वाराणसी-रांची-गया-कोलकाता सिक्सलेन एक्सप्रेस-वे से बिहार के चार प्रमुख जिलों—कैमूर, रोहतास, औरंगाबाद और गया—को आधुनिक सड़क संपर्क मिलने जा रहा है। करीब 35 हजार करोड़ रुपये की इस महत्वाकांक्षी परियोजना से उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल के बीच आवागमन और व्यापारिक गतिविधियों को नई गति मिलने की उम्मीद है।
बिहार में सड़क बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए कई बड़ी परियोजनाओं पर तेजी से काम चल रहा है। इसी कड़ी में वाराणसी-रांची-गया-कोलकाता सिक्सलेन एक्सप्रेस-वे को बेहद अहम माना जा रहा है। इस परियोजना की कुल लंबाई लगभग 672 किलोमीटर है, जो उत्तर प्रदेश के वाराणसी से शुरू होकर बिहार और झारखंड के रास्ते पश्चिम बंगाल तक जाएगी। इस संपूर्ण परियोजना का लगभग 162 किलोमीटर हिस्सा अकेले बिहार राज्य के हिस्से में आता है, जिससे दक्षिण-पश्चिमी बिहार की दूसरे पड़ोसी राज्यों से कनेक्टिविटी काफी बेहतर हो जाएगी।
विभिन्न जिलों को मिलने वाले लाभ और कार्य प्रगति
परियोजना से जुड़े विवरण के अनुसार, गया जिले के इमामगंज प्रखंड के अंतर्गत चपरी गांव के पास भी एक्सप्रेस-वे का निर्माण कार्य चल रहा है। आधिकारिक तौर पर इस परियोजना के बिहार वाले हिस्से को मार्च 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। हालांकि, निर्माण की वास्तविक गति और अलग-अलग सिविल पैकेजों की स्थिति के आधार पर समय-सीमा में फेरबदल भी संभव है।
कैमूर जिले में इस एक्सप्रेस-वे के बनने से आंतरिक और बाहरी सड़क संपर्क मजबूत होगा, जिससे स्थानीय निवासियों और व्यापारियों को दूसरे जिलों तथा राज्यों तक पहुंचने में आसानी होगी। रोहतास जिले के लिए भी यह परियोजना व्यापारिक और आवागमन के लिहाज से मील का पत्थर साबित हो सकती है। औरंगाबाद में सड़क संपर्क बेहतर होने से माल परिवहन में लगने वाले समय की बचत होगी और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा। इसके अलावा, गया जिले और विशेषकर इमामगंज क्षेत्र के लिए यह मार्ग अत्यंत महत्वपूर्ण है, जिससे धार्मिक और पर्यटन संबंधी गतिविधियों को भी अप्रत्यक्ष रूप से गति मिल सकती है।
सफर के समय में आएगी उल्लेखनीय कमी
इस सिक्सलेन एक्सप्रेस-वे के निर्माण से लंबी दूरी की यात्रा करने वाले यात्रियों और माल ढुलाई से जुड़े ट्रांसपोर्टर्स को भारी राहत मिलने की संभावना है। वर्तमान स्थिति में गयाजी से सड़क मार्ग द्वारा कोलकाता पहुंचने में लगभग 7 से 9 घंटे का समय लगता है, जो एक्सप्रेस-वे के शुरू होने के बाद घटकर मात्र करीब 4 घंटे रह जाने का अनुमान है। हालांकि, वास्तविक यात्रा का समय एंट्री-एग्जिट पॉइंट्स, ट्रैफिक की स्थिति और वाहन की गति पर भी निर्भर करेगा।
इसी प्रकार, वाराणसी से कोलकाता के बीच मौजूदा समय में सड़क मार्ग से सफर करने में 10 से 12 घंटे तक का वक्त लग सकता है। परियोजना के पूर्ण होने के बाद इस दूरी को तय करने में केवल 5 से 6 घंटे लगने का अनुमान जताया गया है। इन सभी समय-सीमाओं और दावों की वास्तविक परख परियोजना के पूर्ण संचालन के बाद ही संभव हो सकेगी।
व्यापार और परिवहन पर असर
इस सिक्सलेन एक्सप्रेस-वे के जरिए लंबी दूरी के व्यावसायिक वाहनों को एक तेज, निर्बाध और सुगम गलियारा मिलने की उम्मीद है, जिससे माल ढुलाई की लागत में कमी आ सकती है। इसके निर्माण से राष्ट्रीय राजमार्ग-19 (NH-19) पर गाड़ियों का दबाव भी कम होने की संभावना जताई जा रही है, हालांकि इसका वास्तविक प्रभाव वैकल्पिक मार्गों के उपयोग और ट्रैफिक मैनेजमेंट पर निर्भर करेगा। फिलहाल, क्षेत्र के लोगों की निगाहें इस महत्वपूर्ण परियोजना की निर्माण प्रगति और तय समय-सीमा पर टिकी हुई हैं।