एशियन गेम्स 2026 के महाकुंभ में भारत के खिलाड़ियों ने अपनी खेल प्रतिभा का लोहा मनवाना शुरू कर दिया है। प्रतियोगिता के शुरुआती दिनों में ही भारतीय वुशू दल ने मैट पर शानदार प्रदर्शन करते हुए देश की झोली में एक के बाद एक बेहतरीन सफलताएं बटोरी हैं। जापान के आइची प्रीफेक्चरल मार्शल आर्ट्स हॉल में गूंजती भारतीय खिलाड़ियों की हुंकार ने साफ कर दिया है कि इस बार का मुकाबला बेहद रोमांचक और पदकों से भरा होने वाला है।
आर्यन और रोशिबिना का शानदार प्रदर्शन, क्वार्टर फाइनल में मारी एंट्री
सोमवार का दिन भारतीय वुशू के लिहाज से बेहद खास और उम्मीदों से भरा रहा। भारत के उभरते हुए सितारे आर्यन और अनुभवी खिलाड़ी रोशिबिना देवी ने अपने-अपने मुकाबलों में बेहतरीन तकनीक और अनुशासन का परिचय देते हुए क्वार्टर फाइनल में अपनी पक्की जगह बना ली है। इन दोनों की जीत ने भारतीय खेमे में उत्साह की लहर दौड़ा दी है, क्योंकि अब ये दोनों खिलाड़ी प्रतिष्ठित मंच पर पदक हासिल करने से महज एक कदम की दूरी पर खड़े हैं।
पुरुष वर्ग के 56 किलोग्राम भारवर्ग के प्री-क्वार्टर फाइनल मुकाबले में आर्यन ने मैट पर उतरते ही आक्रामक और सधी हुई रणनीति अपनाई। उनका मुकाबला अफगानिस्तान के मजबूत खिलाड़ी साफी शहजादा के साथ था। आर्यन ने अपनी फुर्ती और दांव-पेच के दम पर मुकाबले पर शुरू से ही पकड़ बनाए रखी और अंततः 2-0 के स्पष्ट अंतर से जीत दर्ज कर अगले दौर में प्रवेश किया। उनकी यह जीत आने वाले मुकाबलों के लिए उनके उच्च मनोबल को दर्शाती है।
रोशिबिना देवी का अनुभव आया काम
दूसरी ओर, महिलाओं के 60 किलोग्राम भारवर्ग के 1/8 फाइनल मुकाबले में देश की स्टार वुशू खिलाड़ी और दो बार की एशियन गेम्स मेडलिस्ट रोशिबिना देवी ने एक बार फिर साबित कर दिया कि उन्हें क्यों महाद्वीप के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों में गिना जाता है। रोशिबिना का सामना बांग्लादेश की प्रतिभावान खिलाड़ी शिका खातून से था। रोशिबिना ने अपने अंतरराष्ट्रीय अनुभव का पूरा इस्तेमाल करते हुए पॉइंट्स के बड़े अंतर से मुकाबला अपने नाम किया।
अब पूरे देश की निगाहें मंगलवार को होने वाले इन दोनों खिलाड़ियों के क्वार्टर फाइनल मुकाबलों पर टिकी हुई हैं। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आर्यन और रोशिबिना अपने इस फॉर्म को बनाए रखने में कामयाब रहते हैं, तो सेमीफाइनल का टिकट कटाते ही भारत के नाम कम से कम दो और पदक पक्के हो जाएंगे।
पदक की हैट्रिक लगाने की ओर रोशिबिना
रोशिबिना देवी का नाम भारतीय वुशू इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो चुका है। उन्होंने अपनी मेहनत के दम पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम कई बार रोशन किया है। उनके पिछले रिकॉर्ड इस बात की गवाही देते हैं कि वह बड़े मुकाबलों का दबाव बेहद शानदार तरीके से संभालना जानती हैं:
- वर्ष 2018 (जकार्ता एशियन गेम्स): कांस्य पदक (Bronze Medal)
