सनातन संस्कृति के केंद्र और धर्म नगरी वाराणसी में इन दिनों उत्सव का माहौल चरम पर है। चारों तरफ बप्पा के जयकारे गूंज रहे हैं और हर गली-محल्ला भगवान गणेश के स्वागत में सराबोर है। इस बीच, सोनारपुरा स्थित ऐतिहासिक काशी खंडोक्त श्री श्री 1008 चिंतामणि गणेश मंदिर में गणेश जन्मोत्सव के अवसर पर एक ऐसा अलौकिक नजारा देखने को मिला, जिसने भी देखा, वह देखता ही रह गया। इस विशेष पर्व पर मंदिर को किसी स्वर्ग लोक की भांति सजाया गया, जहां आधुनिकता और परंपरा का अनूठा संगम देखने को मिला। चिलचिलाती और उमस भरी गर्मी के बीच जब श्रद्धालुओं ने मंदिर में प्रवेश किया, तो बर्फ की ठंडक और हरियाली के बीच बैठे भगवान गणेश के दर्शन कर उनकी सारी थकान पलभर में छूमंतर हो गई।
101 बर्फ की सिल्लियों से सजाई गई अद्भुत 'बर्फ बिहार' झांकी
इस बार गणेश जन्मोत्सव पर मंदिर प्रशासन ने कुछ ऐसा अनूठा करने का निर्णय लिया जो शहरभर में चर्चा का विषय बन गया है। मंदिर परिसर में कुल 101 बर्फ की सिल्लियों को करीने से सजाकर एक भव्य 'बर्फ बिहार' झांकी तैयार की गई। इन बर्फ की सिल्लियों के बीच विराजमान भगवान चिंतामणि गणेश का अलौकिक स्वरूप देखते ही बनता था। दूर-दूर से आ रहे भक्तों के लिए यह झांकी मुख्य आकर्षण का केंद्र रही। तपिश भरे मौसम में बर्फ की ठंडक के बीच गणपति के दर्शन करना भक्तों के लिए एक बेहद सुखद और आध्यात्मिक अनुभव रहा। मंदिर के महंत श्री चल्ला सुब्बाराव शास्त्री ने बताया कि इस प्रकार के आयोजनों का उद्देश्य न केवल उत्सव को भव्य बनाना है, बल्कि श्रद्धालुओं को एक सकारात्मक और दिव्य ऊर्जा का अहसास कराना भी है।
बर्फ की सिल्लियों के अलावा मंदिर के पूरे प्रांगण को प्रकृति के करीब रखते हुए सजाया गया। हजारों की संख्या में ताजे फूल-पत्तियों, तरह-तरह के फलों और पारंपरिक पान के पत्तों का उपयोग करके मंदिर की भव्यता को कई गुना बढ़ा दिया गया। इसके साथ ही, रंग-बिरंगे गुब्बारों और लड़ीनुमा सजावट ने मंदिर के हर कोने को रोशन कर दिया। श्रद्धालुओं के आने-जाने वाले मुख्य मार्गों को भी विशेष तौर पर फूलों और हरियाली से सजाया गया था, जिससे सोनारपुरा क्षेत्र का पूरा माहौल पूरी तरह से भक्तिमय और ऊर्जावान नजर आ रहा था।
51 किलो लड्डुओं का महाभोग और छप्पन भोग का अर्पण
प्रथम पूज्य भगवान गणेश को उनकी पसंद का भोग लगाना इस उत्सव का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा रहा। इस पावन अवसर पर चिंतामणि गणेश को कुल 51 किलोग्राम शुद्ध देसी घी से बने मोदक और लड्डुओं का विशेष भोग अर्पित किया गया। इसके साथ ही विभिन्न प्रकार के व्यंजनों से सजा हुआ पारंपरिक छप्पन भोग भी भगवान को समर्पित किया गया। मंदिर के पुजारियों द्वारा पूरी विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ यह अनुष्ठान संपन्न कराया गया।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चिंतामणि गणेश के दरबार में जो भी भक्त सच्ची श्रद्धा के साथ हाजिरी लगाता है, उसकी तमाम चिंताएं और कष्ट दूर हो जाते हैं। यही वजह है कि सुबह से ही मंदिर के कपाट खुलते ही भक्तों का तांता लगना शुरू हो गया था। कतारों में खड़े लोग अपनी बारी का इंतजार करते हुए गणपति बप्पा मोरया के जयकारे लगा रहे थे। पूजन और भोग अर्पण के बाद मंदिर प्रबंधन की ओर से हजारों श्रद्धालुओं के बीच महाप्रसाद का वितरण किया गया, जिसे पाने के लिए लोगों में विशेष उत्साह देखा गया।
शाम को सजी भजन संध्या, गूंजी गणपति की महिमा
दिनभर चले धार्मिक अनुष्ठानों और दर्शन-पूजन के बाद, जैसे ही शाम ढली, मंदिर परिसर में एक अलग ही आध्यात्मिक हलचल शुरू हो गई। शाम छह बजे से आयोजित भव्य भजन संध्या ने इस उत्सव में चार चांद लगा दिए। वाराणसी के प्रतिष्ठित और स्थानीय कलाकारों ने अपने सुरीले कंठों से भगवान गणेश की महिमा का गुणगान किया। जब कलाकारों ने एक से बढ़कर एक गणपति के भजन और स्तुतियां प्रस्तुत कीं, तो पूरा मंदिर परिसर संगीत की धुनों में झूम उठा।
'सुत वंदन विनायक...' और 'गजानन हे शुभ नाम...' जैसे भजनों पर श्रोता मंत्रमुग्ध होकर झूमते नजर आए। ढोलक, मंजीरे और हारमोनियम की थाप पर गूंजते इन भजनों ने पूरे वातावरण को पूरी तरह से भक्ति के रंगों में रंग दिया। रात तक चले इस संगीत के कार्यक्रम में शहर के तमाम गणमान्य नागरिक और बड़ी संख्या में युवा और बुजुर्ग श्रद्धालु उपस्थित रहे।
भक्तों की उमड़ी भारी भीड़, सुरक्षा और व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम
गणेश जन्मोत्सव के इस भव्य आयोजन को लेकर स्थानीय प्रशासन और मंदिर समिति ने सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण के बेहद कड़े इंतजाम किए थे। सोनारपुरा जैसे व्यस्त इलाके में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए वालंटियर्स और पुलिस बल को तैनात किया गया था, ताकि दर्शनार्थियों को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। बुजुर्गों और महिलाओं के लिए दर्शन की विशेष व्यवस्था की गई थी।
मंदिर के महंत श्री चल्ला सुब्बाराव शास्त्री ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि भगवान गणेश विघ्नहर्ता हैं और उनका यह धाम भक्तों के सभी दुखों को हरने वाला है। हर साल गणेश जन्मोत्सव पर यहां विशेष आयोजन किए जाते हैं, लेकिन इस बार बर्फ की सिल्लियों और हरियाली श्रृंगार के रूप में जो भव्यता देखने को मिली है, वह हमेशा याद रखी जाएगी। शहरवासियों का यह अभूतपूर्व सहयोग और बप्पा के प्रति अटूट आस्था इस बात का प्रमाण है कि सनातन धर्म की जड़ें वाराणसी की संस्कृति में कितनी गहरी हैं। देर रात तक मंदिर परिसर में भक्तों के आने का सिलसिला जारी रहा और पूरा शहर गणेशमय नजर आया।