दिसंबर तक लागू होगी नई व्यवस्था, पशु बंधी अभियान और टीकाकरण के दौरान लगेंगे विशेष इंजेक्शन
उत्तर प्रदेश के प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र वाराणसी में छुट्टा पशुओं की समस्या से स्थायी रूप से निपटने के लिए नगर निगम प्रशासन ने एक नई और उन्नत तकनीकी व्यवस्था तैयार की है। शहर की सड़कों पर घूम रहे छुट्टा पशुओं की सटीक पहचान और उनकी निरंतर निगरानी अब इंजेक्टेबल जीपीएस तकनीक के माध्यम से की जाएगी। इस आधुनिक पहल के तहत आगामी दिसंबर महीने तक इस व्यवस्था को धरातल पर उतारने की पूरी तैयारी कर ली गई है।
तकनीक का स्वरूप और कार्यप्रणाली
प्रशासनिक योजनाओं के अनुसार, इस नई तकनीक के कार्यान्वयन के लिए विशेष पशु बंधी अभियान और नियमित टीकाकरण कार्यक्रमों का उपयोग किया जाएगा। इन अभियानों के दौरान वाराणसी क्षेत्र में पाए जाने वाले मवेशियों, विशेषकर गाय, भैंस और आवारा कुत्तों के शरीर में एक विशेष प्रकार का जीपीएस इंजेक्शन लगाया जाएगा। यह इंजेक्टेबल जीपीएस तकनीक पशुओं के चमड़े के नीचे सुरक्षित रूप से स्थापित की जाएगी, जिससे उनकी हर गतिविधि और ठिकाने की सटीक जानकारी नगर निगम के केंद्रीय निगरानी तंत्र को मिलती रहेगी।
समस्या के समाधान की दिशा में कदम
वाराणसी में लंबे समय से छुट्टा पशुओं की आवाजाही के कारण यातायात बाधित होने और सड़क सुरक्षा से जुड़ी समस्याएं सामने आती रही हैं। इस नई तकनीक के माध्यम से न केवल पशुओं की सही संख्या का आकलन हो सकेगा, बल्कि उनके मालिकों की जिम्मेदारी तय करने और आवारा पशुओं के पुनर्वास में भी प्रशासन को मदद मिलने की उम्मीद है। नगर निगम के इस कदम से शहर के विभिन्न हिस्सों में छुट्टा पशुओं के कारण होने वाली दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने में भी सहायता मिलेगी। दिसंबर माह की तय समय सीमा से पहले इस योजना से जुड़े सभी प्रशासनिक और तकनीकी चरणों को पूरा करने पर काम किया जा रहा है।