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वाराणसी में नहीं दिखा रबीउल आखिर का चांद, जानिए कब है ग्यारहवीं शरीफ

वाराणसी में नहीं दिखा रबीउल आखिर का चांद, जानिए कब है ग्यारहवीं शरीफ

वाराणसी के धार्मिक और आध्यात्मिक गलियारों से एक बड़ी और अहम जानकारी सामने आई है। इस्लामिक कैलेंडर के अगले महीने यानी माहे रबीउल आखिर 1448 हिजरी के चांद को लेकर स्थिति साफ हो गई है। शनिवार की शाम आसमान में चांद का दीदार नहीं होने के कारण महीनों की गणना में एक दिन का इजाफा कर दिया गया है। इस घोषणा के बाद शहर के मुस्लिम समुदाय ने आगामी त्योहारों और धार्मिक आयोजनों की तारीखों को लेकर अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं।

वाराणसी में चांद दिखने को लेकर क्या रही स्थिति?

शनिवार 12 सितंबर 2026 को माहे रबीउल अव्वल की 29 तारीख थी। इस्लामिक परंपरा और शरियत के नियमों के अनुसार हर महीने की 29वीं शाम को नए चांद की तलाश की जाती है ताकि यह तय किया जा सके कि महीना 29 दिन का होगा या 30 दिन का। इसी क्रम में वाराणसी की प्रमुख धार्मिक संस्था मरकजी रुइयते हिलाल कमेटी अहले सुन्नत, बनारस की देखरेख में चांद देखने का प्रयास किया गया।

कमेटी की ओर से शहर के विभिन्न हिस्सों और आसपास के इलाकों में चांद देखने के लिए निगाहें आसमान पर टिकी थीं। हालांकि, तमाम कोशिशों और तय समय के बाद भी वाराणसी या इसके किसी भी उपनगर से चांद नजर आने की कोई आधिकारिक सूचना प्राप्त नहीं हुई। मौसम और बादलों की स्थिति को देखते हुए चांद का दीदार संभव नहीं हो सका।

अब कब से शुरू होगा माहे रबीउल आखिर?

जब शनिवार को चांद नजर नहीं आया, तो शरिया के उसूलों के मुताबिक रबीउल अव्वल महीने को 30 दिन का पूरा करने का निर्णय लिया गया। इसके तहत:

  • रविवार, 13 सितंबर 2026: इस दिन रबीउल अव्वल 1448 हिजरी की 30वीं और आखिरी तारीख होगी।
  • सोमवार, 14 सितंबर 2026: इस दिन से माहे रबीउल आखिर 1448 हिजरी की पहली तारीख (पहली चांद) का आगाज होगा।

इस प्रकार, जिन लोगों को नए महीने के शुरू होने का इंतजार था, उनके लिए अब सोमवार से नया इस्लामिक महीना शुरू हो जाएगा।

कब है ग्यारहवीं शरीफ? जानिए सही तारीख

माहे रबीउल आखिर के शुरू होने के साथ ही इस महीने से जुड़ी सबसे अहम तारीख यानी 'ग्यारहवीं शरीफ' की तारीख भी तय हो गई है। कमेटी के शेड्यूल के अनुसार:

गुरुवार, 24 सितंबर 2026 को माहे रबीउल आखिर की 11वीं तारीख होगी। इसी दिन पूरी अकीदत और एहतराम के साथ ग्यारहवीं शरीफ का मुबारक दिन मनाया जाएगा। देश और दुनिया के तमाम हिस्सों की तरह वाराणसी और आसपास के इलाकों में भी इस दिन विशेष धार्मिक अनुष्ठान, मिलाद और फातिहाखानी का आयोजन किया जाएगा।

शहर के काजी की ओर से जारी हुई आधिकारिक सूचना

यह तमाम आधिकारिक घोषणाएं मरकजी दारुल-इफ्ता जमाअत रजा-ए-मुस्तफा, बनारस की तरफ से की गई हैं। यह सूचना काजी-ए-शहर एवं खलीफा-ए-ताजुश्शरिया हजरत मौलाना जमील अहमद कादरी रजवी के कार्यालय से सार्वजनिक की गई है।

कार्यालय की तरफ से यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि इसके बाद भी देश के किसी अन्य हिस्से या वाराणसी के किसी दूरदराज इलाके से 29 तारीख की रुइयत (चांद दिखने) का कोई पुख्ता शरिई सुबूत बाद में प्राप्त होता है, तो कमेटी की ओर से तदनुसार दोबारा ऐलान किया जाएगा। हालांकि, फिलहाल जो स्थिति है उसके अनुसार 14 सितंबर को ही महीने की शुरुआत मानी जाएगी।

कहाँ और किसके लिए है यह आदेश?

मरकजी रुइयते हिलाल कमेटी ने स्पष्ट किया है कि यह चांद से जुड़ी घोषणा और तारीखों का निर्धारण मुख्य रूप से बनारस (वाराणसी) और 'मुजफ्फत ए बनारस' (बनारस के आसपास के क्षेत्रों) के लिए मान्य है। स्थानीय नागरिकों और मस्जिदों के इमामों से इसी कैलेंडर के अनुसार आगे के धार्मिक कार्यों को संचालित करने की अपील की गई है।

वाराणसी में इस घोषणा के बाद से ही बाजारों में और धार्मिक आयोजनों की तैयारियों में तेजी आ गई है। लोग अब आगामी 24 सितंबर को आने वाली ग्यारहवीं शरीफ की तैयारियों में जुट गए हैं। घरों में साफ-सफाई और विशेष पकवानों के साथ इस मुबारक दिन को मनाने की रूपरेखा तैयार की जा रही है।

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रोली सिंह

रोली सिंह

Writer (स्थानीय खबरें)

रोली सिंह पिछले 2 सालों से पत्रकारिता और न्यूज़ रिपोर्टिंग से जुड़ी हैं। वह लोकल न्यूज़ और लोगों से जुड़े मुद्दों को पढ़ने वालों तक पहुंचाने का काम...

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