महाराष्ट्र के धुले जिले के दुर्गम और दूरदराज आदिवासी अंचलों में रहने वाले नागरिकों के लिए अब सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने की मजबूरी खत्म होने जा रही है। प्रशासन ने खुद आदिवासियों के द्वार तक पहुंचने का बीड़ा उठाया है। जिले में इन दिनों 'सेवा संकल्प अभियान' जोर-शोर से चलाया जा रहा है, जिसका मुख्य उद्देश्य शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं को अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक पहुंचाना है। इस पहल के तहत गांवों में 'सेवा चित्ररथ' घूम-घूमकर योजनाओं का प्रचार-प्रसार कर रहा है और मौके पर ही पात्र लाभार्थियों के दस्तावेज तैयार कराए जा रहे हैं।
प्रशासन खुद पहुंचेगा गांव-गांव: जयकुमार रावल के कड़े निर्देश
पालकमंत्री तथा पणन एवं राजशिष्टाचार मंत्री जयकुमार रावल ने इस अभियान को लेकर स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि प्रशासनिक अमला केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित न रहे। उनका साफ कहना है कि 'सेवा संकल्प अभियान' का असर जमीन पर दिखना चाहिए और हर पात्र आदिवासी परिवार तक प्रत्यक्ष लाभ पहुंचना सुनिश्चित किया जाना चाहिए। मंत्री महोदय के अनुसार, आदिवासियों को छोटी-छोटी सुविधाओं के लिए शहरी इलाकों के सरकारी कार्यालयों में न भटकना पड़े, इसके लिए ब्लॉक और गांव स्तर पर ही विशेष शिविरों का जाल बिछाया गया है।
आदिवासी विकास विभाग के अंतर्गत एकात्मिक आदिवासी विकास परियोजना के बैनर तले यह विशेष अभियान 17 सितंबर से शुरू होकर 17 अक्टूबर तक युद्धस्तर पर जारी रहेगा। इस अवधि में यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि कोई भी जरूरतमंद व्यक्ति सरकारी मदद से अछूता न रहे।
पेसा गांवों में घूमेगा 'सेवा चित्ररथ', स्वास्थ्य और नशामुक्ति पर जोर
इस अभियान का सबसे बड़ा आकर्षण 'सेवा चित्ररथ' है, जो जिले के सभी पेसा (PESA) गांवों का दौरा कर रहा है। यह रथ आधुनिक तकनीक और ऑडियो-विजुअल माध्यमों से आदिवासी समुदाय को सरकार की तमाम कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दे रहा है। इसके अलावा, ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ अलख जगाने का काम भी किया जा रहा है।
चित्ररथ के साथ आने वाली टीमें निम्नलिखित प्रमुख सामाजिक मुद्दों पर विशेष जागरूकता अभियान चला रही हैं:
- बाल विवाह जैसी कुप्रथा की रोकथाम के लिए कानूनी प्रावधानों की जानकारी।
- ग्रामीण युवाओं को नशे के जाल से बाहर निकालने के लिए नशामुक्ति अभियान।
- पोषण और मौसमी बीमारियों से बचाव के लिए स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता।
- बच्चों की शिक्षा और नियमित स्कूल जाने की अनिवार्यता पर जोर।
एक ही छत के नीचे मिलेंगे सभी जरूरी दस्तावेज
सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में सबसे बड़ी बाधा दस्तावेजों की कमी होती है। इस समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए तालुका स्तर पर बहु-विभागीय विशेष शिविरों का आयोजन किया जा रहा है। इन शिविरों में राजस्व, स्वास्थ्य, महिला एवं बाल विकास और शिक्षा विभाग आपसी समन्वय के साथ काम कर रहे हैं।
शिविरों में मौके पर ही निम्नलिखित महत्वपूर्ण दस्तावेज और कार्ड उपलब्ध कराए जा रहे हैं:
- आधार कार्ड (नया नामांकन और सुधार)
