भारतीय रेलवे के बुनियादी ढांचे और जनहित से जुड़े मुद्दों पर जनप्रतिनिधियों का रुख अब बेहद आक्रामक होता जा रहा है। ताजा मामला महाराष्ट्र के नासिक जिले से सामने आया है, जहां दिंडोरी लोकसभा क्षेत्र के सांसद भास्करराव भगरे ने रेलवे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। जनता से जुड़े मामलों पर बार-बार पत्राचार और बैठकों के बावजूद संतोषजनक परिणाम न मिलने पर सांसद ने कड़ा रुख अख्तियार करते हुए भुसावल मंडल के डीआरएम (डिवेलपमेंट रेलवे मैनेजर) के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव पेश किया है। इस राजनीतिक और प्रशासनिक घटनाक्रम ने रेलवे गलियारों में हलचल मचा दी है।
नागपुर में हुई उच्चस्तरीय बैठक में गरमाया मुद्दा
यह पूरा घटनाक्रम नागपुर में आयोजित मध्य रेलवे के नागपुर और भुसावल मंडलों की रेलवे परामर्श समिति की बैठक के दौरान सामने आया। समिति के अध्यक्ष और सांसद अनुप धोत्रे की अध्यक्षता में हुई इस महत्वपूर्ण बैठक में क्षेत्र के कई दिग्गज जनप्रतिनिधि शामिल हुए। इस उच्चस्तरीय बैठक में सांसद अनिल बोंडे, बलवंत वानखेड़े, स्मिता वाघ, प्रतिभा धानोरकर, ज्ञानेश्वर पाटिल, दुर्गादास उइके, श्यामकुमार बर्वे के साथ-साथ मध्य रेलवे के महाप्रबंधक (GM) राजेश श्रीवास्तव और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। बैठक का मुख्य एजेंडा आम नागरिकों को मिलने वाली रेल सेवाओं में सुधार और लंबित परियोजनाओं को गति देना था।
बैठक की शुरुआत से ही सांसद भास्करराव भगरे ने अपने क्षेत्र की उपेक्षा का मुद्दा जोरदार तरीके से उठाया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जनता की बुनियादी जरूरतों और रेल सुविधाओं के विस्तार को लेकर वे लंबे समय से फॉलो-अप कर रहे हैं, लेकिन स्थानीय रेलवे प्रशासन की ओर से केवल टालमटोल रवैया अपनाया गया है। इसी उदासीनता और प्रशासनिक लापरवाही के चलते उन्होंने भुसावल मंडल के डीआरएम के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव लाने की घोषणा की।
सांसद भास्करराव भगरे की प्रमुख मांगें और रेलवे के सामने चुनौतियां
दिंडोरी लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले विभिन्न रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों की भारी असुविधा को दूर करने के लिए सांसद भगरे ने कई अहम मांगें रखी हैं। इन मांगों पर यदि समय रहते अमल नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में यह विवाद और गहरा सकता है:
- मनमाड-कुर्ला गोदावरी एक्सप्रेस: इस लोकप्रिय ट्रेन को फिर से मनमाड से ही शुरू करने की पुरजोर मांग की गई है, जिससे मुंबई आने-जाने वाले दैनिक यात्रियों और व्यापारियों को राहत मिल सके।
- मनमाड रेलवे वर्कशॉप का आधुनिकीकरण: वर्कशॉप में खाली पड़े हजारों पदों पर तत्काल भर्ती प्रक्रिया शुरू करने और स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता देने की मांग उठाई गई। इसके साथ ही वर्कशॉप का दायरा बढ़ाकर नए प्रोजेक्ट्स लाने पर जोर दिया गया।
- महत्वपूर्ण ट्रेनों का ठहराव (Stoppage): नांदगांव रेलवे स्टेशन पर झेलम एक्सप्रेस (11077/11078) और अमरावती एक्सप्रेस (11025/11026) के स्टॉपेज की मांग की गई है।
