Breaking
► बंगाल चुनाव से पहले बीजेपी का मेगा प्लान, 263 सदस्यों की जंबो टीम का ऐलान ► बालाघाट में 30 से ज्यादा बच्चों की मौत पर हाई कोर्ट सख्त, अधिकारियों को नोटिस ► ब्रिक्स सम्मेलन 2026: भारत का मास्टरस्ट्रोक, डॉलर को मात देने की तैयारी और रूस-ईरान के साथ बड़े समझौते ► फिलीपींस में समंदर के बीच नाव बनी आग का गोला: 5 की मौत, 87 लापता ► मायावती की शर्त के बाद अशोक सिद्धार्थ का राजनीति से संन्यास, बसपा सुप्रीमो बोलीं- बहुत देर कर दी ► शिवराज सिंह चौहान का छत्तीसगढ़ दौरा: कल सक्ती में 122 करोड़ के विकास कार्यों की सौगात, दो लाख परिवारों को मिलेगा सपनों का आशियाना ► INDW vs BANW सेमीफाइनल आज: टीम इंडिया के सामने पुरानी कसौटी ► छत्तीसगढ़ में जमीन खरीदना हुआ सस्ता, पत्नी के नाम रजिस्ट्री पर मिल रही भारी छूट ► नंदन नीलेकणि और कई दिग्गजों के नाम वोटर लिस्ट से गायब, क्या है SIR और नो-मैपिंग का पूरा मामला? ► मनोज तिवारी की बेटी रीति को मिलती हैं जान से मारने की धमकियां, बिग बॉस में किया चौंकाने वाला खुलासा ► बंगाल चुनाव से पहले बीजेपी का मेगा प्लान, 263 सदस्यों की जंबो टीम का ऐलान ► बालाघाट में 30 से ज्यादा बच्चों की मौत पर हाई कोर्ट सख्त, अधिकारियों को नोटिस ► ब्रिक्स सम्मेलन 2026: भारत का मास्टरस्ट्रोक, डॉलर को मात देने की तैयारी और रूस-ईरान के साथ बड़े समझौते ► फिलीपींस में समंदर के बीच नाव बनी आग का गोला: 5 की मौत, 87 लापता ► मायावती की शर्त के बाद अशोक सिद्धार्थ का राजनीति से संन्यास, बसपा सुप्रीमो बोलीं- बहुत देर कर दी ► शिवराज सिंह चौहान का छत्तीसगढ़ दौरा: कल सक्ती में 122 करोड़ के विकास कार्यों की सौगात, दो लाख परिवारों को मिलेगा सपनों का आशियाना ► INDW vs BANW सेमीफाइनल आज: टीम इंडिया के सामने पुरानी कसौटी ► छत्तीसगढ़ में जमीन खरीदना हुआ सस्ता, पत्नी के नाम रजिस्ट्री पर मिल रही भारी छूट ► नंदन नीलेकणि और कई दिग्गजों के नाम वोटर लिस्ट से गायब, क्या है SIR और नो-मैपिंग का पूरा मामला? ► मनोज तिवारी की बेटी रीति को मिलती हैं जान से मारने की धमकियां, बिग बॉस में किया चौंकाने वाला खुलासा

पंजाब के पूर्व मंत्री भगत चुन्नी लाल का 93 वर्ष की आयु में निधन, राजनीतिक गलियारों में शोक

पंजाब के पूर्व मंत्री भगत चुन्नी लाल का 93 वर्ष की आयु में निधन, राजनीतिक गलियारों में शोक

पंजाब की सियासत से एक बेहद दुखद और हैरान कर देने वाली खबर सामने आ रही है। राज्य के पूर्व कैबिनेट मंत्री और भारतीय जनता पार्टी के दिग्गज नेता भगत चुन्नी लाल अब हमारे बीच नहीं रहे। गुरुवार सुबह जालंधर के बस्ती इलाके स्थित उनके आवास पर उन्होंने अंतिम सांस ली। वह 93 वर्ष के थे। उनके निधन की खबर मिलते ही पंजाब के राजनीतिक गलियारों और सामाजिक क्षेत्रों में शोक की लहर दौड़ गई है।

सियालकोट से लेकर जालंधर तक का संघर्षपूर्ण सफर

भगत चुन्नी लाल का जीवन संघर्ष और उपलब्धियों की एक लंबी दास्तान रहा है। उनका जन्म 1 दिसंबर 1932 को सियालकोट (जो अब पाकिस्तान का हिस्सा है) में हुआ था। देश के विभाजन के वक्त पैदा हुए दर्दनाक हालातों के बीच उनका परिवार सब कुछ छोड़कर भारत आ गया और पंजाब के जालंधर शहर में आकर बस गया।

राजनीति की दुनिया में कदम रखने से पहले भगत चुन्नी लाल ने अपनी आजीविका के लिए कारोबार का रास्ता चुना था। वह स्पोर्ट्स गुड्स के व्यवसाय से जुड़े हुए थे और खेलकूद का सामान विदेशों में निर्यात (एक्सपोर्ट) करने का काम करते थे। अपने बिजनेस को सफलतापूर्वक संभालने के साथ-साथ उन्होंने जनसेवा और राजनीति में गहरी रुचि लेनी शुरू की, जो आगे चलकर उनके जीवन का मुख्य उद्देश्य बन गया।

निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में की थी चुनावी राजनीति की शुरुआत

भगत चुन्नी लाल ने वर्ष 1985 में सक्रिय चुनावी राजनीति में प्रवेश किया। उन्होंने सबसे पहले जालंधर दक्षिण विधानसभा क्षेत्र से एक निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा था। हालांकि, पहले प्रयास में उन्हें सफलता हासिल नहीं हुई, लेकिन जनता के बीच उनकी पैठ मजबूत होती चली गई।

इस शुरुआती हार से निराश होने के बजाय उन्होंने अपनी राजनीतिक दिशा को और स्पष्ट किया और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का दामन थाम लिया। भाजपा में शामिल होने के बाद उन्होंने पार्टी की विचारधारा को जन-जन तक पहुंचाया और संगठन को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई।

तीन दशक का लंबा और सफल राजनीतिक सफर

वर्ष 1997 का साल भगत चुन्नी लाल के राजनीतिक जीवन का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। उन्होंने भाजपा के टिकट पर जालंधर दक्षिण विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा और शानदार जीत दर्ज कर पहली बार पंजाब विधानसभा पहुंचे। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा।

वर्ष 2007 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने एक बार फिर इसी सीट से दमदार जीत हासिल की। बाद में निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन (Delimitation) के बाद जालंधर दक्षिण सीट का स्वरूप बदल गया और नई 'जालंधर पश्चिम' विधानसभा सीट अस्तित्व में आई। वर्ष 2012 के विधानसभा चुनावों में उन्होंने नए क्षेत्र जालंधर पश्चिम से भाजपा उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतरकर जीत का परचम लहराया। यह उनके राजनीतिक जीवन की तीसरी बड़ी विधानसभा जीत थी।

महत्वपूर्ण विभाग और डिप्टी स्पीकर की जिम्मेदारी

भगत चुन्नी लाल की राजनीतिक सूझबूझ और वरिष्ठता को देखते हुए उन्हें पार्टी और सरकार में कई बड़े पदों की जिम्मेदारी सौंपी गई। वर्ष 2011 में तत्कालीन विधानसभा उपाध्यक्ष सतपाल गोसाईं के इस्तीफे के बाद उन्हें पंजाब विधानसभा का डिप्टी स्पीकर चुना गया, जिस पद पर उन्होंने अपनी निष्पक्षता और कार्यकुशलता का परिचय दिया।

इसके पश्चात, वर्ष 2012 से 2017 तक प्रकाश सिंह बादल के नेतृत्व वाली अकाली-भाजपा गठबंधन सरकार में उन्हें कैबिनेट मंत्री बनाया गया। इस दौरान उन्होंने बेहद महत्वपूर्ण विभागों की कमान संभाली, जिनमें प्रमुख रूप से शामिल थे:

  • स्थानीय निकाय विभाग (Local Government)
  • चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान (Medical Education and Research)
  • श्रम विभाग (Labour Department)
  • वन एवं वन्यजीव विभाग (Forests and Wildlife)

इसके अतिरिक्त, वह वर्ष 2012 से 2017 तक पंजाब विधानसभा में भाजपा विधायक दल के नेता भी रहे, जिससे पार्टी के भीतर उनका रसूख और कद साफ झलकता था।

वर्ष 2017 में चुनावी राजनीति से लिया था संन्यास

लगभग तीन दशकों तक पंजाब की सक्रिय राजनीति में अपनी अमिट छाप छोड़ने के बाद, भगत चुन्नी लाल ने वर्ष 2017 में बढ़ती उम्र और स्वास्थ्य कारणों के चलते चुनावी राजनीति से संन्यास लेने का ऐतिहासिक फैसला किया। उन्होंने उस वर्ष विधानसभा चुनाव न लड़ने का ऐलान किया और नई पीढ़ी के लिए मार्ग प्रशस्त किया। हालांकि, पार्टी के भीतर और क्षेत्र के लोगों के बीच उनका मार्गदर्शन लगातार बना रहा।

वर्तमान में उनके परिवार की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाते हुए उनके बेटे मोहिंद्र भगत पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार में कैबिनेट मंत्री के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। भगत चुन्नी लाल के परिवार में चार बेटे और चार बेटियां हैं, जबकि उनकी पत्नी शीला देवी का पहले ही देहांत हो चुका है।अंतिम संस्कार और नेताओं द्वारा शोक संदेश

प्राप्त जानकारी के अनुसार, दिवंगत नेता का अंतिम संस्कार गुरुवार शाम करीब 5 बजे जालंधर के प्रसिद्ध बस्ती शेख श्मशान घाट पर राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा। उनके निधन पर भाजपा नेता शीतल अंगुराल सहित राज्य के तमाम दिग्गज नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों ने गहरा शोक व्यक्त किया है। सभी ने उनके निधन को पंजाब की राजनीति के लिए एक अपूरणीय क्षति बताया है, जिसकी भरपाई करना बेहद कठिन होगा।

About the Author

अनुराधा दुबे

अनुराधा दुबे

Content Writer (देश खबरें)

अनुराधा दुबे एक समर्पित और अनुभवी कंटेंट राइटर हैं, जो भारत से जुड़ी राजनीतिक, सामाजिक और नीतिगत खबरों को गहराई से समझकर पाठकों तक पहुंचाती हैं। उन...

Read More