बिना इंजीनियरिंग डिग्री के 13 साल के संघर्ष के बाद तैयार हुआ देश का पहला पर्सनल फ्लाइंग व्हीकल, अल्मोड़ा में हुआ सफल परीक्षण
उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के निवासी युवा इनोवेटर रवि टम्टा ने बिना किसी औपचारिक इंजीनियरिंग डिग्री के अपने दम पर देश की पहली स्वदेशी इलेक्ट्रिक सिंगल-सीटर फ्लाइंग कार का प्रोटोटाइप तैयार कर एक नया मील का पत्थर स्थापित किया है। उनके द्वारा विकसित इस उड़ने वाली कार के सफल परीक्षण ने तकनीकी जगत का ध्यान अपनी ओर खींचा है।
स्टार्टअप और तकनीक की विशेषताएं
रवि टम्टा ने अपने स्टार्टअप 'हपिडा स्काई प्राइवेट लिमिटेड' के अंतर्गत इस पर्सनल फ्लाइंग व्हीकल को विकसित किया है, जिसे 'HAPIDA SKYNeX' (हैपिडा स्काईनेक्स) नाम दिया गया है। यह वाहन पूरी तरह से ड्रोन तकनीक यानी मल्टी-रोटर सिस्टम पर आधारित है। यह शत-प्रतिशत इलेक्ट्रिक है, जो बिना किसी पेट्रोल या डीजल के संचालित होती है और पर्यावरण के अनुकूल शून्य प्रदूषण के सिद्धांत पर काम करती है।
प्रशासन की मौजूदगी में सफल परीक्षण
इस वाहन का पहला आधिकारिक सफल उड़ान परीक्षण 6 और 7 अगस्त 2026 को अल्मोड़ा के एक मैदान और आर्मी हेलीपैड पर जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों, जिनमें जिला मजिस्ट्रेट (DM) और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) शामिल थे, की उपस्थिति में संपन्न हुआ। इस परीक्षण के दौरान इनोवेटर रवि टम्टा ने स्वयं वाहन को संचालित किया और यह फ्लाइंग कार हवा में लगभग एक मिनट तक पूरी तरह सुरक्षित रूप से मंडराती रही।
पहाड़ी क्षेत्रों के लिए वरदान
रवि टम्टा के अनुसार, उत्तराखंड के दुर्गम पहाड़ी इलाकों में भौगोलिक बनावट के कारण 40 किलोमीटर की दूरी तय करने में घुमावदार रास्तों से गुजरना पड़ता है, जिसमें आमतौर पर लगभग 90 मिनट यानी डेढ़ घंटे का समय लगता है। इस फ्लाइंग कार के जरिए इसी दूरी को मात्र 10 से 12 मिनट में पूरा किया जा सकेगा। इस नवाचार का मुख्य उद्देश्य आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं, राहत और बचाव कार्यों (रेस्क्यू ऑपरेशन) तथा दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में आवागमन के समय को न्यूनतम करना है।तेरह साल का कड़ा संघर्ष और संसाधन
इस मुकाम तक पहुंचने की यात्रा आसान नहीं थी। रवि टम्टा ने केवल कला संकाय से स्नातक (B.A.) तक की शिक्षा प्राप्त की है। तकनीकी पृष्ठभूमि न होने के बावजूद उन्होंने पिछले 13 वर्षों तक इंटरनेट, यूट्यूब और विभिन्न ऑनलाइन माध्यमों से एयरोनॉटिक्स और ड्रोन तकनीक पर गहन शोध किया। सीमित संसाधनों के बीच निरंतर प्रयोग और असफलताओं से सीखते हुए उन्होंने अंततः इस प्रोटोटाइप को सफलतापूर्वक तैयार किया। इस उपलब्धि पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी रवि टम्टा को आधिकारिक रूप से बधाई दी है।
व्यावसायिक इस्तेमाल से पहले की औपचारिकताएं
हालांकि यह उड़ान परीक्षण बेहद सफल रहा है, लेकिन इस तकनीक को आम नागरिकों के उपयोग और व्यावसायिक स्तर पर बाजार में उतारने से पहले अभी कई चरणों से गुजरना बाकी है। विमानन नियामक संस्था (DGCA) की मंजूरी, कड़े सुरक्षा मानकों का निर्धारण, बैटरी लाइफ की क्षमता और उन्नत मैपिंग टेस्टिंग जैसे तकनीकी परीक्षण अभी शेष हैं, जिनके पूरा होने के बाद ही इसके व्यावहारिक उपयोग की रूपरेखा तय होगी।