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डॉक्टरों पर हमला करने वालों की सही जगह जेल, सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख

डॉक्टरों पर हमला करने वालों की सही जगह जेल, सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख

चिकित्सकों की सुरक्षा को लेकर देश की सर्वोच्च अदालत ने एक बार फिर बेहद कड़ा संदेश दिया है। स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े कर्मियों पर आए दिन होने वाले हमलों और हिंसा की घटनाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए दो टूक शब्दों में कहा है कि ऐसे तत्वों की असली जगह सलाखों के पीछे यानी जेल में है। अदालत ने साफ किया कि समाज की सेवा में दिन-रात एक करने वाले डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ को निशाना बनाने वाले लोग खुलेआम घूमने के बिल्कुल हकदार नहीं हैं।

कल्याण हिंसा मामले में सुप्रीम कोर्ट की बड़ी टिप्पणी

यह पूरा मामला महाराष्ट्र के कल्याण स्थित शास्त्री नगर अस्पताल का है। यहाँ डॉक्टरों और अस्पताल के अन्य स्टाफ के साथ मारपीट की घटना सामने आई थी। इस मामले में मुख्य आरोपी और स्थानीय शिवसेना नेता व नगरसेवक रमेश म्हात्रे की जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही थी। सुनवाई के दौरान अदालत का रुख बेहद सख्त नजर आया।

सोमवार को इस हाई-प्रोफाइल मामले में नया मोड़ तब आया जब आरोपी रमेश म्हात्रे ने सुप्रीम कोर्ट में अपनी दाखिल की गई याचिका को खुद ही वापस ले लिया। इस दौरान बेंच ने मौखिक रूप से बेहद कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि इस तरह के अपराधों में लिप्त व्यक्तियों को एक पल के लिए भी बाहर सड़कों पर घूमने की छूट नहीं दी जा सकती।

बॉम्बे हाई कोर्ट की शर्तों को दी गई थी चुनौती

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ इस पूरे मामले की सुनवाई कर रही थी। मामला तब अदालत के सामने आया जब बॉम्बे हाई कोर्ट की तरफ से तय की गई जमानत शर्तों को चुनौती दी गई। सुप्रीम कोर्ट ने म्हात्रे को अपनी याचिका वापस लेने की अनुमति तो दे दी, साथ ही महाराष्ट्र सरकार की उस अहम याचिका पर नोटिस भी जारी कर दिया जिसमें म्हात्रे समेत कुल चार आरोपियों की जमानत को पूरी तरह रद्द करने की मांग की गई है।

गौरतलब है कि इस साल 6 जुलाई को पुलिस ने कल्याण में डॉक्टरों के साथ हुई मारपीट के इस गंभीर मामले में रमेश म्हात्रे को गिरफ्तार किया था। निचली अदालत यानी सेशन कोर्ट ने 14 जुलाई को उन्हें राहत देते हुए जमानत दे दी थी। हालांकि, मामला तूल पकड़ने पर बॉम्बे हाई कोर्ट ने इस मामले का खुद संज्ञान लिया और 18 जुलाई को सेशन कोर्ट के जमानत आदेश पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी थी।

क्या है आगे की कानूनी प्रक्रिया?

कानूनी दांव-पेंच के इस दौर में 7 अगस्त को बॉम्बे हाई कोर्ट ने अपनी पुरानी रोक को हटाते हुए रमेश म्हात्रे और अन्य तीन आरोपियों को कुछ सख्त शर्तों के साथ जमानत दे दी थी। इसी हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ अब महाराष्ट्र सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंची है।

सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की इस याचिका पर संज्ञान लेते हुए नोटिस जारी किया है और प्रतिवादियों से जवाब तलब किया है। इस पूरे मामले पर अब अगली कानूनी कार्रवाई और सुनवाई आने वाली 28 सितंबर को तय की गई है, जिस पर पूरे देश की निगाहें टिकी हुई हैं।

पालघर की घटना का भी लिया गया कड़ा संज्ञान

सिर्फ कल्याण ही नहीं, बल्कि महाराष्ट्र के अन्य हिस्सों से भी ऐसी घटनाएं सामने आ रही हैं जो स्वास्थ्य व्यवस्था की सुरक्षा पर सवालिया निशान लगाती हैं। हाल ही में मुंबई से सटे पालघर जिले के एक अस्पताल में भी ऐसा ही शर्मनाक मामला सामने आया था, जहां शिवसेना के कुछ पदाधिकारियों ने अस्पताल में घुसकर डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ के साथ कथित तौर पर मारपीट की थी।

इस घटना पर भी सुप्रीम कोर्ट ने बेहद कड़ा रुख अपनाते हुए राज्य सरकार को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने कहा है कि इस तरह की हिंसा में चाहे कोई राजनीतिक नेता शामिल हो या कोई अन्य रसूखदार व्यक्ति, पुलिस और प्रशासन को बिना किसी देरी के ऐसे आरोपियों को तुरंत हिरासत में लेना चाहिए।

क्यों उठ रहे हैं डॉक्टरों की सुरक्षा पर सवाल?

  • पेशे की गरिमा और जान जोखिम में: अस्पताल आपातकालीन सेवाएं हैं जहां तनाव का माहौल आम होता है, लेकिन हिंसा का रास्ता चुनना कानूनन अपराध है।
  • राजनीतिक रसूख का असर: अक्सर स्थानीय नेताओं या उनके समर्थकों द्वारा पुलिस प्रशासन पर दबाव बनाने की कोशिश की जाती है, जिस पर सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी एक बड़ा और जरूरी संदेश है।
  • सुरक्षा के कड़े कानून की मांग: मेडिकल बिरादरी लंबे समय से अस्पतालों में केंद्रीय सुरक्षा अधिनियम और सख्त सजा की मांग करती रही है।

बहरहाल, सुप्रीम कोर्ट के इस सख्त तेवर से यह साफ हो गया है कि न्यायपालिका स्वास्थ्य कर्मियों के खिलाफ होने वाली हिंसा को लेकर किसी भी तरह की नरमी बरतने के मूड में नहीं है। आने वाले दिनों में 28 सितंबर को होने वाली सुनवाई यह तय करेगी कि इस मामले में आरोपियों की मुश्किलें कितनी और बढ़ने वाली हैं।

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निवेदिता ठाकुर

निवेदिता ठाकुर

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निवेदिता ठाकुर जमीनी पत्रकारिता के मजबूत स्तंभ हैं। वे स्थानीय स्तर की उन खबरों को सामने लाते हैं, जो अक्सर बड़े प्लेटफॉर्म पर नजर अंदाज हो जाती है...

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