मूसलाधार बारिश के बावजूद कम नहीं हुआ काशीवासियों का उत्साह, शूर्पणखा की नाक काटने की लीला के साथ सजी आकर्षक झांकियां
उत्तर प्रदेश के वाराणसी शहर में आयोजित होने वाले प्रसिद्ध चेतगंज नक्कटैया मेले में इस बार मौसम की बाधा भी श्रद्धालुओं की आस्था को नहीं डिगा सकी। गुरुवार की रात को हुई मूसलाधार बारिश के बीच हजारों की संख्या में काशीवासी इस ऐतिहासिक सांस्कृतिक आयोजन के साक्षी बने। सड़कों पर जलभराव और ऊपर से बरसते पानी के बीच लोग छाते और रेनकोट पहनकर अपने परिवारों के साथ मेले का आनंद लेते नजर आए। प्रतिकूल मौसम के बावजूद लोगों के कदम नहीं रुके और मेले के दौरान लगातार भगवान श्रीराम के जयकारों की गूंज सुनाई देती रही।
शूर्पणखा की नाक काटने की लीला का मंचन
मेले के मुख्य आकर्षण के तहत रात करीब 10:30 बजे पारंपरिक मंचन का दौर शुरू हुआ। लक्ष्मण द्वारा शूर्पणखा की नाक काटने की पौराणिक लीला का जैसे ही सजीव मंचन किया गया, पूरा चेतगंज क्षेत्र 'जय श्रीराम' के उद्घोष से गूंज उठा। इस दृश्य को देखने के लिए बड़ी संख्या में दर्शक मौजूद थे जिन्होंने तालियां बजाकर इस सांस्कृतिक प्रस्तुति का स्वागत किया। रामायण के इस प्रसंग के मंचन को देखने की परंपरा यहां दशकों पुरानी है, जिसे देखने के लिए दूर-दूर से लोग पहुंचते हैं।
बरसात के बीच निकले लाग विमान और झांकियां
लीला के मंचन के पश्चात बारिश के बीच ही पारंपरिक लाग विमान और आकर्षक झांकियों को निकाला गया। रंग-बिरंगी रोशनी और सजावट से लैस इन विमानों और झांकियों को देखने के लिए सड़क के दोनों किनारों पर भारी भीड़ जुटी रही। खराब मौसम और लगातार बरसते पानी के बावजूद दर्शकों का उत्साह देखते ही बनता था। स्थानीय लोगों का कहना है कि समय और पीढ़ियों के बदलने के साथ आयोजन के स्वरूप में भले ही बदलाव आया हो, लेकिन नक्कटैया मेले को लेकर काशी के नागरिकों का उल्लास और परंपरा के प्रति जुड़ाव आज भी पूरी तरह बरकरार है।