वाराणसी जिले के प्रशासनिक गलियारों में इन दिनों पंचायत स्तर पर हो रहे कार्यों की मॉनिटरिंग को लेकर सख्ती काफी बढ़ गई है। खासकर ग्रामीण विकास योजनाओं को धरातल पर उतारने में सुस्ती दिखाने वाले कर्मचारियों पर शिकंजा कसा जाना शुरू हो गया है। इसी कड़ी में ताजा मामला चिरईगांव ब्लॉक से सामने आया है, जहां ग्राम पंचायतों में तैनात कई पंचायत सहायकों को उनके नियमित कार्यों और उत्तरदायित्वों के प्रति लापरवाही बरतने का दोषी पाया गया है।
अधिकारियों की सख्ती और कारण बताओ नोटिस
शुक्रवार को जिले के संबंधित ग्राम पंचायत सचिवों की तरफ से एक कड़ा कदम उठाते हुए लापरवाह पंचायत सहायकों को औपचारिक रूप से कारण बताओ नोटिस थमा दिए गए। प्रशासनिक अधिकारियों का साफ कहना है कि ग्रामीण इलाकों में शासन की योजनाओं का लाभ सीधे आम जनता तक पहुंचाने की जिम्मेदारी इन कर्मचारियों के कंधों पर है। ऐसे में यदि कार्यों के निष्पादन में किसी भी प्रकार की कोताही बरती जाती है, तो इसे बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
जारी किए गए नोटिस में स्पष्ट रूप से निर्देश दिए गए हैं कि सभी संबंधित पंचायत सहायक आगामी तीन दिनों के भीतर अपना लिखित स्पष्टीकरण प्रस्तुत करें। यदि इस अवधि के दौरान संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है, तो उच्च अधिकारियों के निर्देशानुसार आगे की अनुशासनात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
किन कार्यों में पाई गई है लापरवाही?
सूत्रों और प्रशासनिक रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले कुछ हफ्तों से लगातार यह शिकायतें मिल रही थीं कि कई पंचायत सहायक अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन पूरी ईमानदारी से नहीं कर रहे हैं। जिन प्रमुख कार्यों में भारी लापरवाही सामने आई है, उनमें निम्नलिखित बिंदु शामिल हैं:
- ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज कराने के बाद भी मैदानी स्तर पर अनुपस्थिति या कार्यों से दूरी।
- फसल सर्वेक्षण जैसे महत्वपूर्ण और समयबद्ध सरकारी अभियानों में रुचि न लेना।
- कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) का सुचारू रूप से संचालन न करना, जिससे ग्रामीणों को डिजिटल सेवाओं के लिए भटकना पड़ रहा है।
- स्वयं सहायता समूहों (SHG) से जुड़े प्रशासनिक और वित्तीय कार्यों के निष्पादन में देरी।
- ग्राम पंचायत स्तर पर आवंटित अन्य सरकारी दायित्वों और पोर्टल आधारित प्रविष्टियों में उदासीनता।
ग्रामीण सेवाओं पर पड़ रहा है सीधा असर
ग्राम पंचायतों को डिजिटल और आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से सरकार ने पंचायत सहायकों की नियुक्ति की थी। इन कर्मियों का मुख्य कार्य आम जनता को घर के नजदीक ही सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाना और डिजिटल पोर्टल के माध्यम से ग्राम सचिवालय को सक्रिय रखना है। लेकिन जब ये कर्मचारी अपने मूल कर्तव्यों से विमुख होने लगते हैं, तो इसका सीधा असर ग्रामीण विकास पर पड़ता है।
वाराणसी के चिरईगांव क्षेत्र में जब इन कमियों की पुनरावृत्ति देखी गई, तो स्थानीय स्तर पर सुगबुगाहट तेज हो गई। ग्रामीणों का भी यह मानना है कि यदि समय पर पोर्टल और सीएससी सेंटर नहीं खुलेंगे, तो उन्हें छोटे-छोटे कामों के लिए ब्लॉक या जिला मुख्यालय के चक्कर काटने पड़ेंगे।
अधिकारियों का पक्ष
मामले की गंभीरता को देखते हुए सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) अशोक चौबे ने स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि पंचायत सहायकों द्वारा कार्यों का समय से निष्पादन न किए जाने की शिकायतें लगातार मिल रही थीं। इन शिकायतों का संज्ञान लेते हुए सभी संबंधित ग्राम पंचायत सचिवों को यह निर्देश दिए गए थे कि वे अपने क्षेत्र के पंचायत सहायकों को तुरंत कारण बताओ नोटिस जारी करें और उनसे स्पष्टीकरण मांगें।
अशोक चौबे ने कहा, "निर्देशों का पालन करते हुए पंचायत सचिवों ने नोटिस जारी कर दिए हैं और तीन दिन का समय दिया गया है। निर्धारित समयावधि में मिलने वाले जवाब की गहन समीक्षा की जाएगी। यदि स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं पाया गया, तो नियमों के तहत आगे की कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी ताकि भविष्य में ऐसी लापरवाही की पुनरावृत्ति न हो।"
आगे की क्या होगी प्रक्रिया?
अगले तीन दिनों का समय पंचायत सहायकों के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। इस अवधि में उन्हें अपने ऊपर लगे आरोपों के पक्ष में ठोस तर्क और दस्तावेज पेश करने होंगे। प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि इस कार्रवाई से पूरे जिले के अन्य ब्लॉकों में तैनात पंचायत सहायकों और अन्य संविदा कर्मियों के बीच भी एक कड़ा संदेश गया है।
शासन की मंशा साफ है कि ग्रामीण भारत में पारदर्शिता और जवाबदेही तय की जाए। ऐसे में वाराणसी प्रशासन का यह कदम पंचायत स्तर पर प्रशासनिक कसावट लाने की दिशा में एक बड़ा और सख्त संदेश देने वाला साबित हो सकता है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि अगले तीन दिनों में किन-किन कर्मचारियों की तरफ से क्या जवाब दाखिल किया जाता है और प्रशासन इस पर क्या अंतिम निर्णय लेता है।