3 नवंबर 2026 को होने वाले अमेरिकी मध्यावधि (मिडटर्म) चुनाव अमेरिकी कांग्रेस में सत्ता संतुलन तय करने के साथ-साथ एच-1बी वीजा, रोजगार-आधारित ग्रीन कार्ड और कड़े आव्रजन नियमों के भविष्य की दिशा तय करेंगे।
वर्तमान में रिपब्लिकन पार्टी का प्रतिनिधि सभा (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) और सीनेट दोनों पर नियंत्रण है। डेमोक्रेट्स को दोनों सदनों में बहुमत हासिल करने के लिए कम से कम चार सीटों का शुद्ध लाभ प्राप्त करना होगा। चुनाव के नतीजे यह निर्धारित करेंगे कि कौन सी पार्टी आव्रजन नीतियों को आकार देगी, जिसमें एच-1बी वीजा नियमों को कड़ा करना और डिपोर्टेशन से जुड़े फैसले शामिल हैं।
ट्रंप प्रशासन की आव्रजन नीतियां और आईटी कंपनियों पर रोक
यह चुनाव ऐसे समय में हो रहे हैं जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का प्रशासन विदेशी कामगारों के परमिट और एच-1बी वीजा नियमों को लगातार कड़ा कर रहा है। अमेरिकी सरकार ने माइक्रोसॉफ्ट, एडोब, कॉग्निजेंट, इंफोसिस और टाटा कंसलटेंसी सर्विसेज (टीसीएस) जैसी प्रमुख आईटी आउटसोर्सिंग कंपनियों और सॉफ्टवेयर निर्माताओं को एक प्रमुख ग्रीन-कार्ड कार्यक्रम यानी पर्म (PERM - परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन) प्रक्रिया से निलंबित करने की घोषणा की है।
कांग्रेस में कौन सा दल सदन और सीनेट को नियंत्रित करता है, इसी बात से यह तय होता है कि आव्रजन से जुड़े कौन से विधेयक आगे बढ़ेंगे, उनमें संशोधन होगा या वे ठप पड़ जाएंगे। अमेरिकी कानून के अनुसार, कोई भी विधेयक तभी कानून बनता है जब वह हाउस और सीनेट दोनों से एक जैसे रूप में पारित हो जाए और राष्ट्रपति द्वारा उस पर हस्ताक्षर किए जाएं। जनवरी 2027 में इस कांग्रेस के कार्यकाल के समाप्त होने तक जो विधेयक पारित नहीं होंगे, वे स्वतः समाप्त हो जाएंगे और उन्हें दोबारा पेश करना होगा।
एच-1बी आधुनिकीकरण अधिनियम और वेतन सीमा पर बहस
ट्रंप प्रशासन के प्रतिबंधों के अलावा, कई कांग्रेसी प्रस्ताव भी विदेशी नागरिकों, विशेषकर अमेरिका में रह रहे भारतीयों के भविष्य को तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। विस्कॉन्सिन के प्रतिनिधि ग्लेन ग्रोथमैन और रिपब्लिकन सीनेटर जॉन हस्टेड ने अपने-अपने सदनों में ‘प्रोटेक्टिंग अमेरिकन वर्कर्स थ्रू एच-1बी मॉडर्नाइजेशन एक्ट’ (H-1B Modernization Act) पेश किया है। इस विधेयक का उद्देश्य उस पुराने कानूनी प्रावधान को बंद करना है, जिसके तहत एच-1बी पर निर्भर नियोक्ता अमेरिकी श्रमिकों के लिए तय सुरक्षा उपायों को दरकिनार कर देते हैं।
मौजूदा कानून के तहत, ऐसी कंपनियां जिनके कार्यबल में एच-1बी कर्मचारियों की हिस्सेदारी एक निश्चित सीमा से अधिक है, उन्हें अतिरिक्त एच-1बी वीजा प्रायोजित करने से पहले यह घोषणा करनी होती है कि उन्होंने अमेरिकी कामगारों को काम पर रखने का प्रयास किया था। हालांकि, यदि कंपनियां यह प्रमाणित करती हैं कि एच-1बी कर्मचारी को प्रति वर्ष कम से कम 60,000 डॉलर का वेतन मिलता है या उसके पास मास्टर डिग्री या उससे उच्च शिक्षा है, तो उन्हें इस नियम से छूट मिल जाती है।
वर्ष 1998 में तय की गई 60,000 डॉलर की यह वेतन सीमा उस समय सामाजिक सुरक्षा प्रशासन (SSA) के राष्ट्रीय औसत वेतन सूचकांक से दोगुनी रखने के इरादे से बनाई गई थी। प्रतिनिधि ग्रोथमैन के कार्यालय का कहना है कि मुद्रास्फीति के हिसाब से समायोजित करने पर मूल सीमा आज 140,000 डॉलर होनी चाहिए। प्रतिनिधि ग्रोथमैन ने कहा कि अमेरिकी नागरिकों को अपने ही देश में प्राथमिकता मिलनी चाहिए और नियोक्ताओं को दशकों पुराने वेतन का हवाला देकर योग्य अमेरिकियों के हितों की अनदेखी करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।
एच-1बी एब्यूज एक्ट और नए प्रतिबंध
रिपब्लिकन सीनेटर टिम शीही द्वारा पेश एक अन्य विधेयक के तहत तीन साल के लिए नए एच-1बी वीजा जारी करने पर रोक लगाने और ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए कुछ एच-1बी याचिकाओं पर 100,000 डॉलर के शुल्क को औपचारिक रूप देने की मांग की गई है, जिसे हालांकि एक संघीय अदालत ने रद्द कर दिया था। मोंटवाना से अमेरिकी सीनेटर शीही ने कहा कि अमेरिका को ऐसे वीजा जारी नहीं करने चाहिए जिससे अमेरिकी श्रमिकों के अधिकारों को कमतर आंका जाए।
सीनेटर शीही ने कहा कि एच-1बी कार्यक्रम विशेष, कठिन पदों के लिए कार्यबल की कमी को दूर करने के लिए बनाया गया था, न कि योग्य और मेहनती अमेरिकियों को सस्ते विदेशी श्रम से विस्थापित करने के लिए। उनका यह विधेयक इस कार्यक्रम को उसके मूल उद्देश्य पर लौटने और अमेरिकी श्रमिकों के हितों को सुरक्षित रखने का प्रयास करता है।
भारतीय प्रवासियों और वीजा धारकों के लिए क्या हैं मायने?
यदि नवंबर के मध्यावधि चुनावों में डेमोक्रेट्स रिपब्लिकन पार्टी से सदनों का नियंत्रण छीन भी लेते हैं, तो भी यह राष्ट्रपति ट्रम्प द्वारा पारित घोषणाओं या एजेंसी के नियमों को अपने आप स्वतः खारिज नहीं करेगा। जो भारतीय इन चुनावों पर बारीक नजर बनाए हुए हैं, उनके लिए मुख्य मुद्दा यह होगा कि क्या प्रस्तावित एच-1बी प्रतिबंध, ग्रीन कार्ड सुधार और अन्य उपाय कांग्रेस में आगे बढ़ पाते हैं या नहीं।