इजरायल में 26वें नेसेट (संसद) के लिए हुए आम चुनाव के शुरुआती एग्जिट पोल और आंशिक परिणामों में किसी भी दल या गठबंधन को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की लिक्विड पार्टी सबसे बड़े दल के रूप में उभरी है, लेकिन उनके दक्षिणपंथी ब्लॉक और विपक्षी दलों के बीच कड़ा मुकाबला और गतिरोध बना हुआ है।
बुधवार, 28 अक्टूबर की सुबह जेरूसलम में लिक्विड पार्टी के चुनाव-रात्रि कार्यक्रम में अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने दावा किया कि उनकी पार्टी इजरायल में सबसे बड़ी है और दक्षिणपंथी ब्लॉक ने निर्णायक बहुमत हासिल कर लिया है। स्थानीय समयानुसार रात करीब 3 बजे मतगणना शुरू होने के बाद यह उनका पहला सार्वजनिक बयान था। हालांकि, उनके ये दावे एग्जिट पोल के आंकड़ों से आगे हैं, जो किसी भी स्पष्ट विजेता के न होने और सरकार गठन के लिए आवश्यक 61 सीटों के जादुई आंकड़े से उनके ब्लॉक के पीछे रहने का संकेत देते हैं।
नेतन्याहू ने एक 'राष्ट्रीय दक्षिणपंथी सरकार' के गठन का आह्वान किया, यह कहते हुए कि इजरायल को अरब पार्टियों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए, और टीवी चैनलों तथा विपक्ष पर तीखा हमला बोला। अपने संबोधन का एक बड़ा हिस्सा उन्होंने ईरान पर केंद्रित किया और कहा कि इजरायल और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास इस खतरे को 'एक बार और हमेशा के लिए' समाप्त करने का अवसर है। उन्होंने उम्मीद जताई कि एक-दो दिन के भीतर अंतिम परिणाम आ जाएंगे।
नेतन्याहू और गैडी एसेनकोट के बीच बराबरी का मुकाबला
इजरायल के मुख्य टेलीविजन नेटवर्कों के पोल के अनुसार, बेंजामिन नेतन्याहू का गठबंधन और पूर्व जनरल गैडी एसेनकोट के नेतृत्व वाला विपक्षी ब्लॉक दोनों 51-51 सीटों पर बराबरी पर हैं। 120 सीटों वाली नेसेट में बहुमत के लिए 61 सीटों की आवश्यकता होती है। केंद्रीय चुनाव समिति के आंकड़ों के अनुसार, चुनाव में 2.7 मिलियन से अधिक मतों की गिनती हो चुकी है, जो कुल वोटों का लगभग 55.4% है।
शुरुआती रुझानों में बेंजामिन नेतन्याहू की लिक्विड पार्टी सबसे आगे बनी हुई है, हालांकि गिनती आगे बढ़ने के साथ वैध वोटों के उनके हिस्से में मामूली गिरावट आई है। गैडी एसेनकोट की यशार पार्टी दूसरे स्थान पर है, जबकि नफ्ताली बेनेट का टुगेदर गठबंधन तीसरे स्थान पर पहुंच गया है। ये परिणाम अभी शुरुआती हैं और अंतिम आंकड़े आने पर इनमें बदलाव हो सकता है।
विपक्ष और अन्य दलों की स्थिति
विपक्षी नेता और पूर्व जनरल गैडी एसेनकोट ने मतदाताओं के रुख का हवाला देते हुए दावा किया कि जनता ने लंबे समय से सत्ता में काबिज प्रधानमंत्री को नकार दिया है। हालांकि, दोनों तरफ से दावे किए जा रहे हैं, लेकिन कोई भी पक्ष फिलहाल स्पष्ट जीत का दावा नहीं कर पा रहा है।
दूसरी ओर, धुर दक्षिणपंथी राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-ग्वीर को इस चुनाव में करारा झटका लगता दिख रहा है। द गार्डियन की रिपोर्ट के मुताबिक, उनकी पार्टी ओत्ज़मा यहूदी (ज्विश पावर) ने 2022 के चुनाव में छह सीटें जीती थीं और इस बार बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद थी, लेकिन अधिकांश टीवी एग्जिट पोल बता रहे हैं कि पार्टी छह सीटों पर ही सिमट सकती है।
भारतीय मूल के यहूदियों का प्रतिनिधित्व और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
इस चुनाव में किर्यत गात के एक सामुदायिक नेता यानिव अष्टमकेर त्सोमेट बीट इजरायल के टिकट पर चुनाव मैदान में हैं, जो भारतीय मूल के यहूदियों की चिंताओं को संसद तक पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं। यानिव अष्टमकेर को पार्टी की सूची में तीसरे स्थान पर रखा गया है। उनकी यह उम्मीदवारी समुदाय द्वारा जुलाई 1984 के चुनाव में प्रतिनिधित्व हासिल करने के शुरुआती प्रयास के चार दशक बाद सामने आई है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर दावा किया कि उनके समर्थन ने नेतन्याहू की संभावित 'निर्णायक हार' को एक गतिरोध या जीत में बदल दिया है। ट्रंप ने लिखा कि यह सब राष्ट्रपति ट्रंप के समर्थन के बाद हुआ है, जो मध्य पूर्व, इजरायल और संयुक्त राज्य अमेरिका के लिए केवल भलाई चाहते हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि परिणाम यही रहते हैं, तो इजरायल को हफ्तों लंबी राजनीतिक सौदेबाजी का सामना करना पड़ सकता है। यह गतिरोध अंततः नेतन्याहू के पक्ष में भी काम कर सकता है, जिससे 77 वर्षीय नेता संभावित लंबी गठबंधन वार्ताओं के दौरान या नए चुनाव होने तक कार्यवाहक प्रधानमंत्री के रूप में पद पर बने रह सकते हैं।