सिनेमा के पर्दे पर जब भी कोई दिग्गज कलाकार अपनी कला की पराकाष्ठा दिखाता है, तो वह सीन सीधे दर्शकों के दिलों में उतर जाता है। हिंदी सिनेमा के महानायक अमिताभ बच्चन ने अपने करियर में कई ऐसे किरदार निभाए हैं, जो पीढ़ियों तक याद रखे जाएंगे। उनकी आवाज का जादू और अभिनय की गहराई किसी भी आम दृश्य को ऐतिहासिक बना सकती है। आज से करीब दो दशक पहले रिलीज हुई एक पारिवारिक ड्रामा फिल्म का ऐसा ही एक गाना आज भी लोगों की आंखों में आंसू ले आता है। यह वह दौर था जब परिवार, रिश्तों की अहमियत और बुढ़ापे के अकेलेपन को पर्दे पर बेहद संवेदनशीलता के साथ उकेरा जा रहा था।
जब अमिताभ बच्चन की आवाज ने थिएटर्स में ला दिया था सन्नाटा
सिनेमा प्रेमियों को अमिताभ बच्चन की भारी और गूंजती हुई आवाज से गहरा लगाव रहा है। उन्होंने 'रंग बरसे' और 'मेरे अंगने में' जैसे एनर्जेटिक गाने गाकर महफिल लूटी है, वहीं दूसरी ओर उन्होंने कुछ ऐसे गीत भी गाए हैं जो सीधे रूह को छू लेते हैं। आज हम बात कर रहे हैं उस फिल्म की जिसने साल 2003 में रिलीज होकर बॉक्स ऑफिस पर तहलका मचा दिया था। इस फिल्म में सिर्फ अभिनय ही नहीं, बल्कि संगीत ने भी एक अलग ही इतिहास रचा था। फिल्म के गानों ने रिलीज के साथ ही श्रोताओं के दिलों में घर कर लिया था, लेकिन इनमें से एक ट्रैक ऐसा था जिसे सुनते ही सिनेमाघरों में बैठे लोग खुद को रोक नहीं पाए थे और उनकी आंखें नम हो गई थीं।
हम बात कर रहे हैं फिल्म 'बागबान' की, जिसे रिलीज हुए 23 साल बीत चुके हैं, लेकिन इस फिल्म का दर्द आज भी उतना ही ताजा महसूस होता है। इस फिल्म में अमिताभ बच्चन और हेमा मालिनी ने एक ऐसे बुजुर्ग दंपती की भूमिका निभाई थी जिन्हें अपने ही बच्चों के तानों और उपेक्षा के कारण अलग-अलग रहने पर मजबूर होना पड़ता है। माता-पिता के बीच की यह दूरियां और उनकी बेबसी इतनी मार्मिक थी कि हर देखने वाले का कलेजा मुंह को आ जाता था। इसी दर्द को बयां करता हुआ एक गाना फिल्म का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ था।
'मैं यहां तू वहां' गाने की अनकही दास्तान
फिल्म का यह सुपरहिट और बेहद दर्दभरा गाना था 'मैं यहां तू वहां'। इस गीत को खुद अमिताभ बच्चन ने अपनी आवाज दी थी, जिससे इसकी भावनात्मक गहराई कई गुना बढ़ गई थी। जब एक जीवनसाथी से जुदाई का दर्द असहनीय हो जाता है, तो इंसान कांप उठता है। गाने में अमिताभ बच्चन और हेमा मालिनी की हालत कुछ ऐसी ही थी। इस गाने के बोल इतने असरदार थे कि सुनने वाले का दिल अंदर तक हिल जाता था। गाने में हेमा मालिनी के हिस्से की आवाज जानी-मानी गायिका अलका याग्निक ने दी थी, जिन्होंने अपनी सुरीली और नम आवाज से इस दर्द को जीवंत कर दिया था।
दिलचस्प बात यह है कि इस गाने के शुरुआती मुखड़े किसी और ने नहीं बल्कि खुद फिल्म के दिग्गज निर्माता-निर्देशक बीआर चोपड़ा ने लिखे थे, हालांकि बाकी के गीत को जाने-माने गीतकार समीर अनजान ने पूरा किया था। संगीतकार आदेश श्रीवास्तव ने इस गाने की ऐसी धुन तैयार की थी जो कानों में पड़ते ही सीधे दिल पर घाव कर देती थी। अमिताभ बच्चन की भारी और थकी हुई आवाज ने इस गाने में जो जान फूंकी, उसने इसे हमेशा के लिए अमर बना दिया।
टेलीफोन बूथ का वह ऐतिहासिक और रुला देने वाला सीन
इस गाने की सबसे बड़ी यूएसपी इसकी सिनेमैटोग्राफी और इसका फिल्मांकन (P पिक्चराइजेशन) था। आज के आधुनिक मोबाइल और इंटरनेट के दौर में शायद नई पीढ़ी के लिए यह कल्पना करना थोड़ा मुश्किल हो, लेकिन साल 2003 में जब लैंडलाइन और पब्लिक टेलीफोन बूथ ही अपनों से जुड़ने का एकमात्र जरिया हुआ करते थे, तब का दर्द अलग ही था। गाने में दिखाया गया है कि कैसे अमिताभ बच्चन एक छोटे से टेलीफोन बूथ के अंदर खड़े होकर अपनी पत्नी से बात करने की कोशिश करते हैं।
बूथ के अंदर उनका तड़प-तड़पकर रोना, फोन पर अपनी पत्नी की आवाज सुनते ही खुद को संभाल न पाना और दूसरी तरफ हेमा मालिनी का बेबस होकर आंसुओं में डूब जाना—यह दृश्य सिनेमा के इतिहास के सबसे भावुक दृश्यों में गिना जाता है। उस छोटे से टेलीफोन बूथ के अंदर अमिताभ का किरदार जिस लाचारी और तड़प से गुजर रहा था, उसने पर्दे पर बैठे दर्शकों को अंदर से तोड़ दिया था। कई सिनेमाघरों से यह रिपोर्ट्स आई थीं कि जब यह गाना पर्दे पर चलता था, तो दर्शक फफक-फफक कर रोने लगते थे। सिनेमा हॉल के भीतर चारों तरफ सिर्फ सिसकियों की आवाज सुनाई देती थी।
क्यों आज भी प्रासंगिक है यह मास्टरपीस?
आज के समय में जब गानों का मतलब केवल पार्टी और रील्स तक सीमित रह गया है, तब 'बागबान' का यह गाना हमें यह याद दिलाता है कि संगीत सिर्फ मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि भावनाओं को व्यक्त करने का सबसे ताकतवर माध्यम है। अमिताभ बच्चन ने इस गाने में अपनी आवाज के जरिए जिस तरह से एक बुजुर्ग पति के अकेलेपन, बेबसी और अपनी पत्नी के प्रति बेइंतहा मोहब्बत को उतारा है, वह आधुनिक भारतीय सिनेमा में दुर्लभ है।
यह गाना आज भी जब किसी म्यूजिक ऐप पर बजता है या टीवी पर आता है, तो लोग बरबस ही उस दौर में लौट जाते हैं। यह इस बात का प्रमाण है कि सच्चे इमोशंस और बेहतरीन गायकी कभी पुरानी नहीं होती। टेलीफोन बूथ में रिकॉर्ड किया गया वह दर्द आज भी डिजिटल युग की चमक-धमक के बीच एक अलग ही पुरानी यादों की खुशबू बिखेरता है, जो हर संवेदनशील इंसान की आंखों को नम करने की ताकत रखता है।