भारतीय वित्तीय जगत के सबसे चर्चित और विवादित चेहरों में शुमार भगोड़े कारोबारी विजय माल्या ने एक बार फिर से केंद्रीय जांच एजेंसियों के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सिलसिलेवार पोस्ट के जरिए माल्या ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) पर सीधा निशाना साधा है। माल्या का दावा है कि जांच एजेंसियां उनके खिलाफ बेबुनियाद और झूठे मामले तैयार कर रही हैं। बिना किसी ठोस अदालती फैसले या निष्पक्ष ट्रायल के जनता की अदालत में उनका चरित्र हनन किया जा रहा है, जो कि न्याय प्रणाली के बुनियादी सिद्धांतों के खिलाफ है।
अदालती ट्रायल से पहले मीडिया ट्रायल पर उठाए सवाल
माल्या ने अपने बयानों में वैश्विक न्याय प्रणालियों का हवाला देते हुए भारतीय जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि दुनिया के किसी भी लोकतांत्रिक देश में ऐसा देखने को नहीं मिलता, जहां एजेंसियां बिना किसी अंतिम अदालती निर्णय या पूर्ण ट्रायल के अपनी तथाकथित सफलताओं का सरेआम ढिंढोरा पीटती फिरें।
उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि भले ही वे देश से बाहर रह रहे हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि कानून के स्थापित नियमों को ताक पर रखकर किसी की भी छवि को सार्वजनिक रूप से धूमिल किया जाए। माल्या ने यह भी दावा किया कि वे आने वाले समय में इन सभी मामलों से जुड़े दस्तावेजों और दावों की सच्चाई एक-एक करके सार्वजनिक करेंगे, जिससे एजेंसियों के दावों की पोल खुलेगी।
आईडीबीआई बैंक के 900 करोड़ के कर्ज पर दी सफाई
किंगफिशर एयरलाइंस के दौर के विवादों पर बात करते हुए माल्या ने आईडीबीआई बैंक से लिए गए 900 करोड़ रुपये के बहुचर्चित कर्ज का विशेष रूप से जिक्र किया। उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि यह पूरा कर्ज ब्याज समेत बैंकों को चुकता किया जा चुका है। माल्या ने अपनी दलील के समर्थन में कहा कि किंगफिशर एयरलाइंस को दिया गया वह कर्ज प्रस्ताव किसी एक व्यक्ति का फैसला नहीं था, बल्कि बैंक के निदेशक मंडल (बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स) ने हर स्तर पर इसकी पूरी जांच-परख कर मंजूरी दी थी।
खास बात यह है कि उस बोर्ड में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) और वित्त मंत्रालय के प्रतिनिधि भी बतौर सदस्य शामिल थे। माल्या ने तीखा सवाल उठाया कि जब यह पूरा लोन नियमों के दायरे में रहकर और विधिवत मंजूरी के बाद दिया गया था, तो आज केवल बैंक के कुछ चुनिंदा अधिकारियों और उनकी कंपनी के लोगों को ही आपराधिक षड्यंत्र में क्यों घसीटा जा रहा है?
निजी विमान के इस्तेमाल को लेकर एजेंसियों पर दबाव का आरोप
जांच के तौर-तरीकों पर सवाल उठाते हुए माल्या ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) पर एक और बेहद गंभीर आरोप मढ़ा है। उनका कहना है कि एजेंसी इस बात पर अड़ी हुई थी और उन पर भारी दबाव बना रही थी कि वे अपने निजी विमान के इस्तेमाल को एक आपराधिक कृत्य के रूप में स्वीकार करें।
माल्या के मुताबिक, जांच अधिकारियों ने उन पर लगातार दबाव डाला कि वे उस खास व्यक्ति का नाम बताएं जिसने उस निजी विमान में उनके साथ सफर किया था। जब उन्होंने नाम बताने से दो टूक मना कर दिया, तो उनके खिलाफ शिकंजा कसा जाने लगा। माल्या का तर्क है कि आज के दौर में देश के तमाम बड़े उद्योगपतियों और कारोबारियों के पास अपने निजी विमान हैं। परिवार के सदस्यों या दोस्तों के साथ उन विमानों से यात्रा करना कोई जुर्म नहीं है। इसके अलावा, उनकी अन्य कंपनियों ने विमान के उस व्यावसायिक इस्तेमाल के एवज में बाकायदा तय किराया भी चुकाया था।
14,000 करोड़ रुपये से अधिक की वसूली का दावा
अपनी संपत्ति और रिकवरी के आंकड़ों पर बात करते हुए माल्या ने कहा कि जांच एजेंसियां खुद देश की अदालतों के सामने यह स्वीकार कर चुकी हैं कि उनसे अब तक 14,131 करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति कुर्क करके वसूली जा चुकी है। उनका दावा है कि यह रिकवर की गई कुल रकम उनके द्वारा लिए गए मूल बैंक कर्ज से कहीं ज्यादा है। ऐसे में उन्हें लगातार भगोड़ा बताकर प्रताड़ित करना और निशाना बनाना न्यायसंगत नहीं है।
कानूनी शिकंजा और अदालतों की सख्ती
भले ही विजय माल्या अपनी बेगुनाही के दावे कर रहे हों, लेकिन भारतीय न्यायपालिका का रुख उनके प्रति बेहद सख्त रहा है। इसी साल बॉम्बे हाई कोर्ट ने माल्या को कड़े शब्दों में फटकार लगाते हुए स्पष्ट किया था कि भारतीय अदालतों की न्यायिक प्रक्रिया से बचकर वह किसी भी प्रकार की राहत की उम्मीद नहीं कर सकते हैं। अदालत ने उन्हें भारत वापस लौटने और अपने भविष्य के कानूनी रुख को स्पष्ट करने का अंतिम अवसर भी दिया था। इसके साथ ही, माल्या ने भारत के भगोड़ा आर्थिक अपराधी कानून (Fugitive Economic Offenders Act) को भी चुनौती दे रखी है, जिस पर कानूनी लड़ाई लगातार जारी है।
फिलहाल, माल्या के इन ताजा बयानों ने एक बार फिर से राजनीतिक और आर्थिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। एक तरफ जहां जांच एजेंसियां भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं के मामलों में उन्हें कानून के कटघरे में खड़ा करने के लिए पूरी ताकत झोंक रही हैं, वहीं माल्या अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कानूनी दांवपेंच और बयानों के जरिए अपनी बेगुनाही साबित करने की कोशिश में जुटे हुए हैं।