गया शहर में विजयादशमी के अवसर पर आयोजित होने वाला रावण दहन केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि लगभग सात दशकों पुरानी सांस्कृतिक परंपरा और सामाजिक भाईचारे का जीवंत प्रतीक है। शहर के ऐतिहासिक गांधी मैदान में वर्ष 1957 से लगातार रावण दहन का आयोजन किया जा रहा है, जिसकी नींव मूल रूप से तीन पंजाबी परिवारों ने मिलकर रखी थी।
तीन परिवारों की पहल से शुरू हुई थी परंपरा
ऐतिहासिक दस्तावेजों और रावण दहन कमेटी से प्राप्त जानकारी के अनुसार, वर्ष 1957 में मंगलदास, भूषणदास और रामदास नामक तीन पंजाबी परिवारों ने गया में रावण दहन की शुरुआत की थी। उस समय की गई यह छोटी सी पहल समय के साथ शहर की संस्कृति का एक अनिवार्य हिस्सा बन गई। शुरुआती दौर के बाद इस आयोजन से स्थानीय व्यवसायी वर्ग और अन्य नागरिक भी जुड़ते चले गए, जिससे कमेटी का दायरा लगातार बड़ा होता गया। आज यह आयोजन गया के सबसे बड़े और प्रतिष्ठित दशहरा आयोजनों में शुमार है।
कमेटी के सदस्यों ने इस वर्ष विजयादशमी के पावन अवसर पर जिलेवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं दी हैं। साथ ही शहरवासियों से अपील की गई है कि वे अपने परिवार के साथ बड़ी संख्या में गांधी मैदान पहुंचकर इस पारंपरिक उत्सव का हिस्सा बनें। आयोजकों का दावा है कि पर्व को भव्य और उल्लासपूर्ण बनाने के लिए सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं ताकि दर्शक सुरक्षित माहौल में इसका आनंद ले सकें।
सुरक्षा और यातायात के पुख्ता इंतजाम
गांधी मैदान में रावण दहन के दौरान जुटने वाली भारी भीड़ को नियंत्रित करना प्रशासन के लिए हमेशा एक बड़ी चुनौती होता है। इसे ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस विभाग ने सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए हैं। गया के वरीय पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) सुशील कुमार ने सुरक्षा व्यवस्था की जानकारी देते हुए बताया कि मैदान के भीतर और बाहर बैरिकेडिंग की गई है। दर्शकों के आने-जाने के लिए अलग से प्रवेश और निकास द्वार बनाए गए हैं।
पूरे आयोजन स्थल की निगरानी के लिए क्लोज-सर्किट टेलीविजन (CCTV) कैमरे लगाए गए हैं, जबकि आपातकालीन घोषणाओं के लिए पब्लिक एड्रेस सिस्टम की व्यवस्था की गई है। विधि-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पर्याप्त संख्या में पुलिस अधिकारियों, जवानों और दंडाधिकारियों (मजिस्ट्रेट) की तैनाती सुनिश्चित की गई है ताकि किसी भी प्रकार की अव्यवस्था से तुरंत निपटा जा सके।
असामाजिक तत्वों पर रहेगी पैनी नजर
भीड़भाड़ के दौरान उत्पन्न होने वाली ट्रैफिक समस्याओं से निपटने के लिए यातायात पुलिस ने एक विशेष ट्रैफिक प्लान तैयार किया है। वाहनों के आवाजाही मार्गों को डायवर्ट किया गया है और पार्किंग के लिए निश्चित स्थान तय किए गए हैं। पुलिस का खुफिया तंत्र और सादे लिबास में तैनात बल असामाजिक तत्वों पर पैनी नजर रखेगा। प्रशासन ने आम नागरिकों से यातायात नियमों का सख्ती से पालन करने, निर्धारित मार्गों का उपयोग करने और सुरक्षा कर्मियों के निर्देशों का सहयोग करने की अपील की है ताकि यह पारंपरिक पर्व शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हो सके।