काशी की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक नगरी में इन दिनों उत्सव का माहौल चरम पर है। वैसे तो वाराणसी अपनी प्राचीन परंपराओं और देव दीपावली, महाशिवरात्रि जैसे आयोजनों के लिए पूरी दुनिया में विख्यात है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में यहां अन्य राज्यों के सांस्कृतिक उत्सवों का रंग भी बेहद खूबसूरती से घुलने लगा है। ऐसा ही एक अद्भुत नजारा शनिवार, 19 सितंबर 2026 को शहर के पांडेयपुर और लालपुर इलाकों में देखने को मिला, जहां गणेशोत्सव की धूम ने पूरे क्षेत्र को महाराष्ट्र के रंग में रंग दिया।
मराठी परंपरा और काशी की आस्था का संगम
पांडेयपुर और लालपुर क्षेत्र में निकाली गई भगवान गणेश की शोभायात्रा ने स्थानीय लोगों का मन मोह लिया। इस आयोजन की सबसे खास बात यह रही कि इसमें पूरी तरह से पारंपरिक मराठी पद्धति का पालन किया गया। बप्पा की स्थापना से लेकर पूजा-अर्चना और आरती के तौर-तरीके तक, सब कुछ महाराष्ट्र की तर्ज पर आयोजित किया गया। ढोल-ताशों की गड़गड़ाहट और 'गणपति बाप्पा मोरया, मंगलमूर्ति मोरया' के जयकारों से पूरा इलाका गूंज उठा।
सुबह से ही पंडालों में भक्तों की भारी भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी। हर कोई अपने आराध्य के एक झलक पाने के लिए बेताब दिखा। महिलाओं और युवाओं में गजब का उत्साह देखने को मिला। पारंपरिक वेशभूषा में सजे धजे भक्त बप्पा की भक्ति में सराबोर नजर आए।
पारंपरिक वाद्य यंत्रों और लेजिम की गूंज ने बांधा समां
शोभायात्रा के दौरान जब पारंपरिक ढोल-ताशों और झांकियों का दौर शुरू हुआ, तो सड़क के दोनों ओर खड़े दर्शकों ने भी तालियों के साथ कलाकारों का उत्साहवर्धन किया। महाराष्ट्र की प्रसिद्ध 'लेजिम' नृत्य शैली और सांस्कृतिक धुनों ने ऐसा समां बांधा कि हर कोई झूमने को मजबूर हो गया। स्थानीय युवाओं ने इस दौरान बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और अनुशासन के साथ पूरी यात्रा को भव्यता प्रदान की.
"काशी में इस तरह के आयोजनों से न सिर्फ सांस्कृतिक आदान-प्रदान बढ़ता है, बल्कि विभिन्न राज्यों की संस्कृति को नजदीक से जानने का अवसर भी मिलता है। बप्पा की इस पूजा ने हमें मुंबई और पुणे के गणेशोत्सव की याद दिला दी।" - एक स्थानीय श्रद्धालु
सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम
त्योहार के इस उल्लास को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और पुलिस विभाग भी पूरी तरह मुस्तैद नजर आया। शोभायात्रा के मार्ग पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे ताकि किसी भी प्रकार की असुविधा से बचा जा सके। यातायात को सुचारू रूप से चलाने के लिए रूट डायवर्जन भी किए गए थे, जिससे आम जनता को कम से कम परेशानी का सामना करना पड़े। पुलिस बल के जवानों के साथ-साथ स्थानीय समितियों के स्वयंसेवक भी व्यवस्था संभालने में मुस्तैदी से जुटे रहे।
भक्तों ने मांगी सुख, शांति और समृद्धि की मन्नतें
शोभायात्रा के समापन पर महाआरती का आयोजन किया गया, जिसमें सैकड़ों की संख्या में भक्तों ने हिस्सा लिया। प्रसाद वितरण के बाद सभी ने भगवान गणेश से अपने परिवार, समाज और देश की सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। इस आयोजन ने एक बार फिर साबित कर दिया कि काशी में हर संस्कृति का स्वागत खुले दिल से किया जाता है और यहां की आबोहवा में हर त्योहार एक बड़े उत्सव का रूप ले लेता है।
आने वाले दिनों में विसर्जन तक शहर के विभिन्न हिस्सों में ऐसे ही कई धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन की रूपरेखा तैयार की जा रही है, जिससे काशी की गलियां और चौराहे पूरी तरह से भक्तिमय नजर आएंगे।