महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले से सहकारिता और राजनीतिक गलियारों से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। वरोरा कृषि उपज बाजार समिति (APMC) के सभापति डॉ. विजय देवतले के खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव आखिरकार पारित हो गया है। इस घटनाक्रम के बाद स्थानीय राजनीति में पारा अचानक से चढ़ गया है और हर तरफ इसी बात की चर्चा है कि अब अगला सभापति कौन होगा।
12-5 के बड़े अंतर से गिरा बोर्ड
गुरुवार को वरोरा कृषि उपज बाजार समिति के कार्यालय में एक विशेष बैठक का आयोजन किया गया था। जिला सहकारी संस्था के उपनिबंधक की मौजूदगी में यह बैठक बेहद गोपनीय और तनावपूर्ण माहौल में शुरू हुई। जब अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान की प्रक्रिया पूरी हुई, तो परिणाम ने सबको चौंका दिया लेकिन विरोधी गुट के चेहरे खिल उठे।
प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, डॉ. विजय देवतले के खिलाफ आए इस अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में कुल 12 वोट पड़े, जबकि उनके समर्थन में मात्र 5 वोट ही आ सके। 12-5 के इस भारी अंतर से साफ हो गया कि बाजार समिति के संचालकों का एक बड़ा धड़ा अब मौजूदा नेतृत्व से पूरी तरह असंतुष्ट था। स्पष्ट बहुमत मिलने के साथ ही डॉ. विजय देवतले का सभापति की कुर्सी से हटना अब आधिकारिक तौर पर तय माना जा रहा है।
सांसद प्रतिभा धानोरकर गुट की रणनीतिक जीत
सहकारिता के जानकारों की मानें तो इस पूरे खेल के पीछे स्थानीय राजनीतिक समीकरणों ने अहम भूमिका निभाई है। अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में पड़े 12 वोटों को सीधे तौर पर सांसद प्रतिभा धानोरकर गुट की एक बड़ी राजनीतिक और रणनीतिक सफलता के रूप में देखा जा रहा है।
धानोरकर गुट के समर्थक संचालकों ने जिस एकजुटता का परिचय दिया, उसने सत्ता पक्ष को चित कर दिया। इस परिणाम ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि चंद्रपुर जिले के सहकारिता क्षेत्र में सांसद प्रतिभा धानोरकर का प्रभाव कितना मजबूत है। चुनाव के गणित को जिस तरह से साधा गया, उसने विरोधियों को संभलने का मौका तक नहीं दिया।
क्या बोलीं सांसद प्रतिभा धानोरकर?
इस बड़े राजनीतिक घटनाक्रम के बाद सांसद प्रतिभा धानोरकर ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कृषि उपज बाजार समिति केवल सत्ता का केंद्र नहीं है, बल्कि यह किसानों, आड़तियों और व्यापारियों के अटूट विश्वास का सबसे बड़ा प्रतीक है।
उन्होंने आगे जोर देते हुए कहा, 'हमारा मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बाजार समिति में पारदर्शिता बनी रहे और किसानों के हितों को हमेशा सर्वोच्च प्राथमिकता मिले। आने वाले समय में सभी संचालकों को साथ लेकर चलेंगे। किसानों को उनकी उपज का उचित भाव मिले, इसके लिए आधुनिक सुविधाएं और पूरी तरह से पारदर्शी व्यवहार सुनिश्चित किया जाएगा।'
आगे क्या? नए सभापति की रेस हुई तेज
अविश्वास प्रस्ताव के सफल होने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि वरोरा एपीएमसी का नया ताज किसके सिर पर सजेगा। नए सभापति के चुनाव की प्रक्रिया को लेकर प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर तैयारियां शुरू हो चुकी हैं।
चुनावी परिणाम आते ही राजनीतिक दलों और संचालकों के बीच बैठकों का दौर शुरू हो गया है। पर्दे के पीछे जोड़-तोड़ और नाम फाइनल करने की कवायद तेज हो गई है। किस चेहरे पर सबकी सहमति बनती है और कौन अगला सभापति बनकर कमान संभालता है, यह आने वाले कुछ दिनों में स्पष्ट हो जाएगा। फिलहाल, इस बड़े उलटफेर के बाद वरोरा के राजनीतिक गलियारों में हलचल अपने चरम पर है और हर किसी की निगाहें आगामी चुनावों पर टिकी हुई हैं।