जमुई के सुदूर ग्रामीण इलाके में दशकों पुराना पेयजल संकट अब समाप्त हो गया है। खैरा प्रखंड की हरनी पंचायत के अंतर्गत आने वाले केरवातरी गांव के ऊपर टोला के ग्रामीणों को पानी के लिए अब जंगलों की खाक नहीं छाननी पड़ेगी। यहां नवग्राम परियोजना के तहत सौर ऊर्जा संचालित अत्याधुनिक पेयजल प्रणाली और सामुदायिक स्नानघर की स्थापना की गई है, जिसका उद्घाटन शुक्रवार को एक सादे समारोह में किया गया।
केरवातरी गांव का ऊपर टोला लगभग 30 घरों की एक छोटी बस्ती है, जहां करीब 150 लोगों की आबादी निवास करती है। इस इलाके में वर्षों पहले लगाया गया सरकारी हैंडपंप काफी समय से खराब पड़ा था, जबकि इक्का-दुक्का निजी चापाकलों से पूरे टोले की जरूरतें पूरी नहीं हो पा रही थीं। इसके चलते यहां के लोगों को गंभीर पेयजल संकट का सामना करना पड़ रहा था।
महिलाओं को झेलना पड़ता था सबसे बड़ा संघर्ष
पेयजल किल्लत का सबसे भारी दंश इस टोले की महिलाओं और किशोरियों को झेलना पड़ता था। सुबह होते ही महिलाओं को पीने का पानी जुटाने के लिए घने जंगलों और पथरीली पगडंडियों से होते हुए लगभग एक किलोमीटर दूर स्थित एक पहाड़ी सोते तक जाना पड़ता था। जंगली रास्तों पर भारी बर्तन उठाकर पानी लाना उनकी दिनचर्या का सबसे कष्टप्रद हिस्सा बन चुका था, जो अब इस नई व्यवस्था के बाद पूरी तरह बदल जाएगा।
नवग्राम परियोजना और पानी संस्थान की पहल
ग्रामीणों की इस बुनियादी समस्या को देखते हुए नवग्राम परियोजना के तहत 'पानी संस्थान' ने 'अल्टियस' के सहयोग से इसका स्थायी समाधान निकाला। बिजली की अनिश्चितता से बचने के लिए गांव में सौर ऊर्जा यानी सोलर पैनल आधारित डीप बोरिंग और जलापूर्ति पाइपलाइन स्थापित की गई है। इसके साथ ही महिलाओं की गरिमा, निजता और बेहतर स्वच्छता को ध्यान में रखते हुए एक पक्का सामुदायिक स्नानघर भी तैयार कराया गया है।
ग्रामीणों की समिति को सौंपी गई जिम्मेदारी
शुक्रवार को आयोजित उद्घाटन समारोह में परियोजना समन्वयक दीपक कुमार, क्षेत्र समन्वयक राकेश कुमार, संजय कुमार और हर्षित सहित 'अल्टियस' एवं 'पानी संस्थान' के कई प्रतिनिधि मौजूद रहे। इसके अलावा हरनी पंचायत, अरुणमाबांक पंचायत और गोपालपुर पंचायत के मुखिया भी इस कार्यक्रम में शामिल हुए। उद्घाटन के बाद इन नई सुविधाओं के रखरखाव और प्रबंधन की जिम्मेदारी स्थानीय ग्रामीणों की एक समिति को सौंप दी गई है।