हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता ओम पुरी ने अपने निधन से कुछ समय पहले एक साक्षात्कार में अपनी मौत को लेकर एक ऐसी बात कही थी, जो बाद में सच साबित हुई। चाय की दुकान पर बर्तन धोने से लेकर हॉलीवुड तक का सफर तय करने वाले इस कलाकार के जीवन के कई पहलू आज भी लोगों को प्रेरित करते हैं।
अभावों से भरा शुरुआती जीवन और संघर्ष
ओम पुरी का शुरुआती जीवन बेहद साधारण और आर्थिक तंगी के साए में बीता। परिवार की कमजोर वित्तीय स्थिति के कारण उन्हें बचपन में ही छोटी-मोटी नौकरियां करनी पड़ी थीं। उन्होंने एक समय पर चाय की दुकान पर भी काम किया और बर्तन धोए। तमाम मुश्किलों के बावजूद अभिनय के प्रति उनका जुनून कम नहीं हुआ। कड़ी मेहनत के बाद उन्होंने अभिनय की दुनिया में कदम रखा और अपनी बेजोड़ कला के दम पर हिंदी सिनेमा में एक खास मुकाम हासिल किया। उन्होंने गंभीर और संजीदा भूमिकाओं से लेकर कॉमिक किरदारों तक में अपनी छाप छोड़ी।
मृत्यु को लेकर कही गई वह हैरान करने वाली बात
अपने जीवन के अंतिम दौर में दिए गए एक साक्षात्कार में ओम पुरी ने अपनी मृत्यु को लेकर खुलकर बात की थी। उन्होंने सहज अंदाज में यह आशंका जताई थी कि उनकी मौत अचानक होगी और किसी को संभलने का मौका नहीं मिलेगा। उन्होंने कहा था कि जब उनकी सांसें थमेंगी, तो वे गहरी नींद में होंगे और दुनिया को इसकी तुरंत भनक नहीं लग पाएगी। उनका यह कथन 6 जनवरी 2017 की सुबह सच साबित हुआ, जब मुंबई स्थित उनके आवास पर दिल का दौरा पड़ने से उनका अचानक निधन हो गया। उनके निधन के बाद उनका यह पुराना साक्षात्कार सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ था।
सिनेमा जगत में अमिट योगदान और सम्मान
चार दशक से अधिक लंबे करियर में ओम पुरी ने भारतीय सिनेमा के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान बनाई। उन्होंने 'आक्रोश', 'अर्ध सत्य', 'जाने भी दो यारो', 'मिर्च मसाला', 'माचिस', 'गुप्त', 'हेरा फेरी' और 'चुप चुप के' जैसी कई प्रतिष्ठित फिल्मों में यादगार अभिनय किया। भारतीय सिनेमा तक सीमित न रहकर उन्होंने 'ईस्ट इज़ ईस्ट', 'सिटी ऑफ़ ज्वॉय', 'वुल्फ' और 'द हंड्रेड-फुट जर्नी' जैसी हॉलीवुड और ब्रिटिश फिल्मों में भी महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाईं। इसके अलावा 'कक्काजी कहिन' और 'भारत एक खोज' जैसे लोकप्रिय टेलीविजन धारावाहिकों में भी उनके काम को सराहा गया। उनकी कलात्मक और असाधारण अभिनय क्षमता को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें वर्ष 1990 में देश के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'पद्मश्री' से अलंकृत किया था। इसके साथ ही उन्हें प्रतिष्ठित राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों से भी सम्मानित किया जा चुका है।