सिनेमा जगत के सुनहरे दौर में कुछ प्रेम कहानियां ऐसी थीं जो परदे पर जितनी खूबसूरत दिखती थीं, असल जिंदगी में उतनी ही दर्दनाक साबित हुईं। देव आनंद और सुरैया का इश्क भी कुछ ऐसा ही था। एक तरफ देव साहब का बढ़ता हुआ करिश्मा और उनका सदाबहार अंदाज, तो दूसरी तरफ सुरैया की खूबसूरती और उनकी जादुई आवाज का जादू। दोनों के प्यार के चर्चे उन दिनों अखबारों की सुर्खियां हुआ करते थे, लेकिन इस रिश्ते का अंत ऐसा होगा, शायद ही किसी ने सोचा था।
फिल्म 'जीत' के सेट पर पलटी थी नाव
यह बात साल 1948 की है जब फिल्म 'जीत' की शूटिंग चल रही मुंबई के महालक्ष्मी इलाके के पास एक समंदर या झील नुमा हिस्से में शूट हो रहा था। इस फिल्म में देव आनंद और सुरैया दोनों मुख्य भूमिकाओं में थे। एक सीन के दौरान दोनों को एक छोटी नाव में बैठना था। सब कुछ तय योजना के मुताबिक चल रहा था, तभी अचानक नाव का संतुलन बिगड़ गया और वह पानी में पलट गई।
नाव पलटने के साथ ही सेट पर अफरा-तफरी मच गई। उस दौर के तमाम किस्से बताते हैं कि सुरैया को तैरना नहीं आता था। जैसे ही नाव पलटी, सुरैया पानी में डूबने लगीं। बिना एक पल गंवाए, देव आनंद ने अपनी जान की परवाह किए बिना तुरंत पानी में छलांग लगा दी। उन्होंने अपनी तैरने की क्षमता का इस्तेमाल करते हुए सुरैया को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। इस घटना ने दोनों के दिलों में एक-दूसरे के लिए जगह को और ज्यादा मजबूत कर दिया था।
जब पहली बार फफक कर रोए थे देव आनंद
इस हादसे के बाद दोनों का रिश्ता और गहरा हो गया, लेकिन इस प्रेम कहानी की राह में सबसे बड़ा रोड़ा सुरैया की नानी थीं। सुरैया की नानी इस रिश्ते के सख्त खिलाफ थीं, क्योंकि देव आनंद उस समय फिल्म इंडस्ट्री में अपनी पहचान बना ही रहे थे और वे दोनों अलग धर्म से ताल्लुक रखते थे। नानी के कड़े विरोध के आगे आखिरकार सुरैया को झुकना पड़ा और उन्होंने देव आनंद से अलग होने का फैसला कर लिया।
कहा जाता है कि जब यह रिश्ता टूटा और सुरैया ने शादी से इंकार कर दिया, तो देव आनंद बुरी तरह टूट गए थे। वह दौर ऐसा था जब देव साहब अपने आंसुओं को छुपा नहीं पाए और जिंदगी में पहली बार किसी बात पर खुलकर फफक-फफक कर रोए थे। उनके करीबी लोगों के अनुसार, इस धोखे और अधूरे प्यार ने देव आनंद को अंदर से हिला कर रख दिया था।
अधूरी मोहब्बत का अंत और तन्हाई
इस घटना के बाद दोनों ने कभी दोबारा एक साथ काम नहीं किया। सुरैया ने आजीवन शादी नहीं करने का फैसला किया और अपनी जिंदगी तन्हाई में बिता दी। वहीं, देव आनंद ने खुद को पूरी तरह से सिनेमा में झोंक दिया और बाद में कल्पना कार्तिक से शादी की। हालांकि, उन्होंने कई इंटरव्यू में इस बात का जिक्र किया था कि सुरैया उनकी जिंदगी का पहला और सबसे गहरा प्यार थीं।
क्यों आज भी याद की जाती है यह दास्तान?
- सच्चा जज्बा: देव आनंद द्वारा सुरैया की जान बचाने के लिए पानी में छलांग लगाना किसी फिल्मी दृश्य से कम नहीं था।
- पारिवारिक दबाव: उस समय के सामाजिक और पारिवारिक प्रतिबंध किस तरह दो प्रेमियों को अलग कर देते थे, यह इसका सबसे बड़ा उदाहरण है।
- आजीवन तन्हाई: सुरैया का ता उम्र कुंवारी रहना इस बात की गवाही देता है कि उनका प्यार कितना सच्चा था।
आज भले ही वे दोनों इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनकी यह अधूरी प्रेम कहानी बॉलीवुड के इतिहास में अमर हो चुकी है। जब भी सिनेमा के सुनहरे पन्नों को पलटा जाता है, देव आनंद और सुरैया का यह दर्दनाक किस्सा हर किसी की जुबान पर आ ही जाता है। यह कहानी हमें सिखाती है कि सच्चा प्यार कभी-कभी मुकाम तक नहीं पहुंच पाता, लेकिन उसकी यादें दिल में हमेशा जिंदा रहती हैं।