बस्तर संभाग के दूरदराज और अंदरूनी इलाकों में रहने वाले दिव्यांगजनों के जीवन में एक नई रोशनी लाने की दिशा में प्रशासन ने कमर कस ली है। इसी कड़ी में आगामी अक्टूबर माह के दौरान छत्तीसगढ़ के जगदलपुर और दंतेवाड़ा जिला मुख्यालयों में वृहद स्तर पर विशेष शिविरों का आयोजन होने जा रहा है। इन शिविरों का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र के दिव्यांगजनों को सामाजिक और आर्थिक रूप से संबल प्रदान करना तथा उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा की विशेष पहल
राज्य के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा की विशेष पहल पर आयोजित होने वाले इन मानवीय शिविरों को बेहद करीने से रूपरेखाबद्ध किया गया है। इन शिविरों को सफल बनाने के लिए देश और दुनिया भर में अपनी मानव सेवा के लिए मशहूर 'भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति (जयपुर)' का महत्वपूर्ण तकनीकी सहयोग प्राप्त हो रहा है। समिति के विशेषज्ञ इन शिविरों में अपनी सेवाएं देंगे ताकि संभाग के अधिक से अधिक जरूरतमंदों को उच्च गुणवत्ता वाले कृत्रिम अंग और सहायक उपकरण मिल सकें।
आयोजन की तैयारियों का जायजा लेने के लिए कमिश्नर डोमन सिंह ने हाल ही में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक ली। इस बैठक में संभाग के सभी जिलों के अपर कलेक्टरों और समाज कल्याण विभाग के उप संचालकों ने हिस्सा लिया। कमिश्नर ने कड़े निर्देश दिए हैं कि प्रशासनिक अमले का पूरा जोर इस बात पर होना चाहिए कि बस्तर के अंतिम छोर और पहुंच-विहीन इलाकों में बैठे पात्र हितग्राहियों तक इस योजना की सटीक जानकारी और लाभ पहुंचे। बैठक में उपायुक्त गीता रायस्त, डिप्टी कलेक्टर सत्येन्द्र बंजारे और समाज कल्याण विभाग की उप संचालक सुचिता लकड़ा सहित कई प्रमुख अधिकारी मौजूद रहे।
शिविरों की तिथियां और संभागवार कार्ययोजना
प्रशासन द्वारा जारी की गई कार्ययोजना के मुताबिक, बस्तर संभाग को दो हिस्सों में बांटकर इन शिविरों का संचालन किया जाएगा, जिससे भीड़ को नियंत्रित किया जा सके और हर एक हितग्राही पर व्यक्तिगत ध्यान दिया जा सके:
- पहला शिविर (जगदलपुर): यह शिविर 5 से 7 अक्टूबर 2026 तक जिला मुख्यालय जगदलपुर में आयोजित किया जाएगा। इसके अंतर्गत बस्तर, कोंडागांव, नारायणपुर और कांकेर जिले के दिव्यांगजन लाभान्वित होंगे।
- दूसरा शिविर (दंतेवाड़ा): यह शिविर 15 से 17 अक्टूबर 2026 तक जिला मुख्यालय दंतेवाड़ा में लगाया जाएगा। इस शिविर में दंतेवाड़ा, सुकमा और बीजापुर जिले के हितग्राहियों को शामिल किया जाएगा।
इन आधुनिक उपकरणों का होगा निःशुल्क वितरण
इन शिविरों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहाँ आने वाले दिव्यांगजनों को लंबी प्रतीक्षा नहीं करनी होगी। स्पॉट पर ही जरूरत के मुताबिक कृत्रिम अंगों का नाप लिया जाएगा और तकनीक का इस्तेमाल करते हुए उसी दिन सामग्री तैयार कर हितग्राहियों को सौंप दी जाएगी। इसके अलावा, जिन लोगों के पुराने या क्षतिग्रस्त कृत्रिम अंग हैं, उनकी मरम्मत की सुविधा भी शिविर स्थल पर ही उपलब्ध रहेगी।
शिविर के माध्यम से बांटे जाने वाले प्रमुख उपकरणों में शामिल हैं:
- कैलिपर्स और विशेष ट्राइसाइकिल
- कृत्रिम हाथ और पैर
- आधुनिक श्रवण यंत्र (हियरिंग एड)
- व्हीलचेयर, वॉकर और बैसाखी
- वॉकिंग स्टिक व अन्य जीवन को सुगम बनाने वाले उपकरण
मैदानी स्तर पर युद्ध स्तर पर चल रहा है सर्वे
योजना को शत-प्रतिशत जमीन पर उतारने के लिए मैदानी अमले को हर ग्राम पंचायत और नगरीय निकाय के वार्डों में विशेष पंजी संधारित करने के निर्देश दिए गए हैं। इस पंजी में सभी चिन्हांकित हितग्राहियों का पूरा ब्यौरा दर्ज किया जा रहा है। प्रशासन द्वारा तय समय सीमा के भीतर सूचियां तैयार कराई जा रही हैं, जिसके तहत प्रारंभिक रिपोर्ट 10 सितंबर और अंतिम संकलित प्रपत्र 15 सितंबर तक संभाग मुख्यालय को अनिवार्य रूप से सौंपे जाने का निर्देश है।
दिव्यांगजनों और सहायकों के लिए विशेष सुविधाएं
सुदूर अंचलों से आने वाले दिव्यांगजनों और उनके साथ आने वाले सहायकों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं। शिविर स्थल पर उनके ठहरने के लिए विश्राम कक्ष, शुद्ध पेयजल, स्वास्थ्य परीक्षण की सुविधाएं और निःशुल्क भोजन व परिवहन की मुकम्मल व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है। बस्तर प्रशासन की यह पहल क्षेत्र के दिव्यांग भाई-बहनों के जीवन में एक नया सवेरा लेकर आने वाली है, जिससे वे बिना किसी बाधा के समाज की मुख्यधारा से जुड़ सकेंगे।