- राशन कार्ड (नए नाम जोड़ना और संशोधन)
- वैध जाति प्रमाण पत्र
- आयुष्मान भारत स्वास्थ्य कार्ड
- अंत्योदय अन्न योजना कार्ड
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि महिलाओं, विद्यार्थियों, बुजुर्गों और समाज के सबसे वंचित वर्गों की शिकायतों और समस्याओं के समाधान को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।
पारधी समाज और वनपट्टाधारकों पर विशेष फोकस
इस महीने भर चलने वाले अभियान के दौरान समाज के कुछ ऐसे वर्गों को विशेष रूप से लक्षित किया गया है, जो अब तक विकास की मुख्यधारा से थोड़े पीछे छूट गए थे। पारधी समाज के उत्थान के लिए विशेष शिविरों की रूपरेखा तैयार की गई है। इसके साथ ही, वनपट्टाधारकों को उनके कानूनी अधिकार और उससे जुड़ी सरकारी योजनाओं से जोड़ने के लिए युद्धस्तर पर प्रयास जारी हैं ताकि उन्हें कृषि और आजीविका के बेहतर साधन मिल सकें।
संबद्ध विभागों को यह हिदायत दी गई है कि वे व्यक्तिगत रूप से मॉनिटरिंग करें कि प्रत्येक पात्र परिवार को उसका हक मिल रहा है या नहीं। लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर सख्त प्रशासनिक कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है.
रानी दुर्गावती जयंती पर महिला बचत समूहों का महासम्मेलन
आदिवासी महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वावलंबी और आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रशासन ने एक अनोखा रोडमैप तैयार किया है। आगामी 5 अक्टूबर को वीरांगना रानी दुर्गावती की जयंती के पावन अवसर पर एक भव्य आदिवासी महिला बचत समूह सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा।
इस सम्मेलन के जरिए जिले की महिला स्व-सहायता समूहों को विभिन्न व्यावसायिक और वित्तीय योजनाओं से जोड़ा जाएगा। महिलाओं को कम ब्याज पर ऋण, स्वरोजगार के प्रशिक्षण और उनके द्वारा बनाए गए उत्पादों के लिए बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे ताकि वे अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत कर सकें।
आश्रमशालाओं और छात्रावासों में भी गूंजेगी विद्यार्थियों की प्रतिभा
इस अभियान के दायरे में केवल गांव ही नहीं, बल्कि शैक्षणिक संस्थान भी शामिल हैं। सरकारी और अनुदानित आश्रमशालाओं, एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों, नामांकित स्कूलों और सरकारी आदिवासी छात्रावासों में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए निम्नलिखित गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं:
- स्वास्थ्य जांच शिविर: छात्रों के शारीरिक विकास और पोषण स्तर की नियमित जांच।
- सांस्कृतिक व साहित्यिक प्रतियोगिताएं: चित्रकला, वक्तृत्व (स्पीच), रंगोली और निबंध प्रतियोगिताओं के जरिए बच्चों की छिपी हुई प्रतिभा को मंच देना।
- मेरी शाला, मेरी सेवा अभियान: इसके तहत स्कूलों और छात्रावासों में व्यापक स्वच्छता अभियान और पौधरोपण गतिविधियां चलाई जा रही हैं, जिससे बच्चों में पर्यावरण के प्रति प्रेम और जिम्मेदारी की भावना पैदा हो।
धुले जिले में चलाया जा रहा यह 'सेवा संकल्प अभियान' इस बात का प्रमाण है कि यदि प्रशासनिक इच्छाशक्ति मजबूत हो, तो शासन की हर कल्याणकारी योजना बिना किसी बिचौलिए के सीधे जरूरतमंदों के दरवाजे तक पहुंच सकती है। इस पहल से आदिवासी बहुल क्षेत्रों में एक सकारात्मक बदलाव की शुरुआत हो चुकी है।