वाराणसी में गंगा नदी के बढ़ते जलस्तर और श्रद्धालुओं की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए प्रशासन ने पिछले 32 दिनों से नावों के संचालन पर पूरी तरह रोक लगा रखी है। इस प्रशासनिक पाबंदी ने काशी के घाटों पर जीवन का ताना-बाना बुनने वाले सैकड़ों नाविक परिवारों के सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। लगातार एक महीने से अधिक समय से आय का जरिया बंद होने के कारण इन परिवारों के लिए चूल्हा जलाना तक मुश्किल हो गया था। ऐसे कठिन समय में मल्लाह और निषाद समाज के दर्द को समझते हुए 'मां गंगा निषाद राज सेवा न्यास' देवदूत बनकर सामने आया है।
चेतसिंह किला हाता में हुआ राहत सामग्री का वितरण
शनिवार को भेलूपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ऐतिहासिक चेतसिंह किला हाता स्थित बाला नंद आश्रम में एक विशेष राहत सामग्री वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य उन नाविक परिवारों को संबल प्रदान करना था, जिनकी आजीविका पूरी तरह से गंगा में नावें चलाने पर निर्भर है। संस्था की ओर से इस पहले चरण के अभियान के तहत करीब 500 जरूरतमंद नाविक परिवारों को राशन और रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुओं से भरे पैकेट वितरित किए गए।
राहत सामग्री पाने वाले नाविकों के चेहरों पर एक तरफ जहां पिछले एक महीने से चल रही मुसीबतों की लकीरें थीं, वहीं दूसरी तरफ अपनों की इस मदद से एक नई उम्मीद भी दिखाई दे रही थी। सामग्री मिलने के बाद नाविक परिवारों ने संस्था और उसके पदाधिकारियों के प्रति अपनी गहरी कृतज्ञता व्यक्त की।
प्रशासनिक नियमों का सम्मान और समाज की जिम्मेदारी
कार्यक्रम के दौरान 'मां गंगा निषाद राज सेवा न्यास' के अध्यक्ष प्रमोद मांझी ने मीडिया और स्थानीय लोगों से बात करते हुए इस पूरे संकट और संस्था के उठाए गए कदम पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए प्रशासन की ओर से जो भी कदम उठाए गए हैं, पूरा निषाद समाज उसका पूरी तरह से सम्मान करता है।
"नाव संचालन बंद होने से हमारे समाज के सामने भयंकर आर्थिक परेशानियां खड़ी हो गई हैं। एक तरफ प्रशासन के सुरक्षा नियमों का पालन करना हमारी जिम्मेदारी है, तो दूसरी तरफ संकट में फंसे अपने भाई-बहनों की मदद करना हमारा नैतिक कर्तव्य है। इसी सोच के साथ हमने समाज के प्रबुद्धजनों के साथ बैठक कर इस राहत अभियान की रूपरेखा तैयार की।" - प्रमोद मांझी, अध्यक्ष, मां गंगा निषाद राज सेवा न्यास
उन्होंने आगे बताया कि इस अभियान के तहत खासतौर पर उन परिवारों को प्राथमिकता दी गई है, जिनकी कमाई का इकलौता साधन गंगा में पर्यटकों और श्रद्धालुओं को घुमाना या नावें पार ले जाना है। जब मुख्य आय का स्रोत ही ठप हो जाए, तो एक मध्यम या गरीब परिवार के लिए महीनेभर का गुजर-बसर करना कितना कठिन होता है, इसका अंदाजा इन 32 दिनों की खामोश रातों से लगाया जा सकता है।
आगे भी जारी रहेगी मदद, संकट के समय साथ खड़ा है समाज
गंगा का जलस्तर घटने और सामान्य स्थिति बहाल होने में अभी कितना वक्त लगेगा, यह कहना फिलहाल मुश्किल है। मौसम और प्रशासनिक दिशा-निर्देशों को देखते हुए यदि यह प्रतिबंध आगे भी जारी रहता है, तो नाविकों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। इस आशंका को भांपते हुए न्यास के पदाधिकारियों ने यह भरोसा दिलाया है कि वे हाथ पर हाथ धरे नहीं बैठेंगे।
अध्यक्ष प्रमोद मांझी ने कड़े शब्दों में आश्वासन दिया कि यदि नाव संचालन पर प्रतिबंध आगे भी जारी रहा और नाविक परिवारों की आर्थिक बदहाली बनी रही, तो संस्था अपने इस राहत अभियान को और आगे बढ़ाएगी। जरूरत पड़ने पर और अधिक परिवारों तक राशन और अन्य जरूरी सामग्रियां पहुंचाई जाएंगी। उन्होंने दो टूक कहा कि यह संकट पूरे निषाद समाज का संकट है और वे हर परिस्थिति में अपने नाविक भाइयों के साथ तन, मन और धन से खड़े हैं।
कार्यक्रम में इनकी रही विशेष उपस्थिति
इस मानवीय पहल को सफल बनाने में संस्था के तमाम पदाधिकारियों और सदस्यों ने अपनी सक्रिय भूमिका निभाई। कार्यक्रम के दौरान प्रमुख रूप से निम्नलिखित लोग उपस्थित रहे:
- बबलू साहनी (महामंत्री)
- सतनारायण साहनी (उपाध्यक्ष)
- शंभू साहनी (संगठन मंत्री)
- अजीत साहनी (कोषाध्यक्ष)
- राकेश साहनी (मंत्री)
- सरजू साहनी (उपाध्यक्ष)
- इसके अलावा नारायण साहनी, धीरज साहनी, संतोष साहनी समेत कई अन्य गणमान्य सदस्य भी मौजूद रहे जिन्होंने पूरी व्यवस्था को सुचारू रूप से संचालित करने में अपना योगदान दिया।
नाविकों की उम्मीदों को मिला एक नया संबल
वाराणसी की पहचान यहां के घाटों से है और घाटों की असली जान यहां के नाविक हैं जो पीढ़ियों से गंगा की लहरों के बीच अपनी जिंदगी गुजारते आए हैं। पिछले 32 दिनों से घाटों पर सन्नाटा पसरा हुआ है और नावें किनारे पर लंगर डाले खड़ी हैं। इस अप्रत्याशित मंदी और संकट के दौर में स्थानीय स्तर पर शुरू किए गए ऐसे सामाजिक प्रयास समाज के कमजोर वर्ग को टूटने से बचाते हैं।
फिलहाल, इस राहत सामग्री के मिलने से 500 परिवारों को तत्काल प्रभाव से बड़ी राहत मिली है। लेकिन आने वाले दिनों में जब तक प्रशासन की ओर से नाव संचालन को हरी झंडी नहीं मिलती, तब तक इन परिवारों की निगाहें आसमान और गंगा के जलस्तर के साथ-साथ ऐसे ही सामाजिक सहयोग की तरफ टिकी रहेंगी।