- वर्ष 2023 (हांगझोऊ एशियन गेम्स): रजत पदक (Silver Medal)
- वर्ष 2019 (काठमांडू-पोखरा साउथ एशियन गेम्स): स्वर्ण पदक (Gold Medal)
- वर्ष 2016 (वर्ल्ड जूनियर चैंपियनशिप): कांस्य पदक (Bronze Medal)
यदि रोशिबिना इस बार एशियन गेम्स 2026 में पदक जीतने में सफल रहती हैं, तो यह महाद्वीपीय खेल महाकुंभ में उनका लगातार तीसरा पदक होगा, जो अपने आप में एक ऐतिहासिक उपलब्धि होगी।
चांगक्वान वर्ग में भी दिखा भारतीय जज्बा
वुशू के ताउलू (Taolu) इवेंट्स में भी भारतीय एथलीटों ने कड़ा मुकाबला पेश किया। हालांकि वे पोडियम फिनिश से भले ही मामूली अंतर से चूक गए हों, लेकिन उनके प्रदर्शन ने खेल प्रेमियों का दिल जीत लिया। प्रतियोगिता के दौरान न्येमन वांगसु ने महिलाओं के चांगक्वान फाइनल में शिरकत की और कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच 15वां स्थान हासिल किया।
इससे पहले रविवार को पुरुषों के चांगक्वान फाइनल में भारत के सूरज सिंह मयांगलामबम ने अपने प्रदर्शन से सभी को हैरान कर दिया था। कुल 21 शीर्ष खिलाड़ियों के बीच हुए इस कांटे के मुकाबले में सूरज ने अपनी कला और शारीरिक संतुलन का बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए कुल 9.683 अंक बटोरे।
जीत और हार के बीच महज 0.040 अंकों का फासला
खेलों की दुनिया में कई बार जीत और हार का अंतर बेहद सूक्ष्म होता है, और सूरज सिंह के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। उनके इस शानदार प्रदर्शन का अगर बारीकी से विश्लेषण किया जाए, तो जजों ने उन्हें विभिन्न पैमानों पर निम्नलिखित अंक दिए:
- क्वालिटी ऑफ मूवमेंट (Quality of Movement): 5.00 अंक
- डिग्री ऑफ डिफिकल्टी (Degree of Difficulty): 2.00 अंक
- ओवरऑल परफॉर्मेंस (Overall Performance): 2.683 अंक
इस रोमांचक मुकाबले में मकाऊ के खिलाड़ी कुओंग ची हिन ने 9.723 अंक प्राप्त कर स्वर्ण पदक अपने नाम किया, जबकि उनके ही हमवतन ची कुआन सोंग ने 9.720 अंकों के साथ रजत पदक पर कब्जा जमाया। सूरज सिंह कांस्य पदक से महज 0.040 अंकों के अंतर से पीछे रह गए और 11वें स्थान पर रहे। इतने कम अंतर से पदक चूकना भले ही निराशाजनक रहा हो, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय खिलाड़ियों का यह बढ़ता स्तर इस बात का प्रमाण है कि भारत अब कॉम्बैट स्पोर्ट्स और मार्शल आर्ट्स में वैश्विक महाशक्तियों को कड़ी टक्कर देने के लिए पूरी तरह तैयार है।
भविष्य की उम्मीदें और आगे की राह
एशियन गेम्स 2026 का यह शुरुआती सफर भारतीय वुशू दल के लिए बेहद सकारात्मक संकेत लेकर आया है। खिलाड़ियों की यह मेहनत और उनका अटूट आत्मविश्वास इस बात की गारंटी देता है कि आने वाले दिनों में देश को कई और रोमांचक मुकाबले देखने को मिलेंगे। अब पूरा देश आर्यन और रोशिबिना की मैट पर वापसी का इंतजार कर रहा है, ताकि वे क्वार्टर फाइनल की बाधा को पार कर भारत के लिए पदकों का खाता खोल सकें।