प्रतिबंध के बावजूद खुलेआम बिक रहा जानलेवा मांझा, प्रशासन की कार्रवाई पर उठे सवाल
वाराणसी में प्रशासनिक प्रतिबंधों और सुरक्षा दावों के बीच चाइनीज मांझे का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। शहर में आए दिन होने वाली ऐसी घटनाएं आम नागरिकों और वाहन चालकों के लिए बड़ा खतरा बन चुकी हैं। ताजा मामला नदेसर से वरुणा पुल की ओर जाने वाले व्यस्त मार्ग का है, जहां बाइक पर सवार होकर लौट रहे दीवानी न्यायालय के एक अधिवक्ता इस खतरनाक मांझे की चपेट में आ गए। इस दुर्घटना में उनके गले पर गंभीर घाव हुआ है, लेकिन गनीमत यह रही कि समय रहते वाहन की गति नियंत्रित होने और अन्य कारणों से उनकी जान बाल-बाल बच गई।
कैसे हुआ यह हादसा
पीड़ित दीवानी अधिवक्ता आकाश सिंह ने अपनी आपबीती साझा करते हुए बताया कि वह किसी आवश्यक कार्य से नदेसर स्थित मुख्य डाकघर गए थे। वहां उन्होंने रजिस्ट्री और पोस्टल ऑर्डर से जुड़े जरूरी काम निपटाए और अपनी बाइक से वापस लौट रहे थे। जब उनकी बाइक नदेसर से वरुणा पुल की तरफ जाने वाले रास्ते पर एक मोड़ के पास पहुँची, तो अचानक हवा में लहराता हुआ चाइनीज मांझा उनके गले में आकर फंस गया। मांझे के धारदार होने के कारण उनके गले पर गहरा घाव हो गया और तुरंत खून बहने लगा।
कम दबाव के कारण टला बड़ा हादसा
अधिवक्ता आकाश सिंह के अनुसार, जिस वक्त यह हादसा हुआ, वह मांझा किसी उड़ती हुई पतंग का नहीं बल्कि पहले से ही कटकर हवा में झूल रहा था। पतंग कटा होने के कारण उस मांझे पर तनाव या दबाव काफी कम था, जिसके चलते घाव गहरा होने के बावजूद वह उसकी धार के भीषण प्रकोप से सुरक्षित बच गए। यदि मांझा किसी उड़ती हुई पतंग के साथ खिंचाव में होता, तो परिणाम बेहद भयानक हो सकते थे। इस घटना के बाद स्थानीय स्तर पर लोगों में एक बार फिर भारी रोष देखने को मिल रहा है।
प्रशासनिक प्रतिबंधों और सुरक्षा पर सवाल
प्रशासन और पुलिस विभाग द्वारा लगातार यह दावा किया जाता है कि शहर में नायलॉन, सिंथेटिक और चाइनीज मांझे की खरीद-फविक्रय तथा इस्तेमाल पर पूर्ण प्रतिबंध है। इसके बावजूद त्योहारों और सामान्य दिनों में भी गुप्त रूप से इसकी बिक्री धड़ल्ले से जारी रहती है। इस दुर्घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि कागजी प्रतिबंधों और जमीनी अमलों के बीच बड़ा फासला है। पूर्व में भी ऐसे कई मामलों में लोगों की जान जा चुकी है या वे गंभीर रूप से घायल हो चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद दोषियों और अवैध विक्रेताओं के खिलाफ सख्त और निरंतर अभियान चलाने की आवश्यकता बनी हुई है।