हरिद्वार और बागेश्वर के संतों की उपस्थिति में हुआ भव्य स्वागत, छलिया नृत्य और महादेव के जयकारों से गूंजा नगर
उत्तराखंड के बागेश्वर जिले में जूना अखाड़े की प्राचीन पवित्र छड़ी यात्रा का बागनाथ धाम पहुंचने पर स्थानीय श्रद्धालुओं द्वारा भव्य स्वागत किया गया। इस धार्मिक आयोजन के दौरान पारंपरिक छलिया नृत्य की प्रस्तुतियां दी गईं और भगवान शिव के जयकारों से पूरा नगर क्षेत्र भक्तिमय हो गया। यात्रा में शामिल संतों और श्रद्धालुओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और इस परंपरा को सनातन संस्कृति के प्रसार का माध्यम बताया।
धार्मिक परंपरा और शंकराचार्य का इतिहास
जूना अखाड़े के संतों ने इस यात्रा के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह प्राचीन परंपरा वर्षों से निरंतर चली आ रही है। संतों के अनुसार, मान्यता है कि आदि जगद्गुरु शंकराचार्य ने अपने जीवन के शुरुआती चरण में, मात्र पांच वर्ष की आयु में, छड़ी लेकर धर्म की रक्षा और उसके प्रचार-प्रसार के लिए यात्रा की शुरुआत की थी। उसी सनातन परंपरा का निर्वहन करते हुए आज भी यह छड़ी यात्रा निकाली जाती है, जो देश के विभिन्न हिस्सों से होते हुए धार्मिक स्थलों तक पहुंचती है।
धर्म और संस्कृति के प्रति जागरूकता का संकल्प
आयोजन के दौरान संतों ने स्पष्ट किया कि इस पवित्र यात्रा का मुख्य उद्देश्य आम जनमानस को अपनी प्राचीन धर्म, संस्कृति और सनातन मूल्यों के प्रति जागरूक करना है। इसके साथ ही, वर्तमान समय में सामने आ रही सामाजिक चुनौतियों, विशेषकर धर्म परिवर्तन जैसे संवेदनशील विषयों पर लोगों को जागरूक करने और समाज को एकजुट रखने का प्रयास भी इस यात्रा के माध्यम से किया जा रहा है ताकि युवा अपनी संस्कृति से जुड़े रहें।
प्रमुख संतों और गणमान्य लोगों की उपस्थिति
इस अवसर पर पंचदशनाम जूना अखाड़ा हरिद्वार के अंतरराष्ट्रीय संरक्षक हरि गिरि महाराज विशेष रूप से उपस्थित रहे। उनके साथ जूना अखाड़ा बागेश्वर के श्रीमहंत शंकर गिरि महाराज, आकाश गिरि, राहुल गिरि सहित कई अन्य संत, महात्मा और बड़ी संख्या में स्थानीय श्रद्धालु मौजूद रहे जिन्होंने इस धार्मिक अनुष्ठान को सफल बनाया।