अंतरराष्ट्रीय मंचों पर जब भी भारत की मेहमाननवाजी की बात आती है, तो देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत स्वतः ही केंद्र में आ जाती है। साल 2026 के इस दौर में एक बार फिर भारत वैश्विक कूटनीति के केंद्र में है। दुनिया के सबसे प्रभावशाली देशों के प्रतिनिधि जब ब्रिक्स शिखर सम्मेलन (BRICS Summit 2026) के लिए इकट्ठा हो रहे हैं, तो केवल कूटनीतिक समझौतों पर ही नजरें नहीं हैं, बल्कि भारत की पारंपरिक आतिथ्य शैली भी पूरी दुनिया को अचंभित कर रही है। इस बार इस मेहमाननवाजी में गुलाबी शहर जयपुर की शाही छाप साफ तौर पर दिखाई दे रही है, जहां के हुनरमंद कारीगरों ने अपनी कला का ऐसा जादू बिखेरा है जो आने वाले दिनों में वैश्विक चर्चा का विषय बनने वाला है।
शाही मेहमाननवाजी के लिए जयपुर में तैयार हुआ खास टेबलवेयर
ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान विदेशी मेहमानों के भोजन और स्वागत की व्यवस्था को अत्यधिक भव्य बनाने के लिए विशेष प्रकार के सिल्वर-प्लेटेड टेबलवेयर और कटलरी का निर्माण किया गया है। इस पूरी परियोजना की सबसे खास बात यह है कि इसे किसी आधुनिक मशीन आधारित कारखाने में नहीं, बल्कि जयपुर के पारंपरिक हस्तशिल्प प्रेमियों और लगभग 300 कुशल कारीगरों की समर्पित टीम ने मिलकर तैयार किया है। पारंपरिक नक्काशी और अत्याधुनिक तकनीकों का यह मेल न केवल देखने में अद्भुत है, बल्कि यह भारत की प्राचीन शिल्पकला की ताकत को भी वैश्विक स्तर पर मजबूती से पेश करता है।
इस अनूठे प्रोजेक्ट के पीछे जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार, इस पूरी प्रक्रिया को अंजाम देना किसी चुनौती से कम नहीं था। अरुण्स ग्रुप के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) अरुण पाबुवाल और निदेशक अंतरा पाबुवाल के निर्देशन में इस पूरी कलाकृति को आकार दिया गया है। उनका मानना है कि जब वैश्विक स्तर के राष्ट्राध्यक्ष किसी मेज पर एक साथ बैठते हैं, तो वहां उपयोग होने वाली हर एक वस्तु देश की संस्कृति और क्षमता का प्रतिनिधित्व करती है।
हर व्यंजन के हिसाब से गढ़ी गई अनूठी डिजाइन
इस शानदार कटलरी सेट की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसे 'वन साइज फिट्स ऑल' के कॉन्सेप्ट पर नहीं बनाया गया है। बल्कि, परोसे जाने वाले हर एक व्यंजन की प्रकृति को ध्यान में रखकर अलग-अलग डिजाइन तैयार किए गए हैं। मेहमानों के स्वागत में परोसे जाने वाले पारंपरिक पेय पदार्थों से लेकर मुख्य भोजन और अंत में परोसी जाने वाली मीठी डिश (स्वीट डिश) तक, हर चरण के लिए अलग और मनमोहक बर्तन डिजाइन किए गए हैं।
उदाहरण के लिए, यदि मेज पर रूसी व्यंजन परोसे जाने हैं, तो उसकी शैली और संस्कृति को ध्यान में रखकर बर्तनों के आकार और नक्काशी को गढ़ा गया है। वहीं दूसरी ओर, भारतीय व्यंजनों के लिए भारतीय कला, संस्कृति और सौंदर्यशास्त्र के मूल तत्वों को प्राथमिकता दी गई है। यह कस्टमाइजेशन इस बात का प्रमाण है कि जयपुर के कारीगरों ने वैश्विक प्राथमिकताओं को कितनी बारीकी से समझा है।
