पश्चिम एशिया यानी मिडिल-ईस्ट में भू-राजनीतिक उथल-पुथल इस समय चरम पर पहुंच चुकी है। वैश्विक कूटनीति के पटल पर एक बार फिर तनाव के काले बादल मंडराने लगे हैं। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने अमेरिका और उसके प्रमुख सहयोगी इजरायल को एक बेहद कड़ी और दो टूक चेतावनी जारी की है। मौजूदा समय में जब कूटनीतिक चैनल शांति स्थापित करने की कोशिशों में जुटे हैं, वहीं दूसरी ओर ईरान की इस आक्रामक बयानबाजी ने क्षेत्र में किसी बड़े सैन्य टकराव की आशंकाओं को और गहरा कर दिया है।
लंबी लड़ाई के लिए पूरी तरह तैयार है ईरान: IRGC
ईरान के सरकारी मीडिया नेटवर्क्स पर प्रसारित बयानों के मुताबिक, IRGC के शीर्ष कमांडरों ने यह साफ कर दिया है कि तेहरान किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह मुस्तैद है। IRGC के डिप्टी कमांडर-इन-चीफ मेजर जनरल मुस्तफा इजादी ने एक तीखा बयान देते हुए दावा किया है कि ईरान ने पिछले कुछ महीनों में अपनी सैन्य क्षमताओं को अभूतपूर्व रूप से अपग्रेड किया है।
मेजर जनरल इजादी के अनुसार, देश की मिसाइल तकनीक, ड्रोन बेड़े, साइबर वारफेयर यूनिट्स और एयर डिफेंस सिस्टम्स को आधुनिक जरूरतों के हिसाब से बेहद मजबूत किया गया है। ईरान की ओर से यह संदेश बेहद स्पष्ट है कि यदि पश्चिम एशिया में किसी भी प्रकार की आक्रामकता दिखाई जाती है, तो ईरानी सशस्त्र बल उसका माकूल और बेहद कड़ा जवाब देने से पीछे नहीं हटेंगे।
'जंग अभी खत्म नहीं हुई है' - हुसैन मोहेब्बी
ईरान के सरकारी अल-आलम न्यूज नेटवर्क को दिए गए एक विशेष साक्षात्कार में IRGC के सेकंड ब्रिगेडियर जनरल हुसैन मोहेब्बी ने इस बात पर जोर दिया कि मौजूदा संघर्ष के समाप्त होने का अनुमान लगाना एक बड़ी भूल होगी। उनके मुताबिक, युद्ध और भू-राजनीतिक संघर्षों के कई चरण होते हैं और हर चरण की अपनी रणनीति होती है।
"हमारी नजर में यह जंग अभी खत्म नहीं हुई है। हमने खुद को एक लंबे और थका देने वाले संघर्ष के लिए तैयार कर रखा है। यदि हालात दोबारा उग्र होते हैं और शत्रु पक्ष किसी भी दुसाहस का परिचय देता है, तो हम अपनी सरजमीं और संप्रभुता की रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार हैं।" - हुसैन मोहेब्बी, सेकंड ब्रिगेडियर जनरल, IRGC
यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब अंतरराष्ट्रीय समुदाय लगातार क्षेत्र में स्थिरता और युद्धविराम की उम्मीद लगाए बैठा है। लेकिन IRGC के रुख से साफ है कि तेहरान अपनी सैन्य तैयारियों को लेकर किसी भी प्रकार के ढीले रवैये के मूड में नहीं है।
अमेरिका और इजरायल पर लगाया रणनीतिक नाकामी का आरोप
इस उच्च-स्तरीय बयानबाजी के दौरान IRGC के प्रवक्ताओं और वरिष्ठ अधिकारियों ने वॉशिंगटन और तेल अवीव की रणनीतियों पर भी जमकर हमला बोला। उनका दावा है कि अमेरिका, इजरायल और उनके पश्चिमी सहयोगी इस पूरे संघर्ष में अपने घोषित रणनीतिक उद्देश्यों को हासिल करने में बुरी तरह विफल रहे हैं।
ईरानी सैन्य अधिकारियों ने इसे अमेरिका और उसके सहयोगियों की 'ऐतिहासिक और शर्मनाक हार' करार दिया है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि यह बयान पूरी तरह से IRGC का आधिकारिक दावा है और जमीनी स्तर पर इसके स्वतंत्र आंकलन की पुष्टि होना बाकी है, लेकिन इस तरह के बयानों से मनोवैज्ञानिक युद्ध का स्तर जरूर बढ़ गया है।
क्षेत्रीय स्थिरता और विदेशी ताकतों की मौजूदगी
ईरान के सरकारी प्रेस टीवी द्वारा जारी एक अन्य बयान में IRGC ने इस बात पर जोर दिया है कि अमेरिका और इजरायल को देर-सबेर इस क्षेत्र से अपनी सैन्य मौजूदगी पूरी तरह से समाप्त करनी होगी। ईरानी पक्ष का तर्क है कि पश्चिमी देशों की यह सैन्य उपस्थिति ही मिडिल-ईस्ट में लगातार फैल रही अस्थिरता और तनाव का सबसे बड़ा मुख्य कारण है।
सैन्य और कूटनीतिक मोर्चे पर मुख्य बिंदु:
- मिसाइल और ड्रोन क्षमता: IRGC का दावा है कि उसने अपनी स्ट्राइक और डिफेंस क्षमताओं को अत्याधुनिक बना लिया है।
- लंबे युद्ध की रणनीति: ईरान किसी भी त्वरित समाधान की बजाय लंबी अवधि के सैन्य संघर्ष के लिए भी मानसिक और भौतिक रूप से तैयार है।
- क्षेत्रीय दखल का विरोध: ईरान लगातार यह मांग कर रहा है कि विदेशी ताकतों को इस क्षेत्र से अपनी सेनाएं वापस बुलानी चाहिए।
- अस्थिरता के लिए आरोप: तेहरान ने पश्चिमी देशों को क्षेत्रीय तनाव का जिम्मेदार ठहराया है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल बाजारों पर असर
मिडिल-ईस्ट में बढ़ते इस भू-राजनीतिक तनाव का सीधा असर वैश्विक बाजारों पर पड़ना लाजिमी है। खाड़ी देशों के पास दुनिया का एक बड़ा हिस्सा ऊर्जा संसाधनों के रूप में मौजूद है। ऐसे में IRGC और अमेरिका-इजरायल के बीच तनातनी बढ़ने से कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। वैश्विक निवेशक इस स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए हैं, क्योंकि किसी भी प्रकार की सैन्य झड़प सप्लाई चेन को बुरी तरह प्रभावित कर सकती है।
आगे क्या हो सकता है?
फिलहाल कूटनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा तेज हो गई है कि क्या यह बयानबाजी सिर्फ एक मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की रणनीति है या फिर आने वाले दिनों में यह किसी बड़े संघर्ष का पूर्वाभास है। संयुक्त राष्ट्र और अन्य मध्यस्थ देश स्थिति को संभालने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन IRGC के ताजा रुख ने यह स्पष्ट कर दिया है कि पश्चिम एशिया का आसमान अभी भी अनिश्चितता के बादलों से घिरा हुआ है। आने वाले सप्ताह इस बात तय करेंगे कि कूटनीति जीतती है या तनाव का यह नया दौर एक खतरनाक रूप लेता है।