संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के गलियारों में इस वक्त कूटनीतिक सरगर्मी अपने चरम पर है। दुनिया के तमाम ताकतवर देश इस महामंच पर अपने हितों को साधने और वैश्विक संकटों से निपटने के लिए मंथन कर रहे हैं। इसी बीच, भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने न्यूयॉर्क पहुंचते ही एक के बाद एक कई उच्चस्तरीय बैठकें शुरू कर दी हैं। उनकी इन मुलाकातों का मुख्य केंद्र वैश्विक अनिश्चितताओं से निपटना और भारत के रणनीतिक हितों को मजबूती देना है, जिस पर पूरी दुनिया की निगाहें टिकी हुई हैं।
यूएन महासभा के 81वें सत्र में भारत की मजबूत उपस्थिति
विदेश मंत्री एस. जयशंकर न्यूयॉर्क पहुंच चुके हैं, जहां वे संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं। इस बार का यह सत्र कई मायनों में बेहद खास है, क्योंकि दुनिया इस समय कई मोर्चों पर गंभीर भू-राजनीतिक तनावों और आर्थिक अस्थिरता का सामना कर रही है।
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, विदेश मंत्री 26 सितंबर को UNGA के प्रतिष्ठित मंच से जनरल डिबेट को संबोधित करेंगे। इस संबोधन में वैश्विक दक्षिण (Global South) की आवाज को बुलंद करने के साथ-साथ आतंकवाद, जलवायु परिवर्तन और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में सुधार जैसे बड़े मुद्दे छाए रहने की पूरी उम्मीद है।
'पार्टनर्स फॉर मल्टीलेटरलिज्म समिट' में संबोधन
न्यूयॉर्क में अपनी व्यस्त बैठकों के सिलसिले के बीच, विदेश मंत्री ने 'पार्टनर्स फॉर मल्टीलेटरलिज्म समिट' के उद्घाटन समारोह को भी संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने बहुपक्षीय प्रणाली (Multilateralism) को आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत बताया।
सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, 'इस शिखर सम्मेलन में आप सभी के साथ शामिल होना मेरे लिए बहुत खुशी की बात है।' उनका यह संबोधन ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर पारंपरिक संस्थाएं अपनी प्रासंगिकता खोती नजर आ रही हैं और नियमों पर आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था पर लगातार सवाल खड़े हो रहे हैं।
फ्रांस के विदेश मंत्री के साथ अहम द्विपक्षीय बैठक
अपनी कूटनीतिक मुलाकातों की शुरुआत करते हुए डॉ. जयशंकर ने फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बैरोट (Jean-Noel Barrot) के साथ एक बेहद महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक की। भारत और फ्रांस के बीच ऐतिहासिक रूप से घनिष्ठ संबंध रहे हैं, और यह मुलाकात इस पुरानी दोस्ती को और प्रगाढ़ करने की दिशा में एक और बड़ा कदम साबित हुई है।
बैठक के तुरंत बाद विदेश मंत्री ने सोशल मीडिया के जरिए इस मुलाकात की जानकारी साझा की। उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा कि नियमित बैठकों और टेलीफोन पर होने वाली वार्ताओं से दोनों देशों को अपनी 'विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी' की गति को बनाए रखने में जबरदस्त मदद मिलती है।
चर्चा के मुख्य बिंदु: खाड़ी संकट से लेकर यूक्रेन तक
फ्रांसीसी समकक्ष के साथ हुई इस उच्चस्तरीय चर्चा का दायरा काफी व्यापक था। दोनों नेताओं ने वर्तमान समय के सबसे ज्वलंत क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर खुलकर अपने विचार रखे। इस बातचीत के दौरान जिन प्रमुख विषयों पर विशेष जोर दिया गया, वे निम्नलिखित हैं:
- खाड़ी संकट: पश्चिम एशिया और खाड़ी क्षेत्र में लगातार गहराते तनाव और उससे उबरने के संभावित उपायों पर दोनों पक्षों के बीच गंभीर मंथन हुआ।
- यूक्रेन संघर्ष: लंबे समय से चले आ रहे यूक्रेन संकट और इसके वैश्विक आर्थिक व भू-राजनीतिक प्रभावों पर चर्चा की गई।
- संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधार: सुरक्षा परिषद के ढांचे को आज की वास्तविकताओं के अनुकूल ढालने और उसमें स्थायी सदस्यता के विस्तार के बहुपक्षीय मुद्दों पर विचारों का गहरा आदान-प्रदान हुआ।
वैश्विक कूटनीति के केंद्र में भारत
विदेश मंत्री एस. जयशंकर की इन बैठकों से यह साफ जाहिर होता है कि भारत अब केवल वैश्विक मंचों पर एक दर्शक की भूमिका में नहीं है, बल्कि वह दुनिया को दिशा देने वाले फैसलों में सक्रिय रूप से भाग ले रहा है। खाड़ी संकट जैसी जटिल परिस्थितियों के बीच पश्चिमी देशों के साथ भारत का संवाद इस बात का प्रमाण है कि कूटनीतिक संतुलन बनाने में भारत की विशेषज्ञता सर्वोपरि है।
आने वाले दिनों में UNGA के मंच से भारत क्या संदेश देता है और वैश्विक शांति व स्थिरता के लिए कौन से नए रास्ते सुझाए जाते हैं, इस पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी रहेंगी। विदेश मंत्री का यह दौरा निश्चित रूप से भारत की वैश्विक साख को और अधिक ऊंचाई देने का काम कर रहा है।