60 से अधिक प्रकार के विशेष आइटम किए गए हैं शामिल
इस विशाल परियोजना को धरातल पर उतारने में लगभग चार से पांच महीने का कड़ा संघर्ष और समर्पण लगा है। शुरुआती दौर में केवल चुनिंदा उत्पादों की रूपरेखा तैयार की गई थी, लेकिन जैसे-जैसे समय बीता और आयोजन की भव्यता का दायरा बढ़ा, वैसे-वैसे नए आइटम भी इस प्रोजेक्ट का हिस्सा बनते चले गए। कुल मिलाकर लगभग 60 से 70 अलग-अलग तरह के विशेष आइटम इस भव्य कलेक्शन में शामिल किए गए हैं।
इस पूरी श्रृंखला में कई ऐसे उत्पाद भी शामिल हैं जिन्हें कारीगरों ने इससे पहले कभी नहीं बनाया था। इनमें एक विशेष 'शॉल ट्रे' भी शामिल है, जिसका उपयोग अतिथियों को स्वागत स्वरूप शॉल या हल्के कंबलों को पारंपरिक तरीके से प्रस्तुत करने के लिए किया जाएगा। इसके अलावा, एक बेहद बड़े आकार का 'फिंगर बाउल' भी इस सेट का मुख्य आकर्षण है। सामान्य आकार के फिंगर बाउल से हटकर इसे इस तरह डिजाइन किया गया है ताकि विदेशी मेहमान इसका उपयोग बेहद आसानी और शाही अंदाज में कर सकें।
परंपरा और तकनीक का अनूठा संगम
किसी भी अंतरराष्ट्रीय आयोजन के लिए काम करते समय सबसे बड़ी चुनौती उत्पाद की गुणवत्ता के साथ-साथ रचनात्मकता को बनाए रखना होती है। अंतरा पाबुवाल के अनुसार, इस पूरे प्रोजेक्ट की शुरुआत आयोजन की मूल आवश्यकताओं और उसकी थीम को गहराई से समझने के साथ हुई थी। पहले चरण में विभिन्न डिजाइन कॉन्सेप्ट्स के प्रोटोटाइप तैयार किए गए और जब उन्हें हरी झंडी मिली, तब जाकर फाइनल प्रोडक्शन का काम शुरू हुआ।
डिजाइन और विकास के शुरुआती तीन महीनों में टीम ने दिन-रात एक करके नए पैटर्न विकसित किए। अरुण पाबुवाल का कहना है कि उनकी सबसे बड़ी चुनौती किसी दूसरे के काम को कॉपी करना नहीं, बल्कि अपने ही पिछले रिकॉर्ड को तोड़कर हर बार एक नया और बेहतर मानक स्थापित करना था। पारंपरिक दस्तकारी को आधुनिक युग की मशीनी फिनिशिंग और तकनीक के साथ जोड़कर उन्होंने जो उत्पाद तैयार किए हैं, वे भारत की बढ़ती आत्मनिर्भरता और कलात्मक उत्कृष्टता की एक और बड़ी मिसाल बन चुके हैं।
वैश्विक मंच पर गूंजेगा भारतीय हस्तशिल्प का डंका
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 के माध्यम से एक बार फिर यह साबित हो गया है कि भारतीय कारीगरों के हाथों का जादू आज भी पूरी दुनिया में बेजोड़ है। जब विदेशी मेहमान जयपुर की इस नायाब नक्काशी वाली कटलरी में भोजन करेंगे, तो वे केवल भोजन का स्वाद नहीं लेंगे, बल्कि सदियों पुरानी भारतीय संस्कृति और मेहमाननवाजी के उस इतिहास को महसूस करेंगे जो पीढ़ियों से चला आ रहा है। यह आयोजन भारत के हस्तशिल्प उद्योग को एक नया वैश्विक मंच प्रदान करने के साथ-साथ देश के स्थानीय कारीगरों की प्रतिभा का लोहा पूरी दुनिया मनवाने में सफल रहा है।