के इलाकों में बादलों की आवाजाही और उमस भरा माहौल बना रहेगा।