अरुणाचल प्रदेश में भारत और चीन के सैनिकों के बीच सीमा पर चल रहे तनाव और आमने-सामने आने की घटनाओं पर विदेश मंत्रालय (MEA) ने आधिकारिक प्रतिक्रिया दी है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि जब चीनी बल निर्धारित और स्थापित गश्त के तौर-तरीकों से भटकते हैं, तब भारत-चीन सीमा क्षेत्रों में स्थिति अशांत होती है। यह स्पष्टीकरण इंडो-तिब्बत बॉर्डर पुलिस (ITBP) के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर द्वारा अरुणाचल प्रदेश में स्थिति को संभालने वाले शौर्य कमांडो दलों की प्रशंसा किए जाने के बाद मचे राजनीतिक घमासान के बीच आया है।
आईटीबीपी प्रमुख के बयान और सीमा पर स्थिति
राजस्थान में एक कार्यक्रम के दौरान आईटीबीपी प्रमुख शत्रुजीत कपूर ने कहा था कि पिछले कुछ दिनों में एक ऐसी स्थिति उत्पन्न हुई जहां अरुणाचल प्रदेश में कई स्थानों पर आमने-सामने (फेस-ऑफ) की स्थिति पैदा हुई और यह अभी भी जारी है। हालांकि उन्होंने अपने संबोधन में सीधे तौर पर चीन का नाम नहीं लिया, लेकिन उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आईटीबीपी का गठन एक पर्वतीय गुरिल्ला बल के रूप में किया गया था और इसे 2004 में सीमा सुरक्षा कर्तव्यों का जिम्मा सौंपा गया था। उन्होंने कहा कि हमें अपने मूल और सटीक जनादेश को नहीं छोड़ना चाहिए।
यह बयान ऐसे समय में सामने आया जब इसके ठीक एक महीने पहले भारत और चीन के बीच अरुणाचल प्रदेश के ताक्सिंग क्षेत्र में तनाव की खबरों के बीच उच्च स्तरीय वार्ता हुई थी। गत 6 सितंबर को भारतीय पक्ष की ओर से वाचा-डामई बॉर्डर मीटिंग पॉइंट पर कॉर्प्स कमांडर स्तर की वार्ता आयोजित की गई थी। सूत्रों के अनुसार, किसी भी तरह की अनहोनी या तनाव को बढ़ने से रोकने के लिए इस क्षेत्र में भारतीय सैनिकों की भारी तैनाती लगातार बनी हुई है।
विदेश मंत्रालय की प्रतिक्रिया और कूटनीतिक प्रयास
साप्ताहिक ब्रीफिंग के दौरान एक सवाल के जवाब में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत-चीन सीमा क्षेत्रों में स्थिति समय-समय पर तब बिगड़ जाती है जब चीनी बल स्थापित गश्त के तरीकों से विचलन करते हैं। बिना किसी विशिष्ट विवरण में जाए, उन्होंने मीडियाकर्मियों को इस मामले पर अधिक जानकारी के लिए रक्षा मंत्रालय की ओर निर्देशित किया।
विदेश मंत्रालय ने बाद में एक अन्य बयान में यह भी कहा कि दोनों पक्ष वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के साथ किसी भी तरह की गलतफहमी और गलत गणना से बचने तथा बकाया मुद्दों को हल करने के लिए मौजूदा कूटनीतिक और सैन्य तंत्र का निरंतर उपयोग कर रहे हैं। मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि दोनों पक्षों ने बेहतर सीमा प्रबंधन के लिए उचित क्षेत्रों में एलएसी की समझ को बेहतर बनाने के तरीकों पर चर्चा करने के लिए भी सहमति व्यक्त की है।
विपक्ष का हमला और राजनीतिक प्रतिक्रिया
इस पूरे घटनाक्रम पर विपक्षी दल कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खर्गे ने सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से देश के सामने सच्चाई रखने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि गालवान के बाद अब अरुणाचल प्रदेश में भी चीनी घुसपैठ की चिंताजनक रिपोर्ट्स सामने आ रही हैं। खर्गे ने सवाल उठाया कि क्या गालवान और डोकलाम के बाद एक और गंभीर टकराव की स्थिति बन रही है और क्या भारत की गश्त तक पहुंच से समझौता किया गया है।
कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया कि मई-जून 2020 में लद्दाख की घटनाओं के बाद से सरकार की नीतियों के चलते चीन के साथ व्यापार घाटा रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है और कूटनीतिक बैठकों तथा वार्ताओं के बावजूद जमीन पर कोई ठोस परिणाम नहीं दिखाई दिए हैं। विपक्षी दल ने मांग की है कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर सरकार को संसद और देश को पूरी तरह से भरोसे में लेना चाहिए।