भारतीय सिनेमा जगत में जब भी 'सदी के महानायक' का ज़िक्र होता है, तो ज़हन में सबसे पहला नाम अमिताभ बच्चन का आता है। छह दशकों से अधिक लंबे अपने शानदार करियर में उन्होंने हिंदी फिल्म इंडस्ट्री को ऐसी अनगिनत सौगातें दी हैं, जिन्होंने सिनेमा की परिभाषा ही बदल दी। आज भले ही उनकी एक झलक पाने के लिए देश-दुनिया के दर्शक बेताब रहते हैं, लेकिन इस मुकाम तक पहुंचना अमिताभ बच्चन के लिए बिल्कुल भी आसान नहीं था। एक वक्त ऐसा भी था जब उनकी लंबी कद-काठी और अलग शारीरिक बनावट ही उनके लिए सबसे बड़ी अड़चन बन गई थी।
हाल ही में लोकप्रिय टेलीविजन क्विज़ शो 'कौन बनेगा करोड़पति 18' के एक एपिसोड के दौरान महानायक ने अपने शुरुआती संघर्ष के दिनों से पर्दा उठाया। शो के दौरान एक कंटेस्टेंट के साथ बातचीत करते हुए उन्होंने एक ऐसा किस्सा सुनाया, जिसे सुनकर हर कोई हैरान रह गया। अमिताभ बच्चन ने बताया कि उनके शुरुआती दिनों में फिल्म निर्माता उनकी हाइट देखकर काम देने से कतराते थे और अजीबोगरीब दलीलें दिया करते थे।
जब मेकर्स ने कह दिया था - 'कोई हीरोइन काम नहीं करेगी'
केबीसी 18 के सेट पर विनम्र नाम के एक कंटेस्टेंट ने अमिताभ बच्चन के आइकॉनिक हेयरस्टाइल और उनके लंबे साइडबर्न्स को लेकर एक मजेदार बात छेड़ी। कंटेस्टेंट ने बताया कि उनके दादाजी एक फिल्म डिस्ट्रीब्यूटर थे और उन्होंने कई पुरानी बातें साझा की थीं। इस बातचीत के सिलसिले में अमिताभ बच्चन ने खुद अपने अतीत के पन्नों को पलटा और बताया कि उनका वो खास हेयरस्टाइल महज़ कोई फैशन ट्रेंड नहीं था, बल्कि एक मजबूरी की देन था।
अमिताभ बच्चन ने पुरानी यादों को ताज़ा करते हुए कहा,'शुरुआत में जब हम फिल्मों में आए, तो काम मिलने के लिए प्रोड्यूसर्स मुख्य रूप से दो कमियां गिनाते थे। पहली बात यह कही जाती थी कि हमारी हाइट बहुत लंबी है, जिसकी वजह से कोई भी हीरोइन हमारे साथ काम करने के लिए तैयार नहीं होगी। और दूसरी बात यह कि हमारा चेहरा बहुत छोटा है।'
चेहरा बड़ा दिखाने के लिए अपनाए गए थे ये हथकंडे
मेकर्स की इन आपत्तियों और रिजेक्शन से पार पाने के लिए अमिताभ बच्चन ने खुद का एक नायाब तरीका निकाला था। अपने छोटे चेहरे को थोड़ा भरा-भरा दिखाने के लिए उन्होंने एक खास हेयरस्टाइल चुनी थी।
महानायक ने उस किस्से को आगे बढ़ाते हुए बताया, 'चेहरे के छोटेपन को छिपाने और उसे थोड़ा भरा हुआ दिखाने के लिए हमने अपने बाल बढ़ाने शुरू कर दिए थे। हम बालों को कनपटी तक उगाते थे, ताकि चेहरा अनुपात में बड़ा और स्क्रीन पर सही लगे।' इंडस्ट्री की इन तमाम शुरुआती बाधाओं के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी और अपनी मेहनत के दम पर एक नया इतिहास रच दिया।
'सात हिंदुस्तानी' से शुरू हुआ था अभिनय का सफर
अमिताभ बच्चन ने अपने फिल्मी सफर की शुरुआत साल 1969 में आई फिल्म 'सात हिंदुस्तानी' से की थी। इस फिल्म में उन्होंने अनवर अली नाम के एक शायर और कवि का किरदार निभाया था। इसके बाद उन्होंने 'रेशमा और शेरा', 'परवाना', 'संजोग' और 'बंसी बिरजू' जैसी कई फिल्मों में अभिनय किया। हालांकि, उनके शुरुआती दौर की ये फिल्में बॉक्स ऑफिस पर कोई खास कमाल नहीं दिखा पाईं और उनकी पहचान अभी भी स्थापित होनी बाकी थी।
साल 1973: 'जंजीर' ने पलट दी किस्मत की बाजी
वर्ष 1971 में आई फिल्म 'आनंद' और 1972 की फिल्म 'बॉम्बे टू गोवा' ने उनके करियर को थोड़ी रफ्तार जरूर दी। 'आनंद' में दिग्गज अभिनेता राजेश खन्ना के साथ उनकी अदाकारी को दर्शकों ने खूब सराहा। लेकिन अमिताभ बच्चन के करियर का सबसे बड़ा और निर्णायक मोड़ साल 1973 में आया, जब निर्देशक प्रकाश मेहरा की फिल्म 'जंजीर' रिलीज हुई।
इस फिल्म में उन्होंने एक सख्त और ईमानदार पुलिस अधिकारी 'विजय खन्ना' की भूमिका निभाई थी। 'जंजीर' की अभूतपूर्व सफलता ने भारतीय सिनेमा को एक नया नायक दिया, और यहीं से अमिताभ बच्चन को बॉलीवुड के 'एंग्री यंग मैन' के रूप में नई पहचान मिली। इस फिल्म के बाद पीछे मुड़कर देखने की कोई गुंजाइश नहीं बची थी।
दर्शकों के दिलों पर राज करने वाले महानायक
'जंजीर' की सफलता के बाद अमिताभ बच्चन एक के बाद एक ब्लॉकबस्टर फिल्मों की झड़ी लगाते चले गए। उन्होंने 'दीवार', 'शोले', 'अमर अकबर एंथनी', 'डॉन', 'मुकद्दर का सिकंदर' और 'त्रिशूल' जैसी तमाम सदाबहार फिल्मों में काम किया। उनकी अभिनय क्षमता और स्क्रीन प्रेजेंस ने उन्हें देखते ही देखते देश का सबसे बड़ा सितारा बना दिया।
आज भले ही वह सिनेमा जगत के सर्वोच्च शिखर पर हैं, लेकिन उनका यह संघर्ष इस बात की मिसाल है कि अगर आपके भीतर कुछ कर गुजरने का जज्बा हो, तो शारीरिक या बाहरी रुकावटें भी आपके सपनों की उड़ान को नहीं रोक सकतीं।