- लासलगांव स्टेशन पर विशेष ध्यान: लासलगांव जैसे कृषि और व्यापारिक रूप से अहम केंद्र पर देवगिरी एक्सप्रेस, शालीमार एक्सप्रेस, जनता एक्सप्रेस, मुंबई-हावड़ा मेल, राज्यरानी एक्सप्रेस, जनशताब्दी एक्सप्रेस और मनमाड-इगतपुरी शटल को दोबारा रोकने का आग्रह किया गया।
- यात्री सुविधाएं: लासलगांव रेलवे स्टेशन पर वरिष्ठ नागरिकों और आम यात्रियों की सुगमता के लिए एस्केलेटर या लिफ्ट लगाने की मांग प्रमुखता से रखी गई।
भूमि अधिग्रहण और ग्रामीण कनेक्टिविटी पर जोर
केवल ट्रेनों के स्टॉपेज तक ही यह मामला सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों की बुनियादी जरूरतों और औद्योगिक विकास को रफ्तार देने के लिए भी कड़े कदम उठाने की मांग की गई है। सांसद भगरे ने मनमाड-इंदौर रेल लाइन के लिए चल रही भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया में तेजी लाने का निर्देश देने को कहा है, ताकि इस रणनीतिक प्रोजेक्ट का काम जल्द से जल्द धरातल पर उतर सके।
इसके अलावा, नांदगांव तहसील के चाकली और कोटमगांव के किसानों के लिए सुगम संपर्क मार्ग उपलब्ध कराने की मांग की गई। स्थानीय स्तर पर आवाजाही को सुरक्षित बनाने के लिए मोरखेड़-आज़ादनगर-क्रांतिनगर मार्ग पर बंद किए गए रेलवे क्रॉसिंग के स्थान पर आधुनिक अंडरपास या सबवे के निर्माण की अनिवार्यता पर जोर दिया गया ताकि स्कूली बच्चों और किसानों को रोजाना जान जोखिम में न डालनी पड़े।
मेमू ट्रेनों का विस्तार और स्टेशनों का कायाकल्प
दैनिक यात्रियों की संख्या में हो रही लगातार बढ़ोतरी को देखते हुए नांदगांव और इगतपुरी के बीच नई मेमू (MEMU) ट्रेन सेवा शुरू करने की मांग को भी पुरजोर तरीके से उठाया गया है। इसके साथ ही निफाड, कासबे सुकेने और खेरवाड़ी रेलवे स्टेशनों के आधुनिकीकरण और विकास कार्यों को जल्द पूरा करने की बात कही गई। निफाड क्षेत्र में सभी प्रमुख ट्रेनों के ठहराव की मांग करते हुए सांसद ने चेताया कि दिंडोरी के विकास से जुड़े ये मुद्दे अब फाइलों में बंद नहीं रहने चाहिए, बल्कि इनके क्रियान्वयन पर धरातल पर काम दिखना चाहिए।
प्रशासनिक हलचल और आगे की राह
रेलवे बोर्ड और मध्य रेलवे मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में इस तरह का प्रस्ताव आना यह साफ दर्शाता है कि जनप्रतिनिधि अब जनता के प्रति अपनी जवाबदेही को लेकर कितने गंभीर हो चुके हैं। एक तरफ जहां रेलवे अपनी आय बढ़ाने और वंदे भारत जैसी आधुनिक ट्रेनों के संचालन पर जोर दे रहा है, वहीं ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों के पारंपरिक यात्री ठहराव और लोकल ट्रेनों की मांगें उपेक्षित पड़ी हैं।
मध्य रेलवे के महाप्रबंधक राजेश श्रीवास्तव और समिति के अध्यक्ष अनुप धोत्रे के सामने आए इस मामले के बाद अब यह देखना दिलचस्प होगा कि भुसावल मंडल प्रशासन इस विशेषाधिकार हनन के प्रस्ताव और सांसद की इन जायज मांगों पर क्या प्रतिक्रिया देता है। नासिक और दिंडोरी क्षेत्र की जनता की निगाहें अब रेलवे के अगले आधिकारिक कदम पर टिकी हैं कि क्या वास्तव में कागजी कार्रवाई से बाहर निकलकर जमीनी स्तर पर राहत मिल पाएगी या यह गतिरोध और अधिक लंबा खिंचेगा।