छत्तीसगढ़ के भिलाई शहर में विकास और जनहित के बीच एक नया पेंच फंसता नजर आ रहा है। भिलाई के व्यस्ततम इलाकों में शुमार सुपेला चौक से गदा चौक तक बनने वाले प्रस्तावित फ्लाईओवर को लेकर अभी ईंट भी नहीं रखी गई है, लेकिन सियासत और कारोबारियों की चिंताएं जरूर परवान चढ़ने लगी हैं। करीब एक किलोमीटर लंबे इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट के खिलाफ स्थानीय व्यापारी खुलकर सामने आ चुके हैं। व्यापारियों की इस नाराजगी ने प्रशासनिक हलकों में भी हलचल तेज कर दी है।
हाल ही में क्षेत्र के सैकड़ों व्यापारियों और स्थानीय नागरिकों ने दुर्ग लोकसभा सांसद विजय बघेल से मुलाकात कर एक ज्ञापन सौंपा। इस दौरान व्यापारियों ने दो टूक शब्दों में कहा कि यदि इस परियोजना पर समय रहते पुनर्विचार नहीं किया गया, तो इसका सीधा असर करीब 500 छोटे-बड़े कारोबारियों की रोजी-रोटी पर पड़ेगा। आइए जानते हैं कि आखिर इस फ्लाईओवर को लेकर इतना विरोध क्यों हो रहा है और इसके पीछे की असल वजहें क्या हैं।
मिट्टी की जांच से शुरू हुआ विवाद
सुपेला-गदा चौक के बीच यातायात को सुगम बनाने के लिए इस फ्लाईओवर की रूपरेखा तैयार की गई है। फिलहाल, इस प्रोजेक्ट के शुरुआती चरण के तहत जमीन पर मिट्टी की जांच (Soil Testing) का काम शुरू किया गया है। इसके बाद डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) और लागत का एस्टीमेट तैयार कर शासन के पास मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। बजट स्वीकृत होने के बाद ही निर्माण कार्य का श्रीगणेश होना है। लेकिन, निर्माण की ईंट रखने से पहले ही आपत्तियों का दौर शुरू हो जाना इस बात का संकेत है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा और तूल पकड़ सकता है।
व्यापारियों की धड़कनें क्यों बढ़ गईं?
गणेश मार्केट, सुपेला व्यापारी संघ और होलसेल होजियरी रेडीमेड एंड क्लॉथ मर्चेंट एसोसिएशन से जुड़े व्यापारियों का तर्क है कि जिस रूट पर यह फ्लाईओवर प्रस्तावित है, वह भिलाई का सबसे जीवंत और महत्वपूर्ण व्यावसायिक केंद्र है। वर्तमान में इस सड़क की चौड़ाई लगभग 100 से 150 फीट है। व्यापारियों का कहना है कि इस चौड़ी सड़क पर फिलहाल ट्रैफिक का दबाव उतना गंभीर नहीं है कि जिसके लिए सीधे एक किलोमीटर लंबे फ्लाईओवर का निर्माण अनिवार्य हो जाए।
व्यापारियों की मुख्य आशंकाएं निम्नलिखित हैं:
- कारोबार पर संकट: फ्लाईओवर के पिलर खड़े होने और निर्माण के लंबे दौर से लगभग 500 व्यापारियों का व्यापार ठप होने की कगार पर आ जाएगा। ग्राहकों का आना-जाना बाधित होगा।
- पार्किंग और सर्विस रोड की समस्या: निर्माण के बाद दुकानों के सामने स्पेस कम हो जाएगा, जिससे सर्विस रोड पर भयंकर पार्किंग और ट्रैफिक जाम की स्थिति बन सकती है।
- आर्थिक नुकसान: दुकानदारों का कहना है कि फेस्टिव सीजन या सामान्य दिनों में भी उनके टर्नओवर पर इसका गहरा नकारात्मक असर पड़ेगा।
सांसद विजय बघेल के सामने रखी गई ये मांगें
व्यापारियों के प्रतिनिधिमंडल ने सांसद विजय बघेल को साफ-साफ बताया कि वे किसी भी विकास कार्य या प्रगति के विरोधी कतई नहीं हैं। वे चाहते हैं कि शहर का विकास हो, लेकिन वह वैज्ञानिक और व्यावहारिक होना चाहिए। व्यापारियों ने सांसद के समक्ष कुछ गंभीर और तार्किक मांगें रखी हैं:
- वैज्ञानिक ट्रैफिक सर्वे: इस बात का आकलन किया जाए कि क्या सचमुच यहां फ्लाईओवर ही एकमात्र और स्थायी समाधान है।
- पारदर्शी जनसुनवाई: परियोजना की डीपीआर, लागत और ट्रैफिक सर्वे रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाए और प्रभावित नागरिकों के साथ खुली जनसुनवाई हो।
- वैकल्पिक व्यवस्था: निर्माण के दौरान धूल, प्रदूषण, दुर्घटना के जोखिम और यातायात अवरोध से निपटने के लिए क्या कोई ठोस वैकल्पिक प्लान तैयार किया गया है? इसकी जानकारी दी जाए।
"हम विकास के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन विकास ऐसा होना चाहिए जो जनता और व्यापारियों के गले की फांस न बने। फ्लाईओवर की उपयोगिता और इसके नफे-नुकसान का अध्ययन किए बिना काम शुरू करना सैकड़ों परिवारों के साथ अन्याय होगा।" - स्थानीय व्यापारी प्रतिनिधि
अधिकारियों को दिए गए पुनर्विचार के निर्देश
व्यापारियों का पक्ष सुनने के बाद सांसद विजय बघेल ने स्थिति की गंभीरता को समझा। उन्होंने मौके पर मौजूद अधिकारियों और संबंधित विभागों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे व्यापारियों की आपत्तियों को नजरअंदाज न करें। सांसद ने परियोजना के तमाम पहलुओं पर नए सिरे से समीक्षा करने और एक व्यावहारिक रिपोर्ट तैयार करने को कहा है, जिससे व्यापारियों और आम जनता के हितों पर कुठाराघात न हो।
भिलाई का यह सुपेला-गदा चौक फ्लाईओवर आने वाले दिनों में एक बड़ा प्रशासनिक और राजनीतिक मुद्दा बनता दिख रहा है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन व्यापारियों के इन तर्कों पर क्या रुख अपनाता है और क्या बिना किसी विरोध के इस प्रोजेक्ट का रास्ता साफ हो पाता है या इसमें अभी और अड़चनें आएंगी।
