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बरेका में ठेका श्रमिकों के लिए बड़ा फैसला, नए श्रम कानूनों का कड़ाई से होगा पालन

बरेका में ठेका श्रमिकों के लिए बड़ा फैसला, नए श्रम कानूनों का कड़ाई से होगा पालन

वाराणसी के औद्योगिक और प्रशासनिक गलियारों से एक बेहद महत्वपूर्ण और राहत भरी खबर सामने आ रही है। बनारस रेल इंजन कारखाना (बरेका) प्रशासन ने अपने यहाँ कार्यरत ठेका श्रमिकों के अधिकारों और कल्याण को लेकर एक कड़ा और बड़ा कदम उठाया है। उत्पादन इकाई में नए श्रम कानूनों के प्रभावी और शत-प्रतिशत अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए एक उच्चस्तरीय बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि कारखाने में पसीना बहाने वाले हर एक ठेका श्रमिक को उसके कानूनी और सामाजिक सुरक्षा अधिकार समय पर और पूरी पारदर्शिता के साथ मिल सकें।

प्रमुख मुख्य कार्मिक अधिकारी की अध्यक्षता में हुई अहम बैठक

गुरुवार को आयोजित इस उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता बरेका के प्रमुख मुख्य कार्मिक अधिकारी लालजी चौधरी ने की। इस बैठक में विभिन्न विभागों से आए नामित नोडल अधिकारियों ने शिरकत की। बैठक का मुख्य एजेंडा देश में लागू किए गए चार नए श्रम कानूनों के प्रावधानों को बरेका के परिवेश में पूरी तरह से जमीन पर उतारना था। अधिकारियों ने इस बात पर विशेष मंथन किया कि किस प्रकार ठेका श्रमिकों की कार्यदशाओं को और अधिक सुरक्षित तथा पारदर्शी बनाया जाए, ताकि किसी भी स्तर पर श्रमिकों के अधिकारों का हनन न हो सके।

बैठक में मुख्य रूप से चार नए श्रम कानूनों पर चर्चा की गई, जिनमें मजदूरी संहिता 2019, औद्योगिक संबंध संहिता 2020, सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020 और व्यवसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्यदशाएं संहिता 2020 शामिल हैं। प्रशासन का स्पष्ट रुख है कि इन सभी संहिताओं के दायरे में आने वाले प्रत्येक नियम का पालन कारखाने के भीतर कड़ाई से किया जाएगा।

ठेका श्रमिकों के लिए ईपीएफ और ईएसआईसी का लाभ अनिवार्य

अक्सर यह देखने को मिलता है कि निर्माण या अन्य ठेकेदारी कार्यों में लगे श्रमिकों को उनके सामाजिक सुरक्षा लाभों से वंचित रहना पड़ता है। इस समस्या पर कड़ा रुख अपनाते हुए बरेका प्रशासन ने निर्देश दिए हैं कि प्रत्येक ठेका श्रमिक को नियमानुसार कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) और कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) का लाभ अनिवार्य रूप से मिलना चाहिए। इसके साथ ही:

  • समय पर वेतन भुगतान: श्रमिकों को निर्धारित दर के अनुसार हर महीने तय समय पर पूरा वेतन मिलना सुनिश्चित किया जाएगा।
  • वेतन पर्ची (सैलरी स्लिप): प्रत्येक श्रमिक को पारदर्शिता बनाए रखने के लिए वेतन पर्ची उपलब्ध कराई जाएगी।
  • उपस्थिति और पंजीकरण: कार्यस्थल पर श्रमिकों की पारदर्शी उपस्थिति दर्ज करने के साथ ही उनका आधिकारिक पंजीकरण भी अनिवार्य होगा।
  • कल्याणकारी सुविधाएं: कानून में निहित सभी प्रकार की कल्याणकारी और स्वास्थ्य संबंधी सुविधाएं ठेकेदारों द्वारा मुहैया कराई जाएंगी।

संविदाओं में जोड़े जाएंगे श्रम कानूनों के कड़े प्रावधान

बरेका प्रशासन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भविष्य में या वर्तमान में जितनी भी संविदाएं (Contracts) संचालित हो रही हैं, उन सभी में नए श्रम कानूनों के प्रावधानों को प्रभावी रूप से शामिल किया जाएगा। बैठक में मौजूद सभी विभागीय नोडल अधिकारियों को यह सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने विभागों के अंतर्गत कार्यरत ठेकेदारों और उनके श्रमिकों के दस्तावेजों तथा अभिलेखों की गहनता से जांच करें।

अभिलेखों के सत्यापन के दौरान यह देखा जाएगा कि क्या ठेकेदार अपने श्रमिकों को न्यूनतम मजदूरी दे रहे हैं या नहीं। इसके अलावा, कार्यस्थल पर सुरक्षा मानकों का पालन हो रहा है या नहीं, इसकी भी नियमित समीक्षा करने के आदेश दिए गए हैं। यदि किसी भी स्तर पर कोई लापरवाही या नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो संबंधित ठेकेदार और दोषी पक्षों के खिलाफ त्वरित और अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

नियमित निगरानी और उच्चाधिकारियों की मौजूदगी

कारखाने में सिर्फ कागजी कार्रवाई तक ही इन कानूनों को सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि इसकी जमीनी हकीकत जानने के लिए नियमित निगरानी और समीक्षा की व्यवस्था की गई है। संबंधित विभागों को अपने स्तर से अनुपालन रिपोर्ट को हमेशा अद्यतन रखने को कहा गया है ताकि किसी भी औचक निरीक्षण के दौरान पारदर्शिता बनी रहे। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि श्रमिकों के हितों के मामले में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

इस महत्वपूर्ण बैठक में बरेका के कई वरिष्ठ और जिम्मेदार अधिकारी मौजूद रहे। इनमें मुख्य यांत्रिक इंजीनियर/सर्विस इंजीनियर एवं प्रधान नियोक्ता विपुल सिंह, मुख्य संरक्षा अधिकारी जितेंद्र अग्रवाल, उप मुख्य कार्मिक अधिकारी (मुख्यालय) समीर पॉल सहित अन्य प्रमुख अधिकारी शामिल रहे। इन सभी अधिकारियों ने अपने-अपने विभागों में इन निर्देशों का अक्षरशः पालन कराने का संकल्प लिया है।

श्रमिक संगठनों और आम जनमानस में सकारात्मक संदेश

बरेका प्रशासन के इस कदम को एक दूरदर्शी और श्रमिक-हितैषी पहल के रूप में देखा जा रहा है। जानकारों का मानना है कि यदि सार्वजनिक क्षेत्र के बड़े कारखाने इस प्रकार से नए श्रम कानूनों का कड़ाई से पालन कराना शुरू कर दें, तो इससे न केवल संगठित बल्कि असंगठित और ठेका श्रमिकों के जीवन स्तर में भी अभूतपूर्व सुधार आ सकता है। कार्यस्थल पर सुरक्षा और समयबद्ध वेतन मिलने से श्रमिकों की कार्यक्षमता और मनोबल दोनों में वृद्धि होगी, जिसका सीधा सकारात्मक प्रभाव उत्पादन इकाइयों की कार्यप्रणाली पर पड़ेगा।

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रोली सिंह

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Writer (स्थानीय खबरें)

रोली सिंह पिछले 2 सालों से पत्रकारिता और न्यूज़ रिपोर्टिंग से जुड़ी हैं। वह लोकल न्यूज़ और लोगों से जुड़े मुद्दों को पढ़ने वालों तक पहुंचाने का काम...

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