रूस-यूक्रेन ऊर्जा संघर्ष विराम और शांति वार्ता के तहत अमेरिका ने यूक्रेन के रास्ते यूरोप तक गैस आपूर्ति बहाल करने की एक नई योजना पेश की है।
रूस और यूक्रेन के बीच ऊर्जा संघर्ष विराम कराने के लिए अमेरिका एक नई कूटनीतिक योजना पर काम कर रहा है। इसके तहत सोवियत काल के पाइपलाइन नेटवर्क के जरिए यूक्रेन के रास्ते रूसी प्राकृतिक गैस को दोबारा यूरोप तक पहुंचाने का प्रस्ताव रखा गया है।
द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका, यूरोप और यूक्रेन के अधिकारियों का कहना है कि यह प्रस्ताव मॉस्को और कीव के बीच शांति वार्ता को आगे बढ़ाने की एक बड़ी कोशिश का हिस्सा है। सर्दियों की शुरुआत से पहले इस ऊर्जा सीजफायर को लागू करने पर जोर दिया जा रहा है ताकि दोनों देशों के ऊर्जा ढांचे को सुरक्षित रखा जा सके और यूरोप के बढ़ते ऊर्जा संकट को कम किया जा सके।
क्या है नई पाइपलाइन व्यवस्था का खाका?
इस प्रस्तावित व्यवस्था के तहत एक अमेरिकी मध्यस्थ कंपनी रूसी गैस की बिक्री और वितरण को संभालेगी। इससे यूरोपीय संघ के प्रतिबंधों का प्रत्यक्ष उल्लंघन भी नहीं होगा और अमेरिकी निवेशकों को इस कारोबार में हिस्सेदारी मिलने का रास्ता साफ हो जाएगा। अमेरिकी दूत जेरेड कुशनर और स्टीव विटकॉफ ने सितंबर में अपनी मॉस्को और कीव यात्रा के दौरान यह प्रस्ताव रखा था।
इस योजना में सोवियत दौर के उस पाइपलाइन नेटवर्क का इस्तेमाल करने का सुझाव दिया गया है, जो साइबेरिया के उरेंगॉय गैस क्षेत्रों को यूक्रेन के रास्ते यूरोप से जोड़ता है। इसके बदले में यूक्रेन को गैस ट्रांजिट शुल्क के रूप में जरूरी राजस्व मिल सकेगा, जिससे युद्ध से जूझ रही उसकी अर्थव्यवस्था को भी सहारा मिलेगा। व्हाइट हाउस ने यह भी विचार किया है कि रूस गैस बिक्री से मिलने वाले पैसों का इस्तेमाल सीधे युद्ध में न कर सके। इसके लिए यूरोप से मिलने वाले पैसों को किसी तीसरे देश के अधिकार क्षेत्र वाले सुरक्षित एस्क्रो खाते में रखने का प्रस्ताव है।
यूरोप की हिचकिचाहट और प्रतिबंधों की बाधा
इस प्रस्ताव की राह में सबसे बड़ी रुकावट यूरोप का वह राजनीतिक संकल्प है, जिसके तहत उसने रूसी ऊर्जा पर अपनी निर्भरता पूरी तरह खत्म करने का निर्णय लिया है। यूरोपीय संघ के मौजूदा कानूनों के मुताबिक, सदस्य देशों को 2027 के अंत तक रूसी प्राकृतिक गैस की खरीद पूरी तरह बंद करनी है। कई यूरोपीय नेताओं ने साफ कर दिया है कि वे रूस से आपूर्ति दोबारा शुरू नहीं करना चाहते क्योंकि वे इसे अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा मानते हैं।
ईयू के एनर्जी कमिश्नर डैन जोर्गेनसन ने भी दोहराया है कि रूस के साथ कोई भी शांति समझौता होने के बावजूद उस पर पूरी तरह भरोसा नहीं किया जा सकता। इसके बावजूद, अमेरिकी मध्यस्थों का मानना है कि यूरोपीय बाजार तक आसान पहुंच रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को इस डील को स्वीकार करने का एक बड़ा वित्तीय कारण दे सकती है।
नॉर्ड स्ट्रीम की तुलना में यूक्रेनी मार्ग क्यों है आसान?
वाशिंगटन किसी व्यापक समझौते के तहत क्षतिग्रस्त नॉर्ड स्ट्रीम पाइपलाइनों को भी बहाल करने के विकल्प पर विचार कर रहा है। हालांकि, सितंबर 2022 में पानी के भीतर हुए धमाकों के कारण नॉर्ड स्ट्रीम 1 और 2 पाइपलाइनें बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं और उन्हें दोबारा शुरू करने में लंबा वक्त और जटिल कानूनी प्रक्रियाएं लगेंगी।
इसके विपरीत, यूक्रेन से होकर गुजरने वाला पाइपलाइन नेटवर्क तुरंत चालू किया जा सकता है। यह नेटवर्क स्लोवाकिया, ऑस्ट्रिया और जर्मनी तक जाता है और युद्ध की विभीषिका के बावजूद जनवरी 2025 तक यहां से सीमित गैस आपूर्ति जारी रही थी।
यूरोप का गहराता ऊर्जा संकट और शांति वार्ता का अगला कदम
वर्तमान में यूरोप में ऊर्जा की स्थिति बेहद चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। ईरान से जुड़े भू-राजनीतिक टकराव के चलते कतर से आने वाली लिक्विफाइड नेचुरल गैस की खेप खाड़ी देशों के पास अटक गई है, जिससे यूरोप की ऊर्जा लागत में करीब 100 अरब यूरो का इजाफा हुआ है। इसके अलावा, यूरोप के भूमिगत गैस भंडारण केवल 75% ही भर पाए हैं, जो पिछले नौ साल के औसत से काफी कम है।
यह प्रस्ताव पिछले महीने तब धीमा पड़ गया था जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दबाव के बाद यूक्रेन ने रूसी रिफाइनरियों पर हमले दो सप्ताह के लिए रोक दिए थे, जबकि रूस की तरफ से यूक्रेन के ऊर्जा ढांचों पर हमले जारी रहे थे। हालांकि, हाल ही में यूक्रेन द्वारा रूस की तीन बड़ी रिफाइनरियों पर दोबारा हमले शुरू किए जाने के बाद ऊर्जा संघर्ष विराम का मुद्दा फिर से गरमा गया है। आगामी नवंबर के मध्य में अबू धाबी में अमेरिका, रूस और यूक्रेन के बीच एक त्रिपक्षीय वार्ता प्रस्तावित है, हालांकि मॉस्को ने अब तक इस व्यवस्था पर झिझक दिखाई है।