उत्तराखंड के चारधाम में शुमार पवित्र बदरीनाथ धाम एक बार फिर से सुर्खियों के घेरे में है। इस बार चर्चा का विषय कोई धार्मिक अनुष्ठान या यात्रा व्यवस्था नहीं, बल्कि धाम में 'शंख' बजाए जाने और डीजे के इस्तेमाल को लेकर छिड़ा एक नया सियासी और वैचारिक संग्राम है। राज्य सरकार के वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज के एक बयान ने धार्मिक और राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है, जिसके बाद विपक्ष ने सरकार पर सीधा हमला बोल दिया है।
क्या है पूरा मामला और सतपाल महाराज का बयान?
हाल ही में बदरीनाथ धाम के भीतर सांस्कृतिक कार्यक्रमों और डीजे के कथित इस्तेमाल को लेकर सोशल मीडिया और अन्य मंचों पर तरह-तरह की चर्चाएं चल रही थीं। इसी पर सफाई देते हुए कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने एक बयान दिया था। उन्होंने स्पष्ट किया था कि धाम के अंदर संगीत, नृत्य या सांस्कृतिक कार्यक्रमों पर पूर्ण प्रतिबंध जैसी खबरें सरासर गलत और अफवाह हैं। हालांकि, अपने इस स्पष्टीकरण के दौरान उन्होंने एक ऐसी बात कह दी जिस पर अब बड़ा विवाद खड़ा हो गया है।
सतपाल महाराज ने अपने बयान में कहा था कि बदरीनाथ धाम के अंदर शंख नहीं बजाया जाता है, क्योंकि ऐसी मान्यता है कि 'शंख में जानवर की हड्डी होती है।' उनके इस बयान के सामने आते ही धार्मिक और राजनीतिक हलकों में बहस छिड़ गई कि क्या सनातन परंपराओं में इस्तेमाल होने वाले शंख को लेकर इस तरह की टिप्पणी उचित है।
कांग्रेस नेता सूर्यकांत धस्माना ने किया तीखा पलटवार
कैबिनेट मंत्री के इस बयान के बाद कांग्रेस पार्टी आक्रामक मुद्रा में आ गई है। प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने मंत्री के बयान पर कड़ी आपत्ति जताते हुए एक विस्तृत बयान जारी किया है। धस्माना ने वैज्ञानिक और धार्मिक दोनों ही पहलुओं का हवाला देते हुए सतपाल महाराज के बयान को तथ्यात्मक रूप से गलत करार दिया है।
सूर्यकांत धस्माना ने कहा, 'शंख कोई हड्डी नहीं है, बल्कि यह समुद्र में पाए जाने वाले घोंघे जैसे एक नरम जीव का कैल्शियम कार्बोनेट से बना हुआ प्राकृतिक बाहरी खोल (Exoskeleton) होता है। सनातन परंपरा और संस्कृति में शंख का अत्यंत पवित्र और विशेष धार्मिक महत्व है। देश के हर मंदिर में पूजा-अर्चना के दौरान शंख बजाने की प्राचीन परंपरा रही है।'
धार्मिक मर्यादा और पर्यावरणीय चिंताओं पर उठे सवाल
कांग्रेस नेता ने केवल शंख वाले बयान पर ही आपत्ति नहीं जताई, बल्कि संवेदनशील हिमालयी क्षेत्रों में हो रही गतिविधियों पर भी सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार संवेदनशील हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र और धाम की धार्मिक मर्यादा की अनदेखी कर रही है।
कांग्रेस की प्रमुख मांगें:
- कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज अपने इस बयान के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगें।
- प्रदेश के मुख्यमंत्री इस पूरे मामले में आगे आकर सरकार का आधिकारिक पक्ष स्पष्ट करें।
- हिमालयी क्षेत्रों की पवित्रता और पर्यावरण से खिलवाड़ करने वाली गतिविधियों पर लगाम लगाई जाए।
मुरली मनोहर जोशी की नाराजगी और डीजे विवाद
- उल्लेखनीय है कि बदरीनाथ धाम में सांस्कृतिक कार्यक्रमों और डीजे बजाए जाने को लेकर पहले से ही वरिष्ठ नेता और भाजपा के दिग्गज मुरली मनोहर जोशी तीखी नाराजगी जता चुके हैं। उन्होंने इसे धाम की पवित्रता पर सीधा आघात करार दिया था। इसके अलावा, जिला प्रशासन ने भी इस मामले का संज्ञान लेते हुए सेना को नोटिस जारी कर कमांडिंग ऑफिसर से स्पष्टीकरण मांगा था।
- अब जबकि शंख को लेकर कैबिनेट मंत्री का नया बयान सामने आया है, तो इस पूरे प्रकरण ने एक गंभीर राजनीतिक और वैचारिक रूप ले लिया है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इस विवाद पर किस तरह से अपना बचाव करती है और क्या मंत्री अपने बयान पर कोई सफाई पेश करते हैं।