उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था को लेकर लगातार कड़े कदम उठाए जा रहे हैं और इसका असर मैदानी स्तर पर भी दिखने लगा है। जनशिकायतों के त्वरित निस्तारण और अपराध नियंत्रण के मामले में वाराणसी जोन की पुलिस ने एक बड़ी उपलब्धि अपने नाम की है। राज्य स्तर पर लागू आईजीआरएस (Integrated Grievance Redressal System) प्रणाली के अंतर्गत वाराणसी जोन ने पूरे उत्तर प्रदेश में पहला स्थान हासिल किया है। इस सफलता ने साबित कर दिया है कि यदि जमीनी स्तर पर प्रशासनिक इच्छाशक्ति मजबूत हो, तो आम जनता की समस्याओं का समाधान कितनी तेजी से किया जा सकता है।
अपर पुलिस महानिदेशक ने की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक
हाल ही में अपर पुलिस महानिदेशक (एडीजी) नवीन अरोरा ने वाराणसी जोन के अंतर्गत आने वाले मिर्जापुर और आजमगढ़ रेंज के तमाम वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक अहम समीक्षा बैठक की। इस दौरान जोन के सभी जिलों में जनशिकायतों की स्थिति, आईजीआरएस पोर्टल पर प्राप्त होने वाली शिकायतों के निस्तारण की गुणवत्ता, लंबित मामलों के निस्तारण और कुल मिलाकर अपराध नियंत्रण की अद्यतन स्थिति पर विस्तार से मंथन किया गया। बैठक में डीआईजी रेंज वैभव कृष्ण समेत कई अन्य प्रमुख पुलिस अधिकारी भी मौजूद रहे।
बैठक की शुरुआत में ही एडीजी नवीन अरोरा ने स्पष्ट शब्दों में निर्देश दिए कि जनता की हर छोटी-बड़ी समस्या को पूरी गंभीरता से सुना जाए। उन्होंने जोर देकर कहा कि जनशिकायतों का केवल निस्तारण होना ही काफी नहीं है, बल्कि वह गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध होना चाहिए ताकि पीड़ित को वास्तविक न्याय मिल सके और उसे बार-बार दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें।
अपराध पर नकेल कसने के लिए चार-स्तरीय विशेष कार्ययोजना
जोनल स्तर पर अपराध को जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए पुलिस प्रशासन ने एक मजबूत चार-स्तरीय अभियान की रूपरेखा तैयार की है। इसके तहत प्रदेश स्तर पर निर्धारित मानकों के अनुरूप 60 और 90 दिनों के विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं। एडीजी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे अपने-अपने जिलों में सक्रिय अपराधियों की कुंडली खंगालें और उनके पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए एक ठोस कार्ययोजना बनाएं।
- अवैध शराब और मादक पदार्थों पर वार: अवैध शराब के कारोबार और नशीले पदार्थों की तस्करी करने वालों के खिलाफ ताबड़तोड़ छापेमारी करने के निर्देश दिए गए हैं।
- पशु तस्करी पर कड़ा पहरा: सीमावर्ती जिलों में पशु तस्करी के अवैध नेटवर्क को नेस्तनाबूद करने के लिए स्थानीय पुलिस को विशेष सतर्कता बरतने को कहा गया है।
- साइबर अपराधों पर लगाम: बढ़ते डिजिटल अपराधों से निपटने के लिए तकनीकी सेल को और अधिक सक्रिय करने पर जोर दिया गया है।
इनामी और वांछित अपराधियों की धरपकड़ के लिए विशेष अभियान
समीक्षा बैठक के दौरान खासतौर पर गाजीपुर, जौनपुर, आजमगढ़ और सोनभद्र जिलों में एनडीपीएस (NDPS) अधिनियम के तहत वांछित और लंबे समय से फरार चल रहे अपराधियों की गिरफ्तारी पर जोर दिया गया। एडीजी नवीन अरोरा ने निर्देश दिया कि एक जनवरी 2026 से जनपद स्तर पर पांच हजार रुपये या उससे अधिक के इनामी अपराधियों के खिलाफ एक विशेष अभियान चलाया जाए।
इस अभियान के तहत सभी संबंधित अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि वे महीने में कम से कम एक बार इस विशेष धरपकड़ अभियान में व्यक्तिगत रूप से शामिल हों। पुलिस की यह आक्रामक रणनीति उन अपराधियों के मन में खौफ पैदा करने के लिए है जो कानून की नजरों से बचकर छिपते फिर रहे हैं।
ई-साक्ष्य प्रणाली और तकनीकी इस्तेमाल पर जोर
आधुनिक दौर में पुलिसिंग को और अधिक पारदर्शी और वैज्ञानिक बनाने के लिए 'ई-साक्ष्य' प्रणाली के प्रभावी उपयोग की भी गहन समीक्षा की गई। बैठक में अधिकारियों और विवेचकों को निर्देश दिए गए कि वे मुकदमों की विवेचना के दौरान डिजिटल और तकनीकी साक्ष्यों (Digital Evidences) का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करें। इससे न केवल मुकदमों की जांच में तेजी आएगी, बल्कि अदालत में अभियोजन पक्ष का मामला भी बेहद मजबूत होगा, जिससे अपराधियों को सजा दिलाने की दर में इजाफा होगा।
अपराध नियंत्रण समितियों की सक्रियता बढ़ाई गई
वाराणसी जोन में अपराध पर अंकुश लगाने के लिए पूर्व में गठित की गई विभिन्न समितियों को अब नए सिरे से सक्रिय कर दिया गया है। एडीजी ने निर्देश दिए हैं कि ये समितियां केवल कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि मैदान में उतरकर नियमित रूप से अपनी कार्रवाई की समीक्षा करें। जोन स्तर पर आईजीआरएस प्रणाली के सफल क्रियान्वयन ने यह दिखा दिया है कि यदि सही मॉनिटरिंग हो, तो पुलिस विभाग जनता के बीच अपनी छवि को और अधिक जन-कल्याणकारी बना सकता है। वाराणसी जोन की इस उपलब्धि से अन्य जोनों के लिए भी एक मिसाल पेश हुई है।