बिहार की राजनीति से एक बड़ी और सनसनीखेज खबर सामने आ रही है। कभी सत्ता के गलियारों में रसूख रखने वाले और जनता का प्रतिनिधित्व करने वाले एक पूर्व विधायक पर अब कानून का शिकंजा कसता चला जा रहा है। मामला गंभीर है और पुलिस प्रशासन ने उन तक पहुंचने के लिए अब इनाम की घोषणा कर दी है।
जमीन धोखाधड़ी के मामले में फरार पूर्व विधायक पर बड़ा एक्शन
बिहारशरीफ विधानसभा सीट से राजद के टिकट पर विधायक रह चुके सैयद नौशादुन नबी उर्फ पप्पू खां की मुश्किलें इन दिनों चरम पर हैं। जमीन धोखाधड़ी और जालसाजी से जुड़े एक संगीन मामले में करीब पांच महीने से फरार चल रहे इस पूर्व विधायक की गिरफ्तारी के लिए अब पुलिस मुख्यालय ने 25,000 रुपये के इनाम का ऐलान किया है। हैरानी की बात यह है कि इस पूरे विवादित मामले में अकेली उनकी ही नहीं, बल्कि उनकी पत्नी आफरीन सुल्ताना की भी संलिप्तता बताई जा रही है, जो फिलहाल पुलिस की पकड़ से बाहर हैं।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, यह पूरा मामला वेना थाना क्षेत्र से जुड़ा हुआ है। पूर्व विधायक और उनकी पत्नी के खिलाफ फर्जी दस्तावेज तैयार कर जमीन हड़पने और जालसाजी करने की धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि आरोपियों ने कागजों में हेराफेरी कर एक बेशकीमती जमीन का फर्जीवाड़ा किया और बाद उस पर अवैध कब्जा जमाने की कोशिश की। बात यहीं खत्म नहीं होती, बल्कि शिकायतकर्ता ने यह भी गंभीर आरोप लगाया है कि जमीन के बदले उनसे एक करोड़ रुपये की रंगदारी या मांग की गई थी।
पुलिस की ताबड़तोड़ छापेमारी और तलाश जारी
कानून के लंबे हाथों से बचने के लिए पूर्व विधायक और उनकी पत्नी लगातार भूमिगत चल रहे हैं। पुलिस उनकी तलाश में कोई कसर नहीं छोड़ रही है। कुछ समय पहले यानी 23 अप्रैल को पुलिस प्रशासन ने बड़ा कदम उठाते हुए डीएसपी संजय कुमार जायसवाल के नेतृत्व में एक विशेष पुलिस टीम का गठन किया था। इस टीम ने पप्पू खां के आधिकारिक और संभावित ठिकानों पर जोरदार छापेमारी की थी। हालांकि, पुलिस के पहुंचने से पहले ही वे वहां से खिसक चुके थे, जिसके बाद से पुलिस लगातार दबिश बनाए हुए है।
क्या है पूरा जमीन विवाद? समझिए परत-दर-परत
यह पूरा कानूनी पेंच जमीन के मालिकाना हक को लेकर फंसा है। प्राप्त जानकारी के मुताबिक, विवादित जमीन को मूल शिकायतकर्ता ने वर्ष 2021 में बनारसी प्रसाद नाम के व्यक्ति से खरीदा था। इसके बाद आरोप है कि इसी जमीन के दस्तावेजों में हेराफेरी कर वर्ष 2022 में इसे दोबारा आफरीन सुल्ताना के नाम पर रजिस्टर करवा लिया गया।
शिकायतकर्ता का दावा है कि रजिस्ट्री में जिन कागजातों का इस्तेमाल किया गया, वे पूरी तरह से फर्जी और मनगढ़ंत थे। इन दस्तावेजों के आधार पर ही जमीन पर जबरन कब्जा जमाने की कोशिश की गई। इस मामले को लेकर स्थानीय अदालत में दीवानी मुकदमा भी चल रहा है। पुलिस की प्रारंभिक और तकनीकी जांच के बाद जब धोखाधड़ी के साक्ष्य पुख्ता हुए, तब जाकर आगे की कानूनी कार्रवाई को हरी झंडी मिली और वर्ष 2026 में इनकी गिरफ्तारी के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है।
राजनीतिक सफर और रसूखदार पृष्ठभूमि
सैयद नौशादुन नबी उर्फ पप्पू खां का राजनीतिक सफर काफी लंबा और उतार-चढ़ाव भरा रहा है। उन्होंने वर्ष 2000 के विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के टिकट पर शानदार जीत हासिल की थी और बिहारशरीफ विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हुए सदन पहुंचे थे। इसके बाद वर्ष 2005 में हुए फरवरी और अक्टूबर दोनों ही विधानसभा चुनावों में उन्होंने राजद के उम्मीदवार के तौर पर अपनी किस्मत आजमाई, लेकिन इस बार उन्हें बीजेपी के कद्दावर नेता डॉ. सुनील कुमार के हाथों शिकस्त का सामना करना पड़ा था।
चुनावी मैदान में सक्रिय रहीं पत्नी आफरीन सुल्ताना
सिर्फ पप्पू खां ही नहीं, बल्कि उनकी पत्नी आफरीन सुल्ताना भी बिहारशरीफ की सक्रिय राजनीति का हिस्सा रही हैं। उन्होंने साल 2010 के विधानसभा चुनाव में राजद के टिकट पर चुनाव लड़ा था और दूसरे स्थान पर रहकर अपनी राजनीतिक ताकत का अहसास कराया था। इसके बाद समय के साथ सियासी समीकरण बदले और वर्ष 2015 में उन्होंने जन अधिकार पार्टी (लोकतांत्रिक) के बैनर तले चुनाव लड़ा, जिसमें वे तीसरे स्थान पर रहीं।
सिलसिला यहीं नहीं रुका, बल्कि वर्ष 2020 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने किसी दल के बजाय निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में ताल ठोकी और एक बार फिर तीसरे पायदान पर रहीं। हाल के राजनीतिक घटनाक्रमों की बात करें तो, वर्ष 2025 के विधानसभा चुनाव के दौरान जब उन्हें राजद से पार्टी का टिकट नहीं मिला, तो उन्होंने बागी तेवर अपनाते हुए राजद से दूरी बना ली और जदयू के पक्ष में चुनाव प्रचार किया था। हालांकि, उन्होंने आधिकारिक रूप से कभी जदयू की सदस्यता ग्रहण नहीं की थी।
अब आगे क्या होगी कार्रवाई?
एक वक्त पर जनता के बीच जाकर कानून बनाने वाले और उनकी नुमाइंदगी करने वाले पूर्व विधायक पर आज खुद कानून के शिकंजे से भागने का आरोप है। 25 हजार रुपये का इनाम घोषित होने के बाद अब पुलिस और अधिक आक्रामक रुख अपना रही है। गुप्तचर तंत्र को सक्रिय कर दिया गया है ताकि जल्द से जल्द पप्पू खां और उनकी पत्नी को गिरफ्तार कर न्यायालय के समक्ष पेश किया जा सके। इस हाई-प्रोफाइल मामले ने एक बार फिर बिहार की राजनीति और अपराध के गलियारों में हलचल मचा दी है।