उत्तर और दक्षिण बिहार को जोड़ने वाले विक्रमशिला सेतु पर युद्धस्तर पर चल रहा कायाकल्प, दिसंबर अंत तक स्थायी स्टील ट्रस ब्रिज से यातायात बहाल होने की उम्मीद।
भागलपुर के ऐतिहासिक विक्रमशिला सेतु पर इन दिनों बुनियादी ढांचे के सुदृढ़ीकरण और पुनर्स्थापन का कार्य बेहद तेजी से चल रहा है। पिछले दिनों मई महीने में पुल का स्लैब क्षतिग्रस्त होने के बाद वैकल्पिक रूप से बेली ब्रिज स्थापित किया गया था, जिसे सितंबर के अंत में पूरी तरह हटा दिया गया है। इसके बाद से 1 अक्टूबर से आगामी तीन महीनों के लिए इस महत्वपूर्ण पुल पर हर प्रकार के वाहनों का परिचालन पूरी तरह से बंद कर दिया गया है।
आधुनिक तकनीकों से हो रहा है स्थायी सुधार
बिहार कैबिनेट द्वारा स्वीकृत 126.26 करोड़ रुपये के भारी-भरकम बजट से इस बार पुल की स्थायी मरम्मत की जा रही है। पथ निर्माण निगम और विशेषज्ञ एजेंसियों की टीमें चौबीसों घंटे काम कर रही हैं ताकि तय समयसीमा के भीतर पुल को पूरी तरह सुरक्षित बनाकर दोबारा खोला जा सके। मरम्मत कार्य को आधुनिक और वैज्ञानिक तरीकों से अंजाम दिया जा रहा है। महाराष्ट्र की विशेषज्ञ एजेंसी ‘मैटे एसोसिएट्स’ द्वारा चिन्हित कमजोर और क्षतिग्रस्त कंक्रीट स्लैबों को तोड़े जाने का काम पूरा किया जा चुका है। इसके बाद दिल्ली की विख्यात फर्म ‘मंगलम फर्म’ के तकनीकी मार्गदर्शन में पुनर्स्थापन के अगले चरण के तहत क्षतिग्रस्त हिस्सों पर एक मजबूत और स्थायी ‘स्टील ट्रस ब्रिज’ का निर्माण किया जा रहा है।
इसके साथ ही पुल के सुपरस्ट्रक्चर का कुल वजन कम करने के लिए वर्षों पुरानी आरसीसी रेलिंग और फुटपाथ को काटकर हटाया जा रहा है। इसकी जगह ‘सुहानी प्रोजेक्ट्स’ द्वारा हल्की और अत्यधिक मजबूत स्टील रेलिंग लगाई जा रही है। प्रशासन इस बार केवल तात्कालिक मरम्मत तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य की सुरक्षा को लेकर भी कड़े कदम उठा रहा है। पहली बार पुराने विक्रमशिला सेतु पर आधुनिक ‘ब्रिज हेल्थ मॉनीटरिंग सिस्टम’ स्थापित करने का निर्णय लिया गया है। यह डिजिटल प्रणाली चौबीसों घंटे पुल की संरचनात्मक स्थिति, किसी भी प्रकार की दरार या झुकाव जैसे संभावित खतरों पर बारीकी से नजर रखेगी। किसी भी तरह की गड़बड़ी या असामान्यता पाए जाने पर यह सिस्टम प्रशासन को समय रहते डिजिटल अलर्ट भेज देगा, जिससे भविष्य में बड़े हादसों को टाला जा सकेगा।
यात्रियों के लिए वैकल्पिक जलमार्ग और उत्पन्न चुनौतियां
पुल पर सड़क मार्ग पूरी तरह ठप होने के कारण जिला प्रशासन द्वारा बियाडा, बाबूपुर और जाह्नवी चौक घाटों के बीच आम लोगों की आवाजाही के लिए 12 जहाजों और रो-रो वेसल्स के माध्यम से मुफ्त स्टीमर सेवा का संचालन किया जा रहा है। वर्तमान में मोटरसाइकिल सवार और आम यात्री इसी जलमार्ग के जरिए गंगा नदी पार कर रहे हैं। हालांकि, इस वैकल्पिक व्यवस्था पर अब संकट के बादल मंडराने लगे हैं। जहाज संचालकों और मालिकों ने जिला प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि उनके लगभग 50 लाख रुपये के पुराने बकाए का तत्काल भुगतान नहीं किया गया, तो वे किसी भी समय इस फेरी सेवा को बंद कर सकते हैं। यदि यह सेवा ठप होती है, तो सीमांचल और उत्तर बिहार जाने वाले लाखों रेल और सड़क यात्रियों की मुश्किलें कई गुना बढ़ सकती हैं।
भविष्य की योजनाएं और समयसीमा
भागलपुर जिला प्रशासन और पुल निर्माण निगम के वरिष्ठ अधिकारी लगातार मौके पर कैंप कर चौबीसों घंटे चल रहे निर्माण कार्यों की कड़ी मॉनीटरिंग कर रहे हैं। अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि मकर संक्रांति से पहले या दिसंबर के अंतिम सप्ताह तक हर हाल में स्थायी पुल पर यातायात सुचारू कर दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त, इस सेतु के समानांतर बनाए जा रहे नए फोरलेन पुल का निर्माण कार्य भी तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है, जिसे वर्ष 2027 तक पूरा करने का आधिकारिक निर्देश दिया गया है ताकि भागलपुर के नागरिकों को लंबे समय से चली आ रही ट्रैफिक जाम और जर्जर पुलों की समस्या से हमेशा के लिए मुक्ति मिल सके।