वाराणसी के भेलूपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सरायनंदन बजरडीहा इलाके में मंगलवार की सुबह एक ऐसा वाकया हुआ जिसने आसपास के तमाम लोगों की सांसे रोक दीं। सुबह के ठीक सात बजे का वक्त था, जब हर घर में दिन की शुरुआत की तैयारियां चल रही थीं। इसी दौरान एक मकान से उठी अचानक लपटों और एक दिल दहला देने वाले तेज धमाके ने पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल पैदा कर दिया। गनीमत यह रही कि इस भयंकर हादसे में किसी भी प्रकार की जनहानि नहीं हुई, वरना लापरवाही या थोड़ी सी भी देर बड़ा खूनी खेल खेल सकती थी।
सुबह सात बजे की वह खौफनाक सुबह
प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय नागरिकों से मिली जानकारी के मुताबिक, घटना के वक्त एक स्थानीय परिवार के रसोई घर में गैस चूल्हे पर नाश्ता तैयार किया जा रहा था। घर की महिलाएं सुबह के कामकाज में व्यस्त थीं और बच्चे भी आसपास ही मौजूद थे। इसी बीच अचानक गैस सिलेंडर से लीक हो रही गैस ने आग पकड़ ली। देखते ही देखते आग की लपटें इतनी तेजी से फैलीं कि रसोईघर का माहौल डरावना हो गया। आग की इस भयंकर रूप को देखकर परिवार के होश उड़ गए।
स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए घर की एक सूझबूझ भरी महिला ने बिना एक पल गंवाए असाधारण साहस का परिचय दिया। उसने घबराने के बजाय सबसे पहले बच्चों को अपनी आगोश में लिया और उन्हें सुरक्षित तरीके से घर से बाहर खींच लाई। परिवार के अन्य सदस्य भी अपनी जान बचाने के लिए फौरन घर से बाहर सड़क पर आ गए।कुछ ही पलों में हुआ तेज धमाका, उड़ गए चिथड़े
जैसे ही परिवार के सभी सदस्य घर से बाहर सुरक्षित दूरी पर पहुंचे, उसके ठीक कुछ ही सेकंड बाद एक जोरदार और कान के पर्दे फाड़ देने वाला धमाका हुआ। सिलेंडर इतनी भीषण ताकत के साथ फटा कि आसपास की हवा तक कांप उठी। धमाके की आवाज इतनी तेज थी कि कई किलोमीटर दूर तक के लोग सहम गए। लोगों को लगा कि शायद कोई बड़ा बम फटा है या फिर भूकंप का कोई बड़ा झटका आया है।
धमाके की गूंज सुनते ही आसपास के तमाम लोग अपने घरों से बाहर निकल आए और घटनास्थल की तरफ भागे। मौके पर पहुंचने पर लोगों ने जो मंजर देखा, उसने हर किसी को हैरान कर दिया। जिस कमरे में सिलेंडर फटा था, उसकी दीवारें, खिड़कियां और छत पर लगा टीन शेड बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो चुका था।
मकान के भीतर बिखरा तबाही का सामान
सिलेंडर फटने के बाद जो तबाही मकान के भीतर मची, उसने पीड़ित परिवार की कमर तोड़ दी। धमाके के प्रेशर से घर के अंदर रखा सामान चारों तरफ छितरा गया। परिवार के अनुसार, इस दुर्घटना में उनकी बरसों की कमाई और जरूरत का सामान मिट्टी में मिल गया।
- घर का मुख्य दरवाजा और मजबूत टीन शेड पूरी तरह से उखड़ कर क्षतिग्रस्त हो गए।
- गर्मियों और रोजमर्रा के इस्तेमाल में आने वाला कीमती कूलर, फ्रिज और पंखा मलबे में तब्दील हो गया।
- रसोई के तमाम बर्तन और अन्य घरेलू सामान का नामोनिशान तक मिट गया।
- मकान की दीवारों को भी स्ट्रक्चरल नुकसान पहुंचा है, जिससे उसकी मजबूती पर सवाल खड़े हो गए हैं।
प्रत्यक्षदर्शियों की जुबानी: कैसे बची मासूमों की जान
घटना की चश्मदीद और परिवार की एक महिला ने बताया कि आग लगते ही पूरा घर दहशत के साये में आ गया था। उस वक्त घर के छोटे बच्चे बिल्कुल पास ही खेल रहे थे या अपनी मां के आसपास मौजूद थे। अगर महिला ने उस वक्त थोड़ी सी भी सुस्ती दिखाई होती या सामान समेटने में वक्त गंवाया होता, तो परिणाम बेहद भयावह हो सकते थे। बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाल लेने की वजह से एक बहुत बड़ा अनर्थ टल गया।
स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया और पुलिस-प्रशासन की भूमिका
इलाके की एक स्थानीय निवासी रुखसाना ने मीडिया को बताया कि धमाका इतना जबरदस्त था कि पूरा मोहल्ला दहल उठा था। जब लोग मौके पर पहुंचे, तो घर के अंदर का हाल देखकर सब दंग रह गए। हालांकि, इस पूरे वाकये के बीच एक हैरान करने वाली बात यह भी सामने आई कि स्थानीय लोगों द्वारा परिवार को तुरंत पुलिस और फायर ब्रिगेड को सूचना देने की सलाह दी गई थी, लेकिन शुरुआती स्तर पर प्रशासनिक अमले को इसकी औपचारिक सूचना नहीं दी जा चुकी थी, क्योंकि परिवार खुद सदमे और नुकसान के गम में डूबा हुआ था।
सुरक्षा को लेकर एक गंभीर सबक
यह घटना केवल वाराणसी के सरायनंदन बजरडीहा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश के हर उस रसोईघर के लिए एक बड़ी चेतावनी है जहां थोड़ी सी भी असाधानी बड़े हादसों को बुलावा दे सकती है। गर्मी के मौसम में या सामान्य दिनों में भी गैस पाइपलाइन, रेगुलेटर और सिलेंडर की समय-समय पर जांच न करना जानलेवा साबित हो सकता है।
विशेषज्ञों का हमेशा से यह सुझाव रहा है कि रसोई में काम करते वक्त महिलाओं को सतर्क रहना चाहिए और गैस लीक होने की हल्की सी भी गंध या सुगबुगाहट महसूस होते ही तुरंत रेगुलेटर बंद कर देना चाहिए। सौभाग्य से इस घटना में किसी की जान नहीं गई, लेकिन यह हादसा भविष्य के लिए एक बड़ा सबक छोड़ गया है कि थोड़ी सी चौकसी अनमोल जिंदगियों को मौत के मुंह में जाने से बचा सकती है।