असम के गोलाघाट जिले से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां कानून के रखवालों की नाक के नीचे से खूंखार कैदियों के फरार होने की घटना ने पूरे प्रशासनिक तंत्र में हड़कंप मचा दिया है। इस सनसनीखेज मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे चौंकाने वाली परतें उघड़ रही हैं। ताजा कड़ी के रूप में पुलिस ने गोलाघाट जिला कारागार की एक महिला चिकित्सक को गिरफ्तार किया है, जिन पर कैदी को भगाने की साजिश में मुख्य भूमिका निभाने का गंभीर आरोप है।
अस्पताल से कैदियों का फरार होना: क्या थी पूरी साजिश?
घटना असम के प्रतिष्ठित शहीद कुशल कोंवर असामरिक अस्पताल की है। इस अस्पताल को इलाज का केंद्र माना जाता है, लेकिन कुछ समय पहले यह अपराधियों के लिए जेल से बाहर निकलने का जरिया बन गया था। पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, तिहरे हत्याकांड जैसे गंभीर मामले का मुख्य आरोपी नजीबुर रहमान सोची-समझी रणनीति के तहत बार-बार खुद को बीमार बताता था।
नजीबुर की इस चाल में कथित तौर पर जिला कारागार की महिला चिकित्सक डॉ. कावेरी कुर्मी ने उसका साथ दिया। आरोप है कि डॉक्टर ने उसे बार-बार इलाज के नाम पर अस्पताल रेफर किया और इस तरह एक ऐसा जाल बुना गया जिसका फायदा उठाकर वह अस्पताल के वार्ड से फरार होने में कामयाब हो गया। पुलिस अब इस बात की गहराई से छानबीन कर रही है कि क्या इस साजिश में और भी लोग शामिल थे।
बुधवार की रात हुई बड़ी कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने अपनी जांच का दायरा बढ़ाया। कड़ियों को आपस में जोड़ने के बाद, बुधवार (9 सितंबर 2026) की रात पुलिस ने डॉक्टर कावेरी कुर्मी को गिरफ्तार कर लिया। इस गिरफ्तारी से स्वास्थ्य और जेल प्रशासन दोनों महकमों में खलबली मच गई है। एक चिकित्सक पर इस तरह के गंभीर आरोप लगना न्याय व्यवस्था पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है।
पहले भी हो चुकी हैं कई गिरफ्तारियां
यह मामला सिर्फ एक डॉक्टर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार कई अन्य लोगों से भी जुड़े हुए हैं। डॉक्टर की गिरफ्तारी से पहले पुलिस इस मामले में कुछ सुरक्षाकर्मियों और अन्य सहयोगियों को भी शिकंजे में ले चुकी है:
- पुलिसकर्मी और होमगार्ड: अस्पताल और जेल की सुरक्षा में तैनात एक पुलिसकर्मी तथा दो होमगार्ड जवानों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है, जिन पर लापरवाही या मिलीभगत का संदेह है।
- अपराधी के परिजन: मुख्य आरोपी नजीबुर रहमान के भाई हिजबुर रहमान को भी पुलिस ने दबोच लिया है, जिससे पूछताछ के जरिए फरार कैदियों के छिपने के ठिकानों का पता लगाया जा रहा है।
किन-किन कैदियों ने दी थी चकमा?
अस्पताल के वार्ड से केवल एक नहीं बल्कि तीन कैदी फरार हुए थे, जिससे पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हुए। फरार होने वालों में:
- नजीबुर रहमान (तिहरे हत्याकांड का मुख्य आरोपी)
- रूपम कलिता
- अजय गोवाला
इन तीनों के एक साथ फरार होने के बाद से ही पुलिस महकमे में नींद उड़ गई है। राज्यभर की पुलिस और खुफिया एजेंसियां इन तीनों की तलाश में लगातार छापेमारी कर रही हैं। असम के विभिन्न हिस्सों में तलाशी अभियान तेजी से चलाया जा रहा है ताकि इन शातिर अपराधियों को दोबारा सलाखों के पीछे पहुंचाया जा सके।
सुरक्षा व्यवस्था और आगे की जांच
इस घटना ने जेल और अस्पताल दोनों की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। प्रशासनिक स्तर पर यह जांच की जा रही है कि आखिर कैसे जेल के अंदर से कैदियों को बिना पुख्ता सुरक्षा के बार-बार बाहर भेजा जा रहा था। स्थानीय नागरिकों और बुद्धजीवियों ने इस घटना पर गहरी चिंता व्यक्त की है और दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की मांग की है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जब तक सभी फरार कैदी पकड़े नहीं जाते और इस षड्यंत्र में शामिल आखिरी शख्स तक हाथ नहीं पहुंचता, तब तक यह अभियान जारी रहेगा। आने वाले दिनों में इस मामले में कुछ और चौंकाने वाले खुलासे होने की पूरी संभावना है।