अमरोहा में साइबर अपराधियों द्वारा ग्राम पंचायत सचिवों की आईडी हैक कर बड़े पैमाने पर फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनाए जाने का मामला सामने आया है। सरकारी ऑनलाइन व्यवस्था की खामियों का फायदा उठाते हुए जालसाजों ने महज तीन दिनों के भीतर 1820 फर्जी प्रमाण पत्र जारी कर दिए।
उत्तर प्रदेश के अमरोहा जनपद के जोया और मंडी धनौरा विकास खंड क्षेत्र में साइबर अपराधियों ने ऑनलाइन पोर्टल पर बड़ी सेंधमारी की है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि जालसाजों ने ग्राम पंचायत सचिवों की यूजर आईडी और पासवर्ड हैक करके अवैध तरीके से जन्म प्रमाण पत्र बनाए। इस पूरी घटना ने सरकारी महकमे की ऑनलाइन कार्यप्रणाली और सुरक्षा तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जांच में उजागर हुए चौंकाने वाले तरीके
जांच के दौरान जो तथ्य सामने आए हैं, वे बेहद हैरान करने वाले हैं। जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के लिए ऑनलाइन पोर्टल पर उच्चाधिकारियों की संस्तुति या अन्य वैध अनुशंसा पत्र अपलोड करना अनिवार्य होता है। लेकिन इस मामले में साइबर अपराधियों ने पोर्टल पर सत्यापन के लिए न तो कोई वैध संस्तुति पत्र लगाया और न ही पुख्ता दस्तावेज। इसके बजाय, उन्होंने पोर्टल पर केवल कोरे कागज (ब्लेक पेपर्स) या फिर पुराने शासनादेश अपलोड कर दिए और सिस्टम की कमियों के सहारे प्रमाण पत्र स्वीकृत करा लिए।
किन क्षेत्रों में और कब हुआ खेल?
पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की शुरुआती पड़ताल के अनुसार यह पूरा फर्जीवाड़ा दो अलग-अलग तहसीलों और ब्लॉकों से जुड़ा है:
- जोया ब्लॉक: यहाँ के तोफापुर गाँव में ग्राम पंचायत सचिव की आईडी को हैक किया गया। इस आईडी से 6 और 7 अक्टूबर को देश के 17 अलग-अलग राज्यों के लिए कुल 498 फर्जी जन्म प्रमाण पत्र जारी किए गए।
- मंडी धनौरा ब्लॉक: यहाँ मुसल्लेपुर, बाखरपुर, सैदपुर और मोहम्मदपुर पट्टी ग्राम पंचायतों के सचिवों की आईडी को 5 अक्टूबर को निशाना बनाया गया। इन चारों पंचायतों की आईडी से एक ही दिन में 1322 फर्जी प्रमाण पत्र तैयार कर दिए गए। खास बात यह है कि संबंधित ग्राम सचिवों को इस फर्जीवाड़े की भनक 21 अक्टूबर को यानी घटना के 17 दिन बाद लगी।
स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की कार्रवाई
मामला संज्ञान में आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने त्वरित कदम उठाते हुए प्रभावित सभी ग्राम पंचायत सचिवों की आईडी को लॉक कर दिया है ताकि आगे और दुरुपयोग न हो सके। हालांकि, इस घटना ने ऑनलाइन नागरिक सेवाओं की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई बड़े सवाल छोड़ दिए हैं। केवल कोरे कागज और शासनादेश अपलोड होने के बावजूद ऑटोमैटिक सिस्टम या पोर्टल के स्तर पर इन आवेदनों के स्वीकृत हो जाने से ऑनलाइन पोर्टल के सुरक्षा घेरे की पोल खुल गई है। मामले की जाँच जारी है और साइबर सेल इस बात का पता लगाने में जुटी है कि इन फर्जी प्रमाण पत्रों का इस्तेमाल किन उद्देश्यों के लिए किया